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अप्रैल, 2026 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

सावधानी 1️⃣8️⃣ सिम स्वैप

 सिम स्वैप के बारे में मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जब आपको खतरा महसूस हो तो यह करें -  साइबर एक्सपर्ट के मुताबिक,  अगर अचानक फोन का नेटवर्क चला गया, कॉल्स या मैसेज आने बंद हो गए, बैंक से अनजान ट्रांजेक्शन की सूचना आई या कोई अकाउंट चेंज अलर्ट मिला तो तुरंत समझ लें कि सिम स्वैप हो सकता है। इसके बाद एक मिनट भी बर्बाद न करें। सबसे पहले अपने टेलीकॉम प्रोवाइडर को कॉल करके सिम सस्पेंड कराएं और नंबर वापस मांगें। फिर तुरंत बैंक, ईमेल और जरूरी ऐप्स के पासवर्ड बदल दें। अपने सारे अकाउंट्स चेक करें कि कोई गड़बड़ी तो नहीं हुई। बैंक को फौरन बताएं और अगर पैसे गए हैं तो इसकी रिपोर्ट करें। इस तरह के फ्रॉड से बचने के लिए आगे से SMS OTP की बजाय गूगल ऑथेंटिकेटर या माइक्रोसॉफ्ट ऑथेंटिकेटर जैसे ऐप का इस्तेमाल शुरू कर सकते हैं।  ➡️ SIM Swap नियमों में बदलाव- कई बार यूजर को यह पता भी नहीं चलता है कि कब साइबर अपराधी ने उन्हें इस जाल में फंसा लिया है। हालांकि, दूरसंचार विभाग ने सिम खो जाने या खराब होने पर नया सिम जारी करने के नियम में बदलाव कर दिया है। अब बिना बायोमैट्रिक वेरिफिकेशन के नया सिम...

कोर्ट 3️⃣ हैकिंग और हैकर उड़ीसा हाइकोर्ट का निर्णय

 4. शब्द "हैकिंग" का तात्पर्य - शब्द "हैकिंग" का सामान्य व्यक्ति की समझ में तात्पर्य कम्प्यूटर अथवा कम्प्यूटर नेटवर्क की अप्राधिकृत पहुंच प्राप्त करना होता है। [कमलाकान्त त्रिपाठी उर्फ बाबुली बनाम उड़ीसा राज्य एवं अन्य, (2021) क्रि० लॉ ज० 855 (उड़ीसा)]। 5. पद "हैकर" का तात्पर्य - वह व्यक्ति, जो "हैकिंग" का अपराध कारित करता है, "हैकर" कहा जाता है। तथापि, समय बीतने पर इलेक्ट्रानिक घुसपैठ की ऐसी जानकारी मनमौजी तत्वों के द्वारा असहाय पीड़ित व्यक्तियों से बदला लेने अथवा भयादोहन करने का अस्त्र हो गया है। इसलिए "हैकिंग" का तात्पर्य स्वैच्छिक तथा विद्वेषपूर्वक कम्प्यूटर का अतिचार करना और कम्प्यूटर की सुरक्षा पर जटिल प्रभाव डालना है। [कमलाकान्त त्रिपाठी उर्फ बाबुली बनाम उड़ीसा राज्य एवं अन्य, (2021) क्रि० लॉ ज० 855 (उड़ीसा)]। 6. हैकिंग की अपराधिता - हैकिंग की अपराधिता उस दुराशय अथवा उद्देश्य, जिससे कृत्य को क्रियान्वित किया गया हो, की उपस्थिति पर निर्भर करती है और यह सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 के अधीन दंडनीय होती है. (कमलाका...

1️⃣ सूचना प्रौद्योगिकी (सिविल न्यायालय की अन्य शक्तियों का साइबर अपील अधिकरण में निहित होना) नियम, 2003

सा० का० नि० 903 (अ), दिनांक 21-11-2003 1️⃣ केन्द्रीय सरकार, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (2000 का 21) की धारा 58 की उपधारा (2) के खण्ड (छ) के साथ पठित धारा 87 की उपधारा (2) के खण्ड (फ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए निम्नलिखित नियम बनाती है, अर्थात् : 1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ (1) इन नियमों का संक्षिप्त नाम सूचना प्रौद्योगिकी (सिविल न्यायालय की अन्य शक्तियों का साइबर अपील अधिकरण में निहित होना) नियम, 2003 है। (2) ये राजपत्र में प्रकाशन की तारीख को प्रवृत्त होंगे। 2. परिभाषाएं- इन नियमों में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, - (क) "अधिनियम" से सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (2000 का 21) अभिप्रेत है; (ख) "साइबर अपील अधिकरण" से अधिनियम की धारा 48 की उपधारा (1) के अधीन स्थापित साइबर विनियमन अपील अधिकरण अभिप्रेत है; (ग) उन शब्दों और पदों के, जो इनमें प्रयुक्त हैं और परिभाषित नहीं हैं किन्तु अधिनियम में परिभाषित है क्रमशः वही अर्थ होंगे जो अधिनियम में उनके दिये गये हैं। 3. साइबर अपील अधिकरण की शक्तियां - साइबर अपील अधिकरण का, अधिनियम के अधीन अपने...

