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CYBER LAW 1️⃣ साइबर क़ानून भारत में

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    आधुनिक अपराधशास्त्र के जनक सेसरे लोम्ब्रोसो एक इतालवी डॉक्टर थे, उनका मानना ​​था कि अपराधी पैदा होते हैं, बनाए नहीं जाते। लोम्ब्रोसो के अनुसार, जो लोग अपराध करते हैं, उन्हें वे गुण विरासत में मिलते हैं जो उन्हें अपराधी बनाते हैं। ➡️ साइबर अपराध के प्रकार- साइबर अपराध कई प्रकार के होते हैं, जिनमें हैकिंग, फ़िशिंग, मैलवेयर, रैनसमवेयर, और साइबर स्टॉकिंग शामिल हैं। इन अपराधों में, हैकर्स अनधिकृत रूप से कंप्यूटर सिस्टम और नेटवर्क तक पहुंच प्राप्त करने के लिए अपनी तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं, जबकि फिशिंग में, वे झूठी ईमेल या वेबसाइट के माध्यम से लोगों से व्यक्तिगत जानकारी प्राप्त करते हैं। मैलवेयर और रैनसमवेयर सॉफ्टवेयर को कंप्यूटर सिस्टम को नुकसान पहुंचाने या बाधित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, और साइबर स्टॉकिंग में ऑनलाइन उत्पीड़न और धमकाने की गतिविधियां शामिल हैं.  ➡️ साइबर अपराध के कुछ अन्य प्रकार- 🌑 पहचान की चोरी: यह एक ऐसा अपराध है जिसमें कोई व्यक्ति आपकी व्यक्तिगत जानकारी जैसे कि नाम, पता, सोशल सिक्योरिटी नंबर या क्रेडिट कार्ड नंबर का उपयोग करता है.  🌑 इंट...

साइबर ठग आपके आसपास -अलर्ट

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➡️ साइबर क्राइम के प्रकार- साइबर क्राइम आज कई रूपों में आम जनता को परेशान कर रहा है. इसके मुख्य प्रकार निम्नलिखित हैं-  साइबर क्राइम के 5 मुख्य प्रकार हैं: हैकिंग, फ़िशिंग, पहचान की चोरी, रैनसमवेयर और मैलवेयर हमले.  1️⃣. हैकिंग : यह किसी कंप्यूटर सिस्टम या नेटवर्क में अनधिकृत पहुंच प्राप्त करने की प्रक्रिया है.  2️⃣. फ़िशिंग : यह एक प्रकार का साइबर अपराध है जिसमें अपराधियों द्वारा ईमेल, टेक्स्ट संदेश या अन्य संचार के माध्यम से लोगों को धोखा देकर उनकी व्यक्तिगत जानकारी जैसे यूजरनेम, पासवर्ड, क्रेडिट कार्ड नंबर आदि प्राप्त करने का प्रयास किया जाता है.  3️⃣. पहचान की चोरी: इसमें किसी व्यक्ति की पहचान (जैसे नाम, पता, जन्म तिथि, आदि) का उपयोग करके धोखाधड़ी या अन्य आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देना शामिल है.  4️⃣. रैनसमवेयर : यह एक प्रकार का मैलवेयर है जो कंप्यूटर सिस्टम या डेटा को लॉक कर देता है और फिर इसे अनलॉक करने के लिए फिरौती की मांग करता है.  5️⃣. मैलवेयर : यह एक प्रकार का सॉफ्टवेयर है जिसे कंप्यूटर सिस्टम को नुकसान पहुंचाने या उसमें अनधिकृत पहुंच प्राप्त क...

