1️⃣ सूचना प्रौद्योगिकी (सिविल न्यायालय की अन्य शक्तियों का साइबर अपील अधिकरण में निहित होना) नियम, 2003
सा० का० नि० 903 (अ), दिनांक 21-11-2003 1️⃣ केन्द्रीय सरकार, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (2000 का 21) की धारा 58 की उपधारा (2) के खण्ड (छ) के साथ पठित धारा 87 की उपधारा (2) के खण्ड (फ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए निम्नलिखित नियम बनाती है, अर्थात् :
1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ (1) इन नियमों का संक्षिप्त नाम सूचना प्रौद्योगिकी (सिविल न्यायालय की अन्य शक्तियों का साइबर अपील अधिकरण में निहित होना) नियम, 2003 है।
(2) ये राजपत्र में प्रकाशन की तारीख को प्रवृत्त होंगे।
2. परिभाषाएं- इन नियमों में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -
(क) "अधिनियम" से सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (2000 का 21) अभिप्रेत है;
(ख) "साइबर अपील अधिकरण" से अधिनियम की धारा 48 की उपधारा (1) के अधीन स्थापित साइबर विनियमन अपील अधिकरण अभिप्रेत है;
(ग) उन शब्दों और पदों के, जो इनमें प्रयुक्त हैं और परिभाषित नहीं हैं किन्तु अधिनियम में परिभाषित है क्रमशः वही अर्थ होंगे जो अधिनियम में उनके दिये गये हैं।
3. साइबर अपील अधिकरण की शक्तियां - साइबर अपील अधिकरण का, अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों का निर्वहन करने के प्रयोजन के लिए, निम्नलिखित विषयों की बाबत वही शक्तियाँ होंगी जो सिविल न्यायालय को सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अधीन किसी वाद का विचारण करते समय, किसी सिविल न्यायालय में निहित होती हैं, अर्थात् :
(क) किसी आवेदन को चूक के कारण खारिज करने के किसी आदेश को या अपने द्वारा एकपक्षीय पारित किसी आदेश को अपास्त करना;
(ख) किसी न्यायालय या कार्यालय से कोई लोक अभिलेख, दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों की अपेक्षा करना।
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1️⃣ . भारत का राजपत्र, असाधारण, भाग 2, खण्ड 3 (1), दिनांक 27-11-2003 में प्रकाशित (दिनांक 27-11-2003 से प्रभावी)।
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