9️⃣ साइबर विनियमन अपील अधिकरण (प्रक्रिया) नियम, 2000

3. क्या विधि व्यवसायी के पास उसके नियोजन में पहले से ही कोई रजिस्ट्रीकृत लिपिक है और क्या जिस लिपिक का रजिस्ट्रीकरण चाहा गया है वह पहले से ही रजिस्ट्रीकृत लिपिक के बदले में है या उसके अतिरिक्त है अथवा नहीं। 4. क्या जिस लिपिक का रजिस्ट्रीकरण चाहा गया है वह पहले से ही किसी अन्य विधि व्यवसायी के लिपिक के रूप में रजिस्ट्रीकृत है और यदि ऐसा है तो ऐसे व्यवसायी का नाम।  मैं................ (विधि व्यवसायी) प्रमाणित करता हूं कि ऊपर दी गई विशिष्टियां मेरी सर्वोत्तम जानकारी और विश्वास के अनुसार सही हैं और मुझे ऐसे किन्हीं तथ्यों का ज्ञान नहीं है तो उक्त................... (नाम) का लिपिक के रूप में रजिस्ट्रीकरण अवांछनीय बना देगा।  तारीख.                                            विधि व्यवसायी के हस्ताक्षर सेवा में, रजिस्ट्रार, .................... अधिकरण। ....................................  .................................... 

8️⃣ साइबर विनियमन अपील अधिकरण (प्रक्रिया) नियम, 2000

 10. मामले का किसी अन्य न्यायालय आदि में लंबित न होना - आवेदक यह घोषणा करता है कि वह मामला, जिसकी बाबत यह आवेदन किया गया है. किसी न्यायालय या किसी अन्य प्राधिकारी के समक्ष लंबित नहीं है अथवा उसे किसी न्यायालय या अन्य प्राधिकारी द्वारा खारिज नहीं किया गया है। 11. अनुक्रमणिका के ब्यौरे-उन दस्तावेजों के, जिन पर विश्वास किया गया है, ब्यौरों की अनुक्रमणिका, दो प्रतियों में संलग्न है। 12. संलग्नकों की सूची : सत्यापन मैं................ (आवेदक का नाम), जो................. का पुत्र /की  पुत्री /की पत्नी है,........... आयु है,................... के रूप में कार्यरत हूं,................ का निवासी/ की निवासी हूं, सत्यापित करता हूं/करती हूं कि पैरा । से 13 तक की विषयवस्तु मेरी निजी जानकारी और विश्वास के अनुसार सही है और मैंने किसी सारवान तथ्य को छिपाया नहीं है।                                             आवेदक के हस्ताक्षर स्थान : तारीख : सेवा में, रजिस्ट्रार, साइबर विनियमन अपील अ...

7️⃣ साइबर विनियमन अपील अधिकरण (प्रक्रिया) नियम, 2000

साइबर विनियमन अपील अधिकरण के समक्ष क ख ... आवेदक और ग घ ........प्रत्यर्थी के बीच आवेदन के ब्यौरे : 1. आवेदन की विशिष्टियां (i) आवेदक का नाम (ii) पिता/पति का नाम (iii) पदनाम और वह कार्यालय जिसमें नियोजित है (iv) कार्यालय का पता (v) सभी सूचनाओं की तामील के लिए पता 2. प्रत्यर्थी की विशिष्टियां- (1) प्रत्यर्थी का नाम और/या पदनाम (ii) प्रत्यर्थी का कार्यालय का पता (iii) सभी सूचनाओं की तामील के लिए पता 3. उस आदेश की विशिष्टियां जिसके विरुद्ध आवेदन किया गया है- आवेदन निम्नलिखित आदेश के विरुद्ध किया गया है- (i) आदेश संख्या (ii) तारीख (iii) द्वारा पारित (iv) विषय, संक्षेप में 4. अधिकरण की अधिकारित- आवेदक घोषणा करता है कि उस आदेश की जिसके विरुद्ध वह परित्राण चाहता है, विषयवस्तु अधिकरण की अधिकारिता के भीतर है। 5. सीमा-आवेदक यह और घोषणा करता है कि आवेदन सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 57 में विहित सीमा के भीतर है। 6. मामले के तथ्य-मामले के तथ्य नीचे दिए गए हैं (कालानुक्रम में तथ्यों का संक्षिप्त विवरण दें, प्रत्येक पैरा में यथा संभव एक पृथक विवाद्यक, तथ्य अथवा अन्यथा अंतर्विष्ट हो) 7. मा...

