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मई, 2026 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

भारत सरकार ले आई "समाधान दीदी"

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 मीडिया रिपोर्ट के अनुसार केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग तथा कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन में 30 मई 2026 को सीपीजीआरएएमएस के एआई-सक्षम वॉयस चैटबॉट ‘समाधान दीदी’ का शुभारंभ किया. समाधान दीदी' भारत सरकार द्वारा केंद्रीयकृत लोक शिकायत निवारण प्रणाली (CPGRAMS) के लिए हाल ही में लॉन्च किया गया एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित वॉयस चैटबॉट है। ➡️ प्रमुख विशेषताएं : ⚫ मातृभाषा में शिकायत:  यह चैटबॉट नागरिकों को बोलकर अपनी पसंदीदा या मातृभाषा में सरकारी विभागों से जुड़ी शिकायतें दर्ज कराने की सुविधा देता है। ⚫ शिकायत करना हुआ आसान:  अब आम लोगों को शिकायत लिखने के लिए टाइप करने की जरूरत नहीं है - वे सिर्फ बोलकर अपनी समस्या बता सकते हैं। ⚫ आधिकारिक पोर्टल:  इसे सरकार के आधिकारिक लोक शिकायत पोर्टल CPGRAMS के माध्यम से एक्सेस किया जा सकता है।        इस पहल का मुख्य उद्देश्य नागरिको...

जॉब स्कैम

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  साइबर क्राइम की दुनिया में नया स्कैम नजर आ रहा है जॉब स्कैम के रूप में, मीडिया रिपोर्ट के अनुसार नेशनल साइबर क्राइम थ्रेट एनालिटिक्स यूनिट (NCTAU) ने कहा है कि अपराधी आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर जाल बिछा रहे हैं. यह देखने में पूरी तरह असली भर्ती प्रक्रिया जैसे लगते हैं. इनका मकसद नौकरी तलाश रहे लोगों से उनकी निजी और संवेदनशील जानकारी हासिल करना है. विशेषज्ञों के मुताबिक, यह खतरा सिर्फ ऑनलाइन ठगी तक सीमित नहीं है. अब साइबर अपराधी फेस, आंखों और आवाज से जुड़ी पहचान का दुरुपयोग कर डिजिटल फ्रॉड, पहचान चोरी और बैंकिंग धोखाधड़ी जैसे अपराधों को अंजाम दे सकते हैं. ➡️ AI तकनीक ने बढ़ाई चुनौती? मीडिया रिपोर्ट्स में आई जानकारी के अनुसार साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने इस तरह की धोखाधड़ी को बेहद खतरनाक बना दिया है. पहले अपराधी केवल बैंक डिटेल्स, OTP या पासवर्ड चोरी करने की कोशिश करते थे, लेकिन अब वे किसी व्यक्ति की डिजिटल पहचान को कॉपी करने में सक्षम हो रहे हैं. AI आधारित टूल्स की मदद से चेहरे के हावभाव, आंखों की गतिविधि और आवाज के पैट...

अकाउंट में ठगी के पैसे आना मात्र साइबर क्राइम नहीं - कोर्ट

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मुंबई (महाराष्ट्र) की गिरगांव अदालत ने  साइबर धोखाधड़ी के एक महत्वपूर्ण मामले में झारखंड निवासी 23 वर्षीय मनोज किस्कू को बरी कर दिया. साथ ही अदालत ने कहा कि " किसी व्यक्ति के बैंक खाते में धोखाधड़ी से प्राप्त रकम जमा होना मात्र, तब तक अपराध नहीं माना जा सकता जब तक उसके पीछे किसी आपराधिक साजिश या प्रत्यक्ष संलिप्तता के ठोस सबूत मौजूद न हों."    पुलिस अधिकारी द्वारा एक न्यूज एजेंसी को प्राप्त सूचना के अनुसार अदालत ने कहा कि  " केवल आर्थिक लाभ प्राप्त होना किसी किसी व्यक्ति को अपराधी साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है." गिरगांव अदालत के न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) एस.जी. चिमनकर ने पिछले सप्ताह सुनाए गए फैसले में मनोज किस्कू को “संदेह का लाभ” देते हुए बरी कर दिया. अदालत ने कहा कि " अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को "उचित संदेह से परे" साबित करने में पूरी तरह विफल रहा."  ➡️ मामला संक्षेप में -   वर्ष 2022 के इस मामले में शिकायतकर्ता प्रियंका हनुमंत पवार, जो पुलिस विभाग में कार्यरत हैं. उन्हें 26 फरवरी 2022 को एक SMS ...

