सावधानी 3️⃣ -फेक ई-चालान स्कैम

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो कुछ ही समय पूर्व हैदराबाद के 49 साल के रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल साइबर ठगी का शिकार हो गए। उनके वॉट्सएप पर एक मैसेज आया, जिसमें लिखा गया था कि 

आपकी गाड़ी से ट्रैफिक नियम तोड़ा गया है और ₹1000 का चालान भरना है। उस व्हाट्सएप्प मैसेज के साथ ‘e-parivahan.apk’ नाम की एक फाइल भी भेजी गई थी।

रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल साहब ने अपनी गलती समझकर फाइल को डाउनलोड कर एप इंस्टॉल कर लिया। एप इंस्टॉल करते ही उनके मोबाइल का कंट्रोल ठगों के हाथ में चला गया। कुछ ही देर में उनके बैंक खाते से 1.2 लाख रुपए से ज्यादा की रकम निकाल ली गई। वास्तव में यह एप दिखने में सरकार के mParivahan एप जैसा था, लेकिन यह फेक एप था, जो सिर्फ ठगी करने के लिए बनाया गया था।

इसलिए अब जानिए कि आप फेक ई-चालान स्कैम से कैसे बच सकते हैं?

एक्सपर्ट:

1️⃣ राजेश दंडोतिया, एडिशनल डीसीपी, क्राइम ब्रांच, इंदौर

2️⃣ राहुल मिश्रा, साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट, उत्तर प्रदेश पुलिस

फेक ई-चालान स्कैम एक नया साइबर फ्रॉड है, जिसमें स्कैमर्स खुद को ट्रैफिक अथॉरिटी दिखाते हैं और लोगों को चालान भरने के लिए एक फेक एप डाउनलोड करवाते हैं। यह एप असल में मालवेयर होता है, जो मोबाइल की सेंसिटिव जानकारी जैसे SMS, बैंकिंग एप्स, OTP और पासवर्ड चुरा लेता है।

  इस स्कैम में साइबर अपराधी खुद को ट्रैफिक पुलिस या सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर वॉट्सएप, SMS या ईमेल के जरिए चालान का फेक मैसेज भेजते हैं। इसमें लिखा होता है कि आपकी गाड़ी से ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन हुआ है और आपको जुर्माना भरना है। साथ ही एक APK फाइल (जैसे e-parivahan.apk) या लिंक दिया जाता है, जिसमें दावा किया जाता है कि चालान की डिटेल्स देखने या पेमेंट के लिए इस एप को इंस्टॉल करें।

जब यूजर यह फाइल डाउनलोड करता है और एप इंस्टॉल करता है। वह एप फोन से सेंसिटिव जानकारी जैसे SMS, कॉन्टैक्ट्स, बैंकिंग एप्स, पासवर्ड और OTP तक का एक्सेस मांगता है। एक बार यह एक्सेस मिल गया तो स्कैमर्स मोबाइल बैंकिंग या UPI के जरिए अकाउंट से पैसे उड़ा लेते हैं।

राहुल मिश्रा, साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट, उत्तर प्रदेश पुलिस के अनुसार असली चालान मैसेज सरकार की ऑफिशियल SMS ID (जैसे VK-MORTH, CH-TRAFF आदि) से आता है और उसमें किसी भी APK फाइल या संदिग्ध लिंक का जिक्र नहीं होता है। असली चालान की जानकारी के लिए https://echallan.parivahan.gov.in जैसी सरकारी वेबसाइट पर जाकर RC नंबर या ड्राइविंग लाइसेंस नंबर डालना होता है।

वहीं, फेक चालान मैसेज में डर फैलाने वाली भाषा होती है, साथ ही किसी APK फाइल को डाउनलोड करने या लिंक पर क्लिक करने का दबाव बनाया जाता है।

 सरकारी mParivahan एप केवल गूगल प्ले स्टोर या एपल एप स्टोर पर ही उपलब्ध होता है। इसका डेवलपर ‘NIC eGov Mobile Apps’ होता है। इसके अलावा https://parivahan.gov.in पर जाकर भी इसकी आधिकारिक लिंक को वेरिफाई किया जा सकता है।

इस तरह के फेक एप्स से बचने के लिए सावधानी - स्कैमर्स डर और जल्दीबाजी का फायदा उठाकर यूजर से गलती करवाते हैं। नीचे दिए गए उपाय अपनाकर आप ऐसे फ्रॉड से खुद को सुरक्षित रख सकते हैं। इसके लिए इन स्टेप्स को फॉलो करें।

*तुरंत एप अनइंस्टॉल करें।

*मोबाइल की सेटिंग्स में जाकर सभी परमिशन को हटाएं।

*अपने बैंक, UPI और सोशल मीडिया के पासवर्ड बदलें।

*अगर पैसे निकाले गए हों या ब्लैकमेलिंग हो रही हो तो नजदीकी साइबर क्राइम सेल में शिकायत दर्ज कराएं।

*इसके अलावा साइबर क्राइम पोर्टल पर इसकी ऑनलाइन शिकायत दर्ज करवा सकते हैं।

इसके अतिरिक्त कुछ अन्य सावधानी और बरतें-

⚫ कुछ मोबाइल सिक्योरिटी एप्स APK फाइल्स को स्कैन करके चेतावनी जरूर देते हैं, लेकिन यह 100% सुरक्षा की गारंटी नहीं देते हैं। सबसे अच्छा तरीका है कि किसी भी एप को सिर्फ गूगल प्ले स्टोर या एपल एप स्टोर से ही डाउनलोड करें। साथ ही कभी भी मैसेज या वेबसाइट से मिली APK फाइल इंस्टॉल न करें।

⚫ अगर किसी जान-पहचान वाले को फेक चालान मैसेज मिले, तो उन्हें तुरंत अलर्ट करें कि वह एप डाउनलोड न करें। अगर वे पहले ही एप इंस्टॉल कर चुके हैं, तो तुरंत उसे अनइंस्टॉल करें, मोबाइल की सभी परमिशन हटाएं