सावधानी 2️⃣0️⃣ Impersonation scams (प्रतिरूपण घोटाले)

 Impersonation scams (प्रतिरूपण घोटाले) ऐसी धोखाधड़ी हैं जहाँ अपराधी बैंक अधिकारी, सरकारी कर्मचारी, पुलिस, या किसी परिचित का रूप धारण कर आपसे संपर्क करते हैं। ये स्कैमर्स विश्वास जीतकर आपसे निजी जानकारी, ओटीपी (OTP), या पैसे की मांग करते हैं। यह मुख्य रूप से फोन, ईमेल, एसएमएस, या सोशल मीडिया के माध्यम से किए जाते हैं। ऐसे में, हौसला रखें और साइबर विशेषज्ञ जो कहते हैं उस को ध्यान में रखें.  ➡️ इम्पर्सोनेशन स्कैम कैसे काम करते हैं? (Examples & Methods) ⚫ बैंक या सरकारी अधिकारी: स्कैमर बैंक कर्मचारी बनकर कॉल करते हैं और कहते हैं कि आपका अकाउंट ब्लॉक होने वाला है या टैक्स में कोई समस्या है, और आपसे जानकारी मांगते हैं। ⚫ सोशल मीडिया फ्रॉड (Instagram/Facebook) : आपके किसी मित्र की प्रोफाइल फोटो का इस्तेमाल करके नकली अकाउंट बनाना और पैसों की मदद मांगना। ⚫ कूरियर या डिलीवरी फ्रॉड: मैसेज भेजकर कहा जाता है कि आपका पार्सल अटका हुआ है और उसे छुड़ाने के लिए एक छोटा सा शुल्क जमा करना होगा। ⚫ ' Hi Mom/Dad' स्कैम :  अजनबी नंबर से मैसेज आता है" पापा मेरा फोन खो गया है, यह मेरा नया नं...

6️⃣ साइबर विनियमन अपील अधिकरण (प्रक्रिया) नियम, 2000

(2) रजिस्ट्रार, पीठासीन अधिकारी के अनुमोदन से किन्हीं ऐसे कृत्यों को, जो रजिस्ट्रार द्वारा इन नियमों के अधीन किये जाने अपेक्षित हैं, अधिकरण के किसी अन्य अधिकारी को प्रत्यायोजित कर सकेगा। (3) रजिस्ट्रार की अनुपस्थिति में, पीठासीन अधिकारी द्वारा, उसकी ओर से लिखित में प्राधिकृत अधिकरण का कोई अधिकारी, रजिस्ट्रार के सभी या किसी कृत्य को कर सकेगा और सभी या किसी शक्ति का प्रयोग कर सकेगा। (4) रजिस्ट्रार, अधिकरण की शासकीय मुद्रा को अपनी अभिरक्षा में रखेगा। (5) रजिस्ट्रार, पीठासीन अधिकारी द्वारा दिये गये साधारण या विशेष निदेश के अधीन रहते हुए, अधिकरण की शासकीय मुद्रा के किसी आदेश, सूचना या अन्य आदेशिका पर लगाएगा। (6) रजिस्ट्रार को अधिकरण के किसी आदेश की प्रमाणित प्रति पर अधिकरण की मुद्रा लगाने को प्राधिकृत करने की लिखित में शक्ति होगी। 27. रजिस्ट्रार की अतिरिक्त शक्तियां और कर्तव्य- इन नियमों में अन्यत्र प्रदत्त शक्तियों के अतिरिक्त रजिस्ट्रार की, पीठासीन अधिकारी के किसी साधारण या विशेष आदेश के अधीन रहते हुए, निम्नलिखित शक्तियां और कर्तव्य होंगे, अर्थात् : (i) सभी आवेदन और अन्य दस्तावेज, जिनके अ...

5️⃣ साइबर विनियमन अपील अधिकरण (प्रक्रिया) नियम, 2000

17. आवेदन का स्थगन - अधिकरण, ऐसे निबंधनों पर जो वह ठीक समझे कार्यवाही के किसी प्रक्रम पर आवेदन की सुनवाई को स्थगित कर सकेगा। 18. आदेश का हस्ताक्षरित होना और उस पर तारीख डालना - अधिकरण का प्रत्येक आदेश लिखित रूप में होगा और पोठासीन अधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित होगा और उस पर तारीख डाली जाएगी। 19. आदेशों का प्रकाशन- अधिकरण के ऐसे आदेश जो किसी रिपोर्ट या प्रेस में प्रकाशन के लिए ठीक समझे जाएं, ऐसे निबंधनों और शतों पर जो अधिकरण अधिकधित करे, ऐसे प्रकाशन के लिए जारी कर सकेगा। 20. पक्षकारों को आदेशों की संसूचना- किसी आवेदन पर पारित प्रत्येक आदेश आवेदक को या प्रत्यर्थी को व्यक्तिगत रूप में या निःशुल्क लागत पर रजिस्ट्रीकृत डाक से संसूचित किया जाएगा। 21. अभिलेखों के निरीक्षण के लिए कोई फीस नहीं- आवेदन के किसी पक्षकार द्वारा लंबित आवेदन के अभिलेखों के निरीक्षण के लिए कोई फीस प्रभारित नहीं की जाएगी। 22. कतिपय मामलों में आदेश और निदेश- अधिकरण ऐसे आदेश कर सकेगा या ऐसे निदेश दे सकेगा जो उसके आदेशों को प्रभावी करने के लिए या उसके सम्बन्ध में या उसकी कार्यवाही के दुरुपयोग को रोकने के लिए या न्याय के उद्दे...