मेडिसिन होम डिलीवरी फ्रॉड

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साइबर क्राइम में एक नया अध्याय जोड़ते हुए साइबर ठगों ने होम डिलीवरी सिस्टम में भी घुसपैठ आरंभ की हुई है. उत्तर प्रदेश के कांधला कस्बे के गांव मीमला निवासी एक युवक को मेडिसिन होम डिलीवरी के नाम पर साइबर ठगों ने अपना शिकार बना लिया। साइबर ठगों द्वारा पहले दवाई मंगाने के बहाने एडवांस रकम जमा कराई गई फिर बाद में ओटीपी हासिल कर युवक के खाते से 72 हजार रुपये उड़ा लिए गए.  कांधला कस्बे के गांव मीमला निवासी विपिन ने कांधला पुलिस को दी गई तहरीर में बताया कि एक अज्ञात व्यक्ति ने " मेडिसिन होम डिलीवरी" के नाम से आईडी बना रखी थी। युवक विपिन द्वारा उस पर सम्पर्क करने पर अज्ञात व्यक्ति द्वारा दो हजार रुपये में दवाई भेजने की बात कही गई, जिसमें से एक हजार रुपये एडवांस जमा करा लिए गए, जबकि बाकी रकम डिलीवरी के समय देने के लिए कहा गया । इस सबके बाद आरोपी द्वारा डिलीवरी के नाम पर जीपीआरएस चार्ज बताते हुए 1900 रुपये के साथ 99 रुपये और जमा कराए गए । पीड़ित विपिन का आरोप है कि इसके बाद आरोपी ने ओटीपी मांगा। ओटीपी बताते ही उसके खाते से करीब 72 हजार रुपये निकलने का मैसेज विपिन के फोन पर आया । जब विपि...

इंटरनेशनल स्कॉलरशिप - खाता खाली

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  इंटरनेशनल स्कॉलरशिप के नाम पर साइबर क्राइम एक ऐसा फ्रॉड है, जिसमें जालसाज विदेश में पढ़ाई का झांसा देकर छात्रों और उनके माता-पिता से पैसे ऐंठते हैं या उनकी निजी जानकारी चुराते हैं। यह पूरी तरह से एक संगठित धोखाधड़ी है।  ➡️ यह स्कैम कैसे काम करता है? ⚫ फर्जी ईमेल और मैसेज : छात्रों को प्रतिष्ठित विदेशी विश्वविद्यालयों या सरकारी संस्थाओं के नाम से फर्जी ईमेल, मैसेज या व्हाट्सएप आते हैं कि उन्हें मोटी स्कॉलरशिप मिल रही है。 ⚫ प्रोसेसिंग फीस की मांग: ऑफर को पक्का करने के लिए छात्रों को 'प्रोसेसिंग फीस', 'रजिस्ट्रेशन चार्ज', 'वीज़ा फीस' या 'कूरियर चार्ज' के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने को कहा जाता है。 ⚫ डेटा की चोरी: छात्रों से ऑनलाइन फॉर्म भरवाकर उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक अकाउंट डिटेल्स और पासवर्ड/OTP जैसी संवेदनशील जानकारी चुरा ली जाती है。  ➡️ फ्रॉड से कैसे बचें? ⚫ कोई फीस नहीं: असली स्कॉलरशिप के लिए कभी भी कोई आवेदन या प्रोसेसिंग फीस नहीं मांगी जाती。यदि कोई पैसे मांग रहा है, तो वह 100% स्कैम है。 ⚫ आधिकारिक वेबसाइट चेक करें: किसी भी स्कॉलरशिप का सीधा ...

