साइबर क्राइम -0️⃣ डिजिटल अरेस्ट -अध्ययन एक शुरुआत


 जिस तरह से रोज कानूनी ढांचे में सुधार कर अपराध पर नकेल कसने के कार्य किये जा रहे हैं उसी तरह से अपराध की दुनिया भी नित नये कीर्तिमान रच रही है. आज हमारी रोजमर्रा की जिंदगी डिजिटल होती जा रही है. मोबाइल फोन का उपयोग अब बाजार में आम बात हो गई है, अब लगभग हर पेमेंट डिजिटल माध्यम से किया जा रहा है. गूगल पे, फोन पे डिजिटल भुगतान के बड़े ऐप्प के रूप में सर्व स्वीकार्य माध्यम बन चुके हैं और इस डिजिटल भुगतान का ही परिणाम है कि आज अपराध की दुनिया भी डिजिटल माध्यम अपना रही है. पहले जिस तरह अपराधी राहजनी करते थे, रातों रात सड़कों के किनारे बैठकर आती जाती गाड़ियों पर हमले कर लूटपाट करते थे, घरों में घुसकर डकैती और लूट करते थे, अब पीड़ित से रूबरू होने के ऐसे तौर तरीके अपराधी छोड़ते जा रहे हैं, अब अपराधी सब तरह के अपराध कर रहे हैं, लोगों को डरा धमका रहे हैं किन्तु उनके सामने ना आकर बल्कि डिजिटल स्वरूप को अपनाकर. अब अपराध की दुनिया हाई फाई डिजिटल होती जा रही है और इतनी ज्यादा कि क़ानून व्यवस्था को छिन्न भिन्न कर आज ये पढ़े लिखे उच्च शिक्षित अपराधी क़ानून के रखवालों से दो हाथ आगे ही जा रहे हैं.

    इसी कड़ी में अपराध की दुनिया में नया अपराध प्रवेश कर चुका है साइबर अपराध के रूप में. साइबर अपराध मे अपराधी आम जनता के बैंक खातों में खुद आम जनता की अनदेखी, अनजानी गलतियों से सेंध लगा रहे हैं और उनके पूरे के पूरे बैंक खाते चुटकियों में खाली कर रहे हैं. 

देश में बढ़ते साइबर अपराध को लेकर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस सूर्य कांत ने गंभीर चिंता जताई है। इंडिया टी वी द्वारा 20 अप्रैल 2026 को प्रकाशित एक समाचार मे बताया गया कि CBI के एक कार्यक्रम में उन्होंने साफ कहा कि अब अपराध का तरीका पूरी तरह बदल चुका है। पहले जहां चोरी या हथियारों से अपराध होते थे, अब ठग मोबाइल फोन, फर्जी कॉल, मैसेज और ऐप के जरिए लोगों को निशाना बना रहे हैं। CJI के मुताबिक, पिछले दो साल में साइबर ठगी से लोगों को करीब 44 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि ये सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, बल्कि इस बात का सबूत हैं कि अपराधी कितनी तेजी से आम लोगों तक पहुंच रहे हैं।इसके साथ ही मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने यह भी बताया कि कई साइबर फ्रॉड गैंग भारत के बाहर, खासकर दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ इलाकों से ऑपरेट हो रहे हैं। वहां बड़े-बड़े स्कैम सेंटर चल रहे हैं, जहां फर्जी कॉलिंग, डेटा चोरी और निवेश के नाम पर ठगी की जाती है। कुछ मामलों में लोगों को जबरन वहां बंधक बनाकर काम भी कराया जाता है। है जिसे लेकर आज आम जनमानस दहशत में है. काफ़ी हद तक दहशत और खौफ और कुछ हद तक आदमी का खुद का लालच, जिसमें अपराधी के मकड़जाल में आदमी इस कदर फंसता है कि जब उसका डर खत्म होता है या उसकी आँख खुलती है तब तक वह लुट चुका होता है.इंडिया टी वी न्यूज 20 अप्रैल 2026 को सीबीआई के एक कार्यक्रम में CJI ने साफ कहा कि साइबर अपराध से निपटना सिर्फ पुलिस या CBI के बस की बात नहीं है। इसके लिए बैंक, टेलीकॉम कंपनियां, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और जांच एजेंसियों को मिलकर काम करना होगा।उन्होंने सुझाव दिया कि जैसे ही कोई संदिग्ध ट्रांजैक्शन हो, तुरंत अलर्ट मिलना चाहिए ताकि समय रहते पैसे रोके जा सकें। साथ ही, CJI ने कहा कि न्यायपालिका को भी डिजिटल दौर के हिसाब से खुद को अपडेट करना होगा। साइबर अपराध कई राज्यों और देशों तक फैले होते हैं, इसलिए अदालतों को डिजिटल सबूत और नए तरीकों को समझना जरूरी है। अपने भाषण के अंत में CJI ने कहा कि साइबर दुनिया एक बड़े समुद्र की तरह है—जिसमें मौके भी हैं और खतरे भी। अगर पुलिस, जांच एजेंसियां और न्यायपालिका मिलकर काम करें, तभी इस डिजिटल दुनिया को सुरक्षित बनाया जा सकता है. 

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धन्यवाद 🙏🙏

द्वारा 

शालिनी कौशिक 

एडवोकेट 

कैराना (शामली )

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