4️⃣ साइबर विनियमन अपील अधिकरण (प्रक्रिया) नियम, 2000

(2) प्रत्यर्थी, आवेदक को या उसके अधिवक्ता को यदि कोई है उपनियम (1) में यथाउल्लिखित दस्तावेजों की प्रतियों सहित उत्तर की प्रति भी तामील होगा और ऐसी तामीली का सबूत रजिस्ट्रार को फाइल करेगा। अधिकरण, प्रत्यर्थी द्वारा आवेदन करने पर, एक मास की अवधि की समाप्ति के पश्चात्, उत्तर फाइल करने की अनुज्ञा दे सकेगा। 12. सुनवाई की तारीख और स्थान अधिसूचित किया जाए-अधिकरण, आवेदन की सुनवाई की तारीख और स्थान पक्षकारों को अधिसूचित करेगा। 13. अधिकरण की बैठक- अधिकरण, साधारणतया अपनी बैठकें नई दिल्ली में करेगा : परन्तु यदि किसी समय अधिकरण के पीठासीन अधिकारी का यह समाधान हो जाता है कि ऐसी परिस्थितियां विद्यमान हैं जिनके कारण नई दिल्ली से भिन्न अन्य किसी स्थान में बैठक करना आवश्यक है तो पीठासीन अधिकारी किसी ऐसे समुचित स्थान पर बैठक करने का निदेश दे सकेगा। 14. आवेदनों पर विनिश्चय (1) अधिकरण, अंतरित मामलों की सुनवाई का एक कलेंडर तैयार करेगा और जहां तक संभव हो कलेंडर के अनुसार मामलों की सुनवाई और विनिश्चय करेगा। (2) जहां तक संभव हो प्रत्येक आवेदन उसकी प्रस्तुतीकरण की तारीख के छह मास के भीतर सुना और विनिश्चित किया ...

3️⃣ साइबर विनियमन अपील अधिकरण (प्रक्रिया) नियम, 2000

(2) उपनियम (1) में निर्दिष्ट दस्तावेजों को अधिवक्ता या राजपत्रित अधिकारी द्वारा अनुप्रमाणित किया जा सकेगा। (3) जहां आवेदन किसी अभिकर्ता द्वारा फाइल किया जाता है, वहां उसे ऐसे अभिकर्ता के रूप में कार्य करने के लिए प्राधिकृत करने वाले दस्तावेज भी आवेदन के साथ संलग्न होंगे: परन्तु जहाँ आवेदन किसी अधिवक्ता द्वारा फाइल किया जाता है वहां उसके साथ सम्यक् रूप से निष्पादित 'वकालतनामा' होगा। २. एकाधिक उपचार - आवेदन एकल वाद हेतुक पर आधारित होगा और एक या अधिक अनुतोष चाहे जा सकेंगे परन्तु यह तब जब कि वे एक-दूसरे के पारिणामिक हों। 10. प्रत्यर्थियों पर आवेदन की सूचना की तामील (1) पेपर पुस्तिका के रूप में आवेदन की एक साधारणतया रजिस्ट्रार द्वारा निम्नलिखित रीति में से किसी एक रीति द्वारा प्रत्येक प्रत्यर्थी पर तामील की जाएगी : (i) आवेदक के माध्यम से या प्रक्रिया तामीलकर्ता के माध्यम से दस्ती; (ii) पावती के साथ रजिस्ट्रीकृत डाक के माध्यम से। (2) उपनियम (1) में किसी बात के होते हुए भी रजिस्ट्रार प्रत्यर्थियों की संख्या और उनके निवास स्थान या कार्य और अन्य परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए निदेश ...

2️⃣ साइबर विनियमन अपील अधिकरण (प्रक्रिया) नियम, 2000

(क) एक से अधिक व्यक्ति, संयुक्त रूप से एकल आवेदन फाइल कर सकेंगे यदि वाद हेतुक और प्रार्थित अनुतोष की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए यह समाधान हो जाता है कि सेवा मामलों में उनके हित समान हैं। (ख) एकल आवेदन में सम्मिलित होने के लिए इच्छुक व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व कर रहा कोई संगम हो, तथापि, यह तब जब कि आवेदन में उन सभी व्यक्तियों के नाम प्रकट किए जाएंगे जिनकी ओर से यह फाइल किया गया है। 4. आवेदन का प्रस्तुतीकरण और संवीक्षा (1) रजिस्ट्रार या रजिस्ट्रार द्वारा प्राधिकृत कोई अधिकारी प्रत्येक आवेदन पर वह तारीख पृष्ठांकित करेगा जिसको उस नियम के अधीन उसे प्रस्तुत किया गया या प्रस्तुत किया गया समझा जाएगा और वह पृष्ठांकर पर हस्ताक्षर करेगा। (2) यदि, संवीक्षा करने पर, आवेदन सुव्यवस्थित पाया जाता है तो इसे सम्यक् रूप से रजिस्ट्रीकृत किया जाएगा और क्रम संख्यांक दिया जाएगा। (3) यदि संवीक्षा करने पर आवेदन त्रुटिपूर्ण पाया जाता है और देखी गई त्रुटि औपचारिक प्रकार की है जो रजिस्ट्रार, अपनी उपस्थिति में पदभार को उसे सुधारने के लिए अनुज्ञा दे सकेगा और यदि उक्त त्रुटि औपचारिक प्रकार की नहीं है तो रजिस्ट्रा...