साइबर गुलामी और टूरिस्ट वीजा

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साइबर क्राइम में एक और नया अपराध उभरकर सामने आ रहा है साइबर गुलामी. साइबर गुलामी (Cyber Slavery) आधुनिक युग का एक खतरनाक जाल है, जिसमें लोगों को अच्छी नौकरी का लालच देकर विदेशों में बंधक बनाया जाता है और उनसे जबरन ऑनलाइन धोखाधड़ी (Cyber Scams) करवाई जाती है।  यह केवल एक डिजिटल अपराध नहीं है, बल्कि मानव तस्करी (Human Trafficking) का एक नया रूप है। इसके मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं:  ➡️ यह कैसे काम करता है? ✒️ झूठा वादा: युवाओं को सोशल मीडिया या व्हाट्सएप के जरिए विदेश (जैसे कंबोडिया, म्यांमार, थाईलैंड, वियतनाम या लाओस) में डेटा एंट्री या आईटी सेक्टर में "हाई सैलरी जॉब" का लालच दिया जाता है। ✒️ बंधक बनाना : वहां पहुंचने पर उनके पासपोर्ट और दस्तावेज जब्त कर लिए जाते हैं। उन्हें ऊंची दीवारों और कटीले तारों वाले "स्कैम कंपाउंड्स" में रखा जाता है। ✒️ जबरन अपराध: उन्हें फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल बनाकर लोगों को क्रिप्टोकरेंसी घोटाले, हनी ट्रैप या इन्वेस्टमेंट फ्रॉड में फंसाने के लिए मजबूर किया जाता है। ✒️ टॉर्चर : अगर कोई काम करने से मना करता है, तो उसे पीटा जाता है, भूखा ...

NPCI से होता है असल डिजिटल पेमेंट

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 NPCI का पूरा नाम नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (National Payments Corporation of India) है। इसे हिंदी में 'भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम' कहते हैं।  यह भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) द्वारा स्थापित एक गैर-लाभकारी संस्था है, जो भारत में सभी डिजिटल और खुदरा भुगतान (Retail Payments) प्रणालियों को मैनेज और कंट्रोल करती है।   भारत के एक प्रमुख साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ, एथिकल हैकर और साइबर अपराध अन्वेषक (Cyber Investigator) अमित दुबे जो कि विभिन्न सरकारी एजेंसियों, पुलिस विभागों और जांच ब्यूरो (जैसे NIA, RAW, और CBI) के साथ मिलकर साइबर सुरक्षा और घोटालों की जांच का काम करते हैं। आज उनके माध्यम से हमे NPCI के सम्बन्ध में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई है, जो कि इस प्रकार है -  ​⚫ मीडिया रिपोर्ट में अमित दुबे ने बताया - मैं नॉर्मली जो UPI ऐप्स हैं, उनको रेकमेंड नहीं करता। मैं कहता हूं कि आप बैंकिंग ऐप से ही UPI पेमेंट कीजिए। जैसे कि ICICI बैंक है या Kotak Mahindra बैंक है या SBI है, उनके ऐप में भी फीचर होता है UPI पेमेंट का। ⚫ मीडिया रिपोर...

अब साइबर अपराधी खाना भी नहीं खाने देंगे अगर आपने.......

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 साइबर क्राइम की दुनिया में आइये आपको एक नए स्कैम की सूचना देते हैं, जिसके जाल में आप चाहे अनचाहे फंस सकते हैं. कोई बड़ी गलती न करने पर भी आप उसके शिकार हो सकते हैं. आज हम आपके लिए लाए हैं  डिजिटल मेन्यू स्कैम, अब आप जानिए डिजिटल मेन्यू स्कैम क्या है -      मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पुणे की निवासी एक महिला ऋषिका दत्ता पुणे के एफसी रोड स्थित एक रेस्टोरेंट में खाना खाने गई । जहां टेबल पर उन्हें क्यूआर कोड को स्कैन कर डिजिटल मेन्यू खोलने के लिए मिला । उन्होंने डिजिटल मेन्यू खोलकर खाना ऑर्डर किया, खाना खाया और घर आ गई. रात में उनके फोन पर अज्ञात नंबर से अश्लील मैसेज आने लगे। जिसकी जांच कराने पर उन्हें पता चला कि मैसेज भेजने वाला उसी रेस्टोरेंट मे कार्य करने वाला वेटर था। इसके बाद महिला द्वारा मोबाइल नंबर रेस्टोरेंट के डिजिटल मेन्यू सिस्टम से लीक होने का आरोप लगाया गया.  ➡️ डिजिटल मेन्यू सिस्टम से नंबर लीक कैसे?  डिजिटल मेन्यू सिस्टम को खोलने के लिए क्यूआर कोड स्कैन करना होता है. साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक क्यूआर कोड स्कैन करते समय कई बार यूजर्स बिना सोचे अ...