साइबर क्राइम आपके करीब

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अपराध को कई प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है, जैसे हिंसक अपराध, संपत्ति अपराध, व्हाइट-कॉलर अपराध, संगठित अपराध और अब नए अपराध साइबर अपराध,  प्रत्येक श्रेणी के भीतर, कई विशिष्ट अपराध भी मौजूद हैं.  यहाँ अपराध के कुछ प्रमुख प्रकारों का विस्तार से विवरण दिया गया है: ➡️ हिंसक अपराध: इसमें हत्या, यौन अपराध, डकैती, गंभीर हमला शामिल हैं.  ➡️ संपत्ति अपराध: इसमें सेंधमारी, मोटर वाहन चोरी, आगजनी शामिल हैं.  ➡️ व्हाइट-कॉलर अपराध: इसमें कॉर्पोरेट धोखाधड़ी, कर चोरी, कर्मचारी चोरी शामिल हैं.  ➡️ संगठित अपराध: यह आपराधिक संगठनों की अवैध गतिविधियों से जुड़ा है, जैसे कि अवैध सामान और सेवाओं की आपूर्ति.  ➡️ साइबर अपराध:     इसमें फिशिंग, हैकिंग, साइबर बुलिंग, डिजिटल अरेस्ट आदि अपराध शामिल हैं. इसके अतिरिक्त, अपराध को संज्ञेय अपराध (जहाँ आप बिना वारंट के गिरफ्तार किए जा सकते हैं), असंज्ञेय अपराध (जहाँ गिरफ्तारी के लिए वारंट की आवश्यकता होती है), जमानती अपराध (जहाँ जमानत एक अधिकार है), और गैर-जमानती अपराध (जहाँ जमानत का अधिकार नहीं है) में भी वर्गीकृत किया जा स...

साइबर क्राइम ⚫ का भयानक रूप डिजिटल अरेस्ट

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आज पूरा विश्व साइबर अपराध की जकड़ में है. साइबर अपराधियों ने न केवल भारत की अर्थव्यवस्था को गहरा धक्का पहुँचाया है बल्कि संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ साथ पूरे यूरोप और एशिया को हिलाकर रख दिया है. आर्टिफिशल इंटेलिजेन्स ( AI ) से जुटाई गई जानकारी के अनुसार - "साइबर अपराध का आधुनिक इतिहास तब शुरू हुआ जब एलन शेर ने एमआईटी कंप्यूटर नेटवर्क के खिलाफ साइबर हमला किया, पंच कार्ड के माध्यम से उनके डेटाबेस से पासवर्ड चुराए । पहला कंप्यूटर वायरस बीबीएन टेक्नोलॉजीज में बॉब थॉमस द्वारा अनुसंधान उद्देश्यों के लिए बनाया गया था।" साइबर अपराध कंप्यूटर, इंटरनेट या नेटवर्क उपकरणों से जुड़ी अवैध गतिविधि होती है। साइबर अपराधी पहचान की चोरी करते हैं, फ़िशिंग घोटाले शुरू करते हैं, मैलवेयर फैलाते हैं और अन्य डिजिटल हमले करते हैं। ➡️ भारत में साइबर अपराध:-  भारत में साइबर अपराधों के आंकड़े चिंता का विषय हैं। 2022 में, 65,000 से अधिक साइबर अपराध मामले दर्ज किए गए थे, और 2023 में यह संख्या और बढ़ गई। वित्तीय नुकसान भी तेजी से बढ़ा है, जिसमें 2022 में 91.14 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024 में 1,935.51 करोड़ र...

साइबर क्राइम -0️⃣ डिजिटल अरेस्ट -अध्ययन एक शुरुआत

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 जिस तरह से रोज कानूनी ढांचे में सुधार कर अपराध पर नकेल कसने के कार्य किये जा रहे हैं उसी तरह से अपराध की दुनिया भी नित नये कीर्तिमान रच रही है. आज हमारी रोजमर्रा की जिंदगी डिजिटल होती जा रही है. मोबाइल फोन का उपयोग अब बाजार में आम बात हो गई है, अब लगभग हर पेमेंट डिजिटल माध्यम से किया जा रहा है. गूगल पे, फोन पे डिजिटल भुगतान के बड़े ऐप्प के रूप में सर्व स्वीकार्य माध्यम बन चुके हैं और इस डिजिटल भुगतान का ही परिणाम है कि आज अपराध की दुनिया भी डिजिटल माध्यम अपना रही है. पहले जिस तरह अपराधी राहजनी करते थे, रातों रात सड़कों के किनारे बैठकर आती जाती गाड़ियों पर हमले कर लूटपाट करते थे, घरों में घुसकर डकैती और लूट करते थे, अब पीड़ित से रूबरू होने के ऐसे तौर तरीके अपराधी छोड़ते जा रहे हैं, अब अपराधी सब तरह के अपराध कर रहे हैं, लोगों को डरा धमका रहे हैं किन्तु उनके सामने ना आकर बल्कि डिजिटल स्वरूप को अपनाकर. अब अपराध की दुनिया हाई फाई डिजिटल होती जा रही है और इतनी ज्यादा कि क़ानून व्यवस्था को छिन्न भिन्न कर आज ये पढ़े लिखे उच्च शिक्षित अपराधी क़ानून के रखवालों से दो हाथ आगे ही जा रहे हैं.   ...