1️⃣ साइबर विनियमन अपील अधिकरण (प्रक्रिया) नियम, 2000

 साइबर विनियमन अपील अधिकरण (प्रक्रिया) नियम, 2000  सा० का० नि० 791 (अ), दिनांक 17-10-2000 अधिनियम, 20001️⃣  केन्द्रीय सरकार, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (2000 का 21) की धारा 87 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, निम्नलिखित नियम बनाती है, अर्थात् 1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ (1) इन नियमों का संक्षिप्त नाम साइबर विनियमन अपील अधिकरण (प्रक्रिया) नियम, 2000 है। (2) ये राजपत्र में उनके प्रकाशन की तारीख को प्रवृत्त होंगे। 2. परिभाषाएं- इन नियमों में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो.- (क) "अधिनियम "से सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (2000 का 21) अभिप्रेत है; (ख) "अभिकर्ता" से किसी पक्षकार द्वारा अधिकरण के समक्ष इस निमित्त कोई आवेदन या उत्तर पेश करने के लिए सम्यक् रूप से प्राधिकृत कोई व्यक्ति अभिप्रेत है। (ग) "आवेदन "से धारा 57 के अधीन अधिकरण को किया गया कोई आवेदन अभिप्रेत है। (घ ) "विधि व्यवसायी" का वही अर्थ होगा जो अधिवक्ता अधिनियम, 1961 (1961 का 25) में उसका है: (ङ) "पीठासीन अधिकारी " से अधिकरण का पीठासीन अधिकारी अभिप्र...

सरकार की तैयारी 1️⃣5️⃣ I4C का नया SOP - बैंकों की PRP व्यवस्था

मीडिया में हाल ही में आई खबरों के मुताबिक साइबर क्राइम के शिकार लोगों के लिए आई-4C (Indian Cyber Crime Coordination Centre) ने नया SOP जारी कर दिया है. इसके अनुसार, अब साइबर फ्रॉड से जुड़े छोटे मामलों का निपटारा सीधे बैंक स्तर पर कर दिया जाएगा। इसके लिए सभी बैंकों को ‘प्रिवेंट रिफंड पोर्टल’ कि व्यवस्था की गई है, जहां शिकायत दर्ज होते ही कार्रवाई शुरू हो जाएगी. ➡️ 50 हजार की ठगी के लिए नई व्यवस्था  हालांकि ये व्यवस्था छोटी ठगी के शिकार लोगों के लिए की गई है.इसके लिए 50 हजार तक की राशि तय की गई है. यानि अब अगर किसी व्यक्ति के साथ 50 हजार रुपये से कम की साइबर ठगी होती है, तो उसे FIR दर्ज कराने या कोर्ट के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी। नई व्यवस्था के तहत बैंक खुद पीड़ित का पैसा लौटाने की प्रक्रिया पूरी करेगा. इस नई व्यवस्था का उद्देश्य पुलिस और कोर्ट पर बढ़ते बोझ को कम करना और पीड़ितों को जल्द राहत देना है. ➡️ कैसे मिलेगा पैसा वापस? अब जानिए कि साइबर ठगों के शिकार बने लोगों को क्या करना होगा. साइबर ठगी के शिकार व्यक्ति को 2 घंटे के भीतर हेल्पलाइन नंबर 1930 या वेबसाइट cybercrime.gov....

साइबर क्राइम 3️⃣ साइबर स्लीपर सेल

साइबर स्लीपर सेल (Cyber Sleeper Cell) एक अत्यंत गंभीर राष्ट्र-विरोधी और संगठित साइबर अपराध है, जिसमें अपराधी डिजिटल माध्यमों का उपयोग करके देश की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और नागरिकों को निशाना बनाते हैं। यह उन लोगों या एजेंटों का समूह है जो आम नागरिक की तरह रहते हैं, लेकिन डिजिटल माध्यमों से भारत विरोधी गतिविधियों, साइबर आतंकवाद (Cyber Terrorism), या वित्तीय धोखाधड़ी में शामिल होते हैं। साइबर स्लीपर सेल (Cyber Sleeper Cell) एक गुप्त और निष्क्रिय एजेंटों का समूह होता है, जो किसी बड़े संगठन (जैसे आतंकवादी, जासूसी या आपराधिक) का हिस्सा होते हैं और सामान्य जीवन जीते हुए, सही समय आने पर सक्रिय होकर अपने मिशन को अंजाम देते हैं; ये सेल छोटे और अलग-अलग हिस्सों में बंटे होते हैं, ताकि किसी एक के पकड़े जाने से पूरे नेटवर्क का खुलासा न हो. चीन और पाकिस्तान के क्राइम सिंडिकेट गठजोड कर भारत के खिलाफ साइबर टेररिस्ट तैयार कर रहे है। यह खुलासा हाल ही में पकड़े गए उस नेटवर्क से हुआ, जो भारत में साइबर स्लीपर सेल के तौर पर काम कर रहे हैं। जांच एजेसियो का दावा है कि डिजिटल अरेस्ट, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड जैसे बड़...