अपने बच्चों की रक्षा आपके हाथ

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 अभी कल ही केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का सीनियर सेकेंडरी का परीक्षा परिणाम घोषित किया गया है, कुछ ही दिन में छात्र-छात्राओं की मार्कशीट भी आ जाएगी और फिर हो जाएगा आरंभ एक नया ट्रेंड जो कि आजकल बहुत प्रचलन मे है और वह है माता पिता द्वारा अपना स्टैटस बन चुके अपने बच्चो की मार्कशीट का स्टेटस (WhatsApp Status, Instagram Story आदि) पर लगाना, जिस पर उनकी मार्कशीट का लगाना उनके लिए साइबर ठगी (Cyber Fraud) का एक बड़ा कारण बन सकता है। जिसके बारे में अभी वे जानते भी नहीं किन्तु अब ये सब उन्हें जान ही लेना चाहिए कि आजकल साइबर अपराधी छात्रों की व्यक्तिगत जानकारी चुराकर उन्हें अपना शिकार बना रहे हैं।  ➡️ मार्कशीट स्टेटस पर लगाने से कैसे होती है ठगी? ⚫ निजी जानकारी का खुलासा : मार्कशीट में रोल नंबर, जन्मतिथि, माता-पिता का नाम और स्कूल/कॉलेज का नाम होता है। इन जानकारियों का उपयोग अपराधी फर्जी आईडी (Fake ID) बनाने या बैंक खातों से छेड़छाड़ करने के लिए कर सकते हैं। ⚫ फर्जी कॉल (Fake Calls): साइबर ठग स्टेटस देखकर छात्रों को कॉल करते हैं और नंबर बढ़ाने या परीक्षा में पास कराने का झांसा देते ...

उँगलियों का "V" पोज खाली करा सकता है आपका बैंक खाता-फिंगरप्रिंट क्लोनिंग

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चीन की सुरक्षा एजेंसियों के अलर्ट पर मीडिया रिपोर्ट के अनुसार - विक्टरी की खुशी में हमारे द्वारा "V" का पोज बनाते हुए सेल्फी लेना या आजकल के AI POWERED कैमरों से फोटो खिंचवाना हमारे बैंक खातों और निजी डाटा के लिए बहुत बड़ा खतरा साबित हो सकता है क्योंकि हाई रिजोल्यूशन कैमरों और AI के इस दौर में सेल्फी में हमारे फिंगरप्रिंट को आसानी से कॉपी किया जा सकता है क्योंकि ये कैमरे इतने दमदार हैँ कि ये उंगलियों की सूक्ष्म रेखाओं को आसानी से कैद कर लेते हैं. फोटो जितना पास से होगा उतनी ही स्पष्ट रेखाओं को AI कैमरा कैद कर लेगा क्योंकि AI POWERED कैमरा 3 मीटर की दूरी से ली गई धुँधली फोटो को भी साफ करके फिंगर प्रिंट का डाटा तैयार कर सकता है. ➡️ फिंगरप्रिंट क्लोनिंग- फिंगरप्रिंट क्लोनिंग एक उभरता हुआ साइबर अपराध है जिसमें अपराधी किसी व्यक्ति के अंगूठे या उंगलियों के निशान चुराकर उनका नकली 'क्लोन' तैयार करते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य Aadhaar Enabled Payment System (AePS) के जरिए बैंक खातों से पैसे चोरी करना होता है। ➡️ डाटा की चोरी:  जालसाज सरकारी वेबसाइटों (जैसे रजिस्ट्री डीड या लैंड ...

सबसे सुरक्षित UPI APP

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  भारत में सबसे सुरक्षित UPI ऐप BHIM (भीम) को माना जाता है, क्योंकि इसे सीधे नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा विकसित किया गया है। यह ऐप उच्चतम स्तर की सुरक्षा, जैसे कि 3-लेयर प्रमाणीकरण (डिवाइस बाइंडिंग, मोबाइल नंबर, और UPI पिन) प्रदान करता है, जो इसे सबसे अधिक विश्वसनीय बनाता है। ➡️ सबसे सुरक्षित UPI ऐप्स (2026 के अनुसार): ⚫ BHIM (भीम): NPCI द्वारा निर्मित, सीधा बैंक-टू-बैंक ट्रांसफर, और सबसे कम फ्रॉड रिस्क। ⚫ Google Pay (गूगल पे) : मल्टी-लेयर सुरक्षा और फ्रॉड डिटेक्शन के कारण बहुत सुरक्षित माना जाता है। ⚫ Paytm (पेटीएम): उन्नत सुरक्षा अवसंरचना और इंस्टेंट फ्रॉड अलर्ट प्रदान करता है। ⚫ PhonePe (फोनपे) : सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाला और फीचर-समृद्ध ऐप, जो अपनी मजबूत सुरक्षा के लिए भी जाना जाता है। ➡️ सुरक्षित UPI पेमेंट के लिए सुझाव: हमेशा Play Store या App Store से ही आधिकारिक ऐप्स डाउनलोड करें।अपना UPI पिन कभी किसी के साथ साझा न करें।किसी भी अनजान लिंक्स या QR कोड को स्कैन न करें।     यद्यपि सभी प्रमुख UPI ऐप सुरक्षित हैं, लेकिन BHIM को इसके आधिकारिक सर...

सावधानी 3️⃣ -फेक ई-चालान स्कैम

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो कुछ ही समय पूर्व हैदराबाद के 49 साल के रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल साइबर ठगी का शिकार हो गए। उनके वॉट्सएप पर एक मैसेज आया, जिसमें लिखा गया था कि  आपकी गाड़ी से ट्रैफिक नियम तोड़ा गया है और ₹1000 का चालान भरना है। उस व्हाट्सएप्प मैसेज के साथ ‘e-parivahan.apk’ नाम की एक फाइल भी भेजी गई थी। रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल साहब ने अपनी गलती समझकर फाइल को डाउनलोड कर एप इंस्टॉल कर लिया। एप इंस्टॉल करते ही उनके मोबाइल का कंट्रोल ठगों के हाथ में चला गया। कुछ ही देर में उनके बैंक खाते से 1.2 लाख रुपए से ज्यादा की रकम निकाल ली गई। वास्तव में यह एप दिखने में सरकार के mParivahan एप जैसा था, लेकिन यह फेक एप था, जो सिर्फ ठगी करने के लिए बनाया गया था। इसलिए अब जानिए कि आप फेक ई-चालान स्कैम से कैसे बच सकते हैं? एक्सपर्ट: 1️⃣ राजेश दंडोतिया, एडिशनल डीसीपी, क्राइम ब्रांच, इंदौर 2️⃣ राहुल मिश्रा, साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट, उत्तर प्रदेश पुलिस फेक ई-चालान स्कैम एक नया साइबर फ्रॉड है, जिसमें स्कैमर्स खुद को ट्रैफिक अथॉरिटी दिखाते हैं और लोगों को चालान भरने के लिए एक फेक एप डाउनलोड क...