साइबर अपराध पीड़ित 3️⃣ कस्टमर सपोर्ट नाम का लिंक भेजकर किसान से ठगी, शामली

थानाभवन थानाक्षेत्र के गांव मुंडेट खादर निवासी एक पीड़ित किसान ने बताया कि 13 फरवरी को उसके मोबाइल फोन के व्हाट्सएप पर कस्टमर सपोर्ट नाम का एक लिंक आया था। उसने उस लिंक पर क्लिक कर दिया। इसके बाद उसका फोन हैक हो गया। फोन हैक होने पर उसके पंजाब नेशनल बैंक के खाते से 99 हजार रुपये और एसबीआई के दूसरे खाते से 49 हजार रुपये और आठ हजार रुपये कट गए। इस तरह से उसके खाते से एक लाख 56 हजार रुपये की साइबर ठगी फोन हैक करके की गई। मोबाइल फोन पर मैसेज आने पर उसे साइबर ठगी का पता चला। पीड़ित किसान ने बताया कि ज़ब उसने उस लिंक को डिलिट कर दिया तब उसका फोन चालू हुआ। पीड़ित किसान ने थानाभवन थाने पर तहरीर दी। तहरीर के आधार पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी। स्रोत - संवाद न्यूज एजेंसी, शामली 16 Mar 2026 पिछले काफ़ी समय से पुलिस, प्रशासन और सरकार आम जनता को यह समझाने में लगे हैँ कि किसी भी अनजान लिन्क को क्लिक न करें, अनजान नंबर से आये फोन को विशेष कर व्हाट्सएप्प पर आये फोन को न उठायें, किन्तु मामले थमने का नाम ही नहीं ले रहे हैँ कारण यही है कि आज हर किसी के हाथ में स्मार्टफोन आ गया है और लगभग हर...

सावधानी 1️⃣9️⃣ फ़र्ज़ी अधिकारी से साइबर सुरक्षा

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  आज के साइबर ठगी के दौर में  जागरुकता जरूरी है. जब कोई फर्जी अधिकारी (Fake Officer) बनकर आपको परेशान करे, तो यह एक गंभीर आपराधिक मामला है। ऐसे मामलों में डरने के बजाय सतर्कता से काम लेना चाहिए, क्योंकि असली पुलिस या अधिकारी आम तौर पर सीधे पैसे की मांग नहीं करतें हैं या डराते-धमकाते नहीं हैं। इसलिए डरिये नहीं, घबराईये नहीं, बस विशेषज्ञ राय को ध्यान में रखते हुए कार्य कीजिए -  ➡️ फ़र्ज़ी अधिकारी की पहचान -  ⚫ वर्दी वाली फर्जी फोटो:  अपराधी WhatsApp या सोशल मीडिया पर वर्दी पहने हुए फोटो लगाकर भरोसा जीतने की कोशिश करते हैं। ⚫ डर पैदा करना: ठग अक्सर पुलिस, CBI, या ED का अधिकारी बनकर डराते हैं कि आपके नाम पर वारंट है या आपके पार्सल में नशीले पदार्थ मिले हैं. ⚫ डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest): असली अधिकारी कभी भी वीडियो कॉल (Skype/WhatsApp) पर आपको 'डिजिटल अरेस्ट' नहीं करते और न ही कैमरे के सामने बैठे रहने को कहते हैं. ⚫ गोपनीय जानकारी मांगना: कोई भी सरकारी विभाग फोन पर आपसे आपका OTP, पिन, या बैंक पासवर्ड नहीं मांगता.  ⚫ तुरंत कॉल काटें: यदि कोई अनजान व्यक्ति अधिक...

सावधानी 1️⃣8️⃣ बच्चों की साइबर सुरक्षा

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  आजकल डिजिटल एजुकेशन के कारण बच्चे भी डिजिटल इंडिया के पार्ट बन चुके हैं और इसी का एक मुख्य कारण है कि वे साइबर ठगों के सहज हथियार बनने का कार्य कर रहे हैं. क्योंकि उनके हाथ में कंप्यूटर आने का मतलब यह नहीं है कि उनमें वह समझ भी विकसित हो गई जो कंप्यूटर शिक्षा के दुष्परिणाम भी उन्हें समझा सके, ऐसे मे बच्चों को साइबर ठगी से बचाना जरूरी है क्योंकि बच्चे साइबर ठगों के लक्ष्य नहीं हैं लक्ष्य आप हैं बस कन्धे इन मासूमों के हैं जिनपर चढ़कर साइबर ठग आपके घरों में आसानी से प्रवेश कर सकते हैं तो ध्यान दीजिये और विशेषज्ञ राय के अनुसार निम्न सावधानियां बरतिये -  ➡️ बच्चों को साइबर ठगी से बचाने के लिए ' गूगल फैमिली लिंक' जैसे टूल का उपयोग करके स्क्रीन टाइम नियंत्रित करें, संदिग्ध लिंक्स पर क्लिक न करने की शिक्षा दें और निजी जानकारी गुप्त रखने को कहें। संवाद स्थापित करें, अजनबियों से बात न करने दें और किसी भी साइबर फ्रॉड की स्थिति में तुरंत 1930 पर रिपोर्ट करें। ➡️ बच्चों को सुरक्षित रखने के मुख्य उपाय: ✒️ संवाद और शिक्षा: बच्चों से खुलकर बात करें, उन्हें ऑनलाइन खतरों जैसे बुलिंग, ग्रूमिं...

साइबर ठगों के हथियार 8️⃣ आपके बच्चे

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   आज आदमी डिजिटल हो चला है, जहाँ देखिये आदमी के हाथ में मोबाइल चलता ही रहता हैँ. अब तो ये लगने लगा है कि अगर ये स्मार्ट फोन हाथ में नहीं है तो न ही हमारी सांस चलेंगी और न ही हमारे हाथ पैर, किन्तु ऐसी स्थिति एक उस आदमी की होना तो सही है जिसे दुनिया की, दुनियादारी की समझ है किन्तु उस बच्चे की समझ का क्या करें जिसके लिए अभी सपनों में और दुनिया की सच्चाईयों मे कोई अंतर ही नहीं है.      आज के डिजिटल युग में मोबाइल फोन अब न केवल संचार का उपकरण है, बल्कि मनोरंजन, शिक्षा और सोशल कनेक्शन का बड़ा माध्यम बन चुका है. साइबर अपराधी इसका दुरुपयोग कर आम जनजीवन को ठगने मे लगे हुए हैं। साइबर अपराधी हर उस हाथ को देख रहे हैं जिसका कीमती समय मोबाइल के साथ व्यतीत होता है, जिसके माँ बाप के पास अपने छोटे बच्चे के हाथ मे देने के लिए स्मार्ट फोन जैसा कीमती तोहफा है. ऐसे छोटे बच्चों को साइबर अपराधी जाने-अनजाने फ्री गेम ऑफर, फेक लिंक या ओटीपी शेयर के बहाने साइबर ठगी करने की कोशिश के मामले सामने आ रहे हैं और ये हम सब बखूबी देख सकते हैं कि बार बार स्थानीय पुलिस द्वारा साइबर अपराध के प्रति ज...

सावधानी 1️⃣7️⃣ डिजिटल अरेस्ट

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  3 जुलाई 2025 की  मीडिया रिपोर्ट्स और साइबर विशेषज्ञों की राय पर अगर ध्यान दें तो डिजिटल अरेस्ट के दौरान यदि ये सावधानियां आपके दिमाग में होंगी तो आप कभी भी डिजिटल अरेस्ट का शिकार नहीं होंगे -   ➡️  कोई भी जांच एजेंसी इस तरह पूछताछ नहीं करती पुलिस अधिकारियों का कहना है कि देश की कोई भी जांच एजेंसी डिजिटल अरेस्ट नहीं करती है। यदि वीडियो कॉल पर पुलिस, सीबीआई, सीआईडी आदि के अधिकारी आ जाएं तो सब फर्जी होता है। इस तरह की कॉल आने पर कॉलर से कहें कि लोकल पुलिस के साथ घर आकर पूछताछ करें। ➡️ साइबर ठगी होने पर यहां शिकायत करें साइबर ठगी होने पर जितना जल्दी शिकायत दर्ज कराएंगे, उतना धनराशि फ्रीज कराने में आसानी होगी। ठगी होने के 24 घंटे के भीतर टोल फ्री नंबर 1930 या नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत अवश्य दर्ज करा दें. ⚫  साइबर ठगी से बचने के लिए ये सावधानी बरतें 1️⃣ -अगर कोई अनजान व्यक्ति पार्सल मे ड्रग्स होने की बात कहे तो पुलिस से सम्पर्क करें.  2️⃣ कोई फोन कॉल करके लोन दिलाने के लिए कहे तो उसके झांसे में बिल्कुल न आएं। 3️⃣ -अनजान व्यक्ति ...

डिजिटल अरेस्ट 7️⃣ सुप्रीम कोर्ट की महिला वकील 9 दिन

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3 जुलाई 2025 की मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक साइबर अपराधियों ने नोएडा सेक्टर-47 में रहने वाली सुप्रीम कोर्ट में वकील रह चुकी बुजुर्ग महिला को नौ दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर तीन करोड़ 29 लाख रुपये ठग लिए। आरोपियों ने उनसे दिल्ली, महाराष्ट्र और कोलकाता में खुले बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराई। आशंका जताई जा रही है कि ठगी की रकम किराये के खातों में गई। पूछताछ के क्रम में जालसाजों ने महिला को 16 जून से 24 जून तक डिजिटल अरेस्ट करके रखा। महिला के बैंक खातों और उसमें जमा राशि के बारे में जानकारी एकत्र की। महिला से कहा गया कि वह अपनी एफडी तुड़वा लें और सारी रकम उनके बताए गए खाते में ट्रांसफर कर दें। ठगों द्वारा यह भी वादा किया गया कि जांच के बाद पूरी रकम मूल खाते में वापस आ जाएगी। महिला को लगा वह सच में बड़े संकट में फंस गई हैं और पुलिस अधिकारी उसको केस से बाहर निकालने में मदद कर रहे हैं। झांसे में आने के बाद महिला ने ठगों द्वारा बताए खाते में पांच बार में करीब तीन करोड़ 30 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। महिला ने बताया कि जिस समय ठगों ने कॉल की, उस वक्त वह घर में अकेली थीं। ठगों ने महिला को हिदायत और ...