सावधानी 1️⃣ Online order box scam

साइबर ठगी का एक मूल कारण हमारी लापरवाही ही कही जाएगी. हम सोच भी नहीं सकते कि कोई हमारे घर आए सामान को भी चेक कर रहा है. आजकल ऑनलाइन खरीदारी का प्रचलन बढ़ रहा है, हम ऑनलाइन जो सामान मंगाते हैं उस के डिब्बे पर हमारा पता, फोन नंबर आदि लिखा रहता है. बॉक्स पर चिपका हुआ यह लेबल साइबर ठगी बढ़ा रहा है। ऐसे मे अगर हम ध्यान दें तो यह ऑनलाइन डेलिवरी बॉक्स हमारी गाढ़ी कमाई लुटवा सकता है। शुरुआत में हम इसे गंभीरता से नहीं लेंते हैं लेकिन अगर डिलिवरी बॉक्स को यूं ही कूड़े में फेंक देने की आदत बनी रहे तो यह कभी भी बड़ी दिक्कत में डाल सकती है। आप ध्यान दीजिये ऑनलाइन शॉपिंग करने पर यदि आप आने वाले पार्सल में डिब्बे को यूं ही कूड़े में फेंक देते हैं तो आप साइबर क्राइम को आमंत्रित कर रहे है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आज के ऑनलाइन खरीदारी के इस आनंद में साइबर ठग भी आनंद ले रहे हैं और Online Order Box Scam को बढ़ावा दे रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कुछ खास तथ्य  ➡️ ऑनलाइन खरीदारी में ग्राहक की गतिविधि -  ग्राहक जब ऑनलाइन खरीदारी करते हैं तो डिब्बे में से सामान निकालकर उसे डस्टबिन में फेंक देते ...

साइबर ठगों का हथियार न बने एडवोकेट

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  देखने मे आ रहा है कि आज के सोशल मीडिया युग में एडवोकेट नाम कमाने के लिए, ज्यादा से ज्यादा लोगों को यह दिखाने के लिए कि मैं बार काउंसिल मे रजिस्टर्ड एडवोकेट हूं अपने सर्टिफिकेट का प्रयोग अपने सोशल मीडिया नेटवर्किंग साइट्स के अकाउंट पर कर रहे हैं. जबकि एडवोकेट द्वारा अपने एनरोलमेंट सर्टिफिकेट (Enrollment Certificate) या बार काउंसिल आईडी की फोटो को व्हाट्सएप, फेसबुक या अन्य सोशल मीडिया पर डीपी (Display Picture) के रूप में लगाना साइबर ठगों के लिए अत्यंत फायदेमंद और खतरनाक साबित हो सकता है। यह न केवल वकील की प्रतिष्ठा के लिए खतरा है, बल्कि उनके क्लाइंट्स के लिए भी भारी जोखिम पैदा करता है। ➡️ यह खतरा कैसे है - : 1️⃣ . पहचान की चोरी और फर्जीवाड़ा (Identity Theft & Impersonation) -  फ़र्ज़ी वकील,साइबर अपराधी सर्टिफिकेट से नाम, एनरोलमेंट नंबर और बार काउंसिल का विवरण चुराकर फर्जी आईडी बना सकते हैं। 2️⃣ विश्वास हासिल करना:   जब कोई अपराधी खुद को 'एडवोकेट' बताता है, तो लोग आसानी से भरोसा कर लेते हैं। वे इस जाली सर्टिफिकेट का इस्तेमाल लोगों को डराने, फर्जी कानूनी नोटिस भेजने या...

सरकार की तैयारी 1️⃣6️⃣ म्यूलहंटर एआई

 MuleHunter.AI (म्यूलहंटर एआई) भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा विकसित एक उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) आधारित टूल है, जिसका मुख्य उद्देश्य बैंकिंग प्रणाली में 'म्यूल खातों' (Mule Accounts) का पता लगाना और उन्हें रोकना है। इसे रिजर्व बैंक इनोवेशन हब (RBIH) द्वारा विकसित किया गया है। ➡️ म्यूलहंटर एआई की मुख्य विशेषताएं और कार्य:उद्देश्य:  यह साइबर धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध धन हस्तांतरण को रोकने के लिए बनाया गया है। ➡️ म्यूल खातों की पहचान:  यह टूल ट्रांजैक्शन डेटा और ग्राहक के व्यवहार का विश्लेषण करके उन संदिग्ध बैंक खातों (म्यूल खातों) को जल्दी और सटीकता से पहचानता है, जिनका इस्तेमाल ठग दूसरों का पैसा निकालने के लिए करते हैं। ➡️ तकनीक :  यह पारंपरिक नियम-आधारित प्रणालियों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करता है और संदिग्ध पैटर्न को तुरंत पकड़ लेता है। ➡️ पायलट प्रोजेक्ट:  इस टूल का परीक्षण कई प्रमुख सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों में किया जा रहा है, और इसने अब तक हजारों म्यूल खातों का पता लगाने में मदद की है। ➡️ ' म्यूल खाता' (Mu...