साइबर ठगों के हथियार 9️⃣ स्मार्ट मीटर

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एक तरफ उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर की बढ़ती शिकायतों और विरोध के बाद, योगी सरकार ने पुराने मीटरों को स्मार्ट प्रीपेड मीटर में बदलने की प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगा दी है। अब 45 दिनों तक बिना बिजली कटौती के राहत दी जाएगी और 5-स्तरीय SMS अलर्ट सिस्टम लागू होगा। जांच के लिए 4-सदस्यीय कमेटी गठित की गई है और दूसरी तरफ जनता के स्मार्ट मीटर के प्रति करारे विरोध को साइबर अपराधियों ने आड़े हाथ लेते हुए अपने हाथ इस तरफ भी फैलाने आरंभ कर दिए हैं.  ➡️  मीडिया रिपोर्ट्स 20 अप्रैल 2026   ⚫ ऊर्जा निगम के उपभोक्ताओं को ठगने को साइबर ठगों का गिरोह सक्रिय हो गया, जो बिजली बिल अपडेट करने के नाम पर उपभोक्ताओं को निशाना बना रहे हैं। फोन काल करके जाल बिछाकर उपभोक्ताओं को अपने झांसे में ले रहे हैं। ⚫ ऊर्जा निगम के अफसरों ने बताया कि स्मार्ट मीटर को प्रीपेड में बदलने के बाद उपभोक्ताओं की समस्याओं का समाधान किया जा रहा है। इस बीच साइबर ठग उपभोक्ताओं को ऊर्जा निगम के नाम से फोन कर रहे है। ऐसा एक 8488915049 मोबाइल नंबर भी प्रकाश में आया है। इस नंबर से साइबर ठग खुद को ऊर्जा निगम का कर्मचारी ब...

साइबर अपराधियों के हथियार 8️⃣ व्हाट्सएप वीडियो कॉल

   अभी 13 मार्च 2025 की मीडिया रिपोर्ट में एक समाचार पढ़ती हूँ  " डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर ठगी की कोशिश"  पूरा समाचार यह था- "शामली। शामली के माजरा रोड निवासी महिला को साइबर ठग ने उसके पति को दिल्ली एयरपोर्ट पर मोटी रकम के साथ पकड़े जाने की धमकी देते हुए 30 हजार रुपये की मांग की। महिला के झांसे में न आने से ठगी होने से बच गई। महिला ने बताया कि दो दिन पहले उसके पास अनजान नंबर से व्हाट्सएप कॉल आई। व्हाट्सएप की डीपी पर पुलिस की वर्दी पहले व्यक्ति की फोटो लगी थी। कॉल करने वाले ने कहा कि उनके पति दिल्ली में एयरपोर्ट पर मोटी रकम के साथ पकड़े गए हैं।महिला ने कहा कि उनके पति तो दिल्ली गए ही नहीं। कॉल करने वाले ने कहा कि हो सकता है.कि उन्हें उनके दिल्ली जाने के बारे में बताया हो। साइबर ठग ने महिला को उसके पति को दिल्ली में पकड़े जाना बताया। उसने महिला से कहा कि अगर पति को छुड़ाना चाहती हैं तो उनके बताए गए बैंक खाते में 30 हजार रुपये भेज दो।महिला ने कहा कि उनके पति से कुछ देर पहले ही बात हुई है, वह ठीक हैं। इसके बाद महिला ने फोन काट दिया। महिला की सजगता से ठगी होने से बच गई। ...

कोर्ट 2️⃣ मुंबई कोर्ट द्वारा साइबर अपराधी मिडिलमैन स्टूडेंट की जमानत याचिका खारिज

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  मीडिया रिपोर्ट के अनुसार साइबर फ्रॉड मामले में मुंबई की एक कोर्ट ने 19 साल के स्टूडेंट की जमानत याचिका खारिज कर दी है। स्टूडेंट 12वीं क्लास में पढ़ता है और उसे 3.81 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड मामले में गिरफ्तार किया गया था। कोर्ट ने कहा कि साइबर क्राइम और डिजिटल फाइनेन्सियल फ्रॉड देशभर में बहुत तेजी से बढ़ रहा है और यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए खतरा है। ➡️ देश की अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर खतरा सीबीआई ने एस पी कार्गो एंड कूरियर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड और उसके डायरेक्टर सुधीर पालंडे और अन्य लोगों के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज की थी। आरोप है कि इन लोगों ने प्राइवेट व्यक्तियों और फर्मों को 3.81 करोड़ रुपये का चूना लगाया। पैसा 2 जुलाई को 12 ट्रांजेक्शन के जरिए एक म्यूल अकाउंट में एक ही दिन में ट्रांसफर किया गया था। अदालत ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि साइबर क्राइम और डिजिटल फाइनेन्सियल फ्रॉड देश में तेजी से बढ़ रहा है और यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक गंभीर खतरा है। स्पेशल जज जे पी दरेकर ने शुक्रवार को अपने आदेश में कहा कि यह जरूरी है कि अपराध की जटिलता को समझा जाए और इसमें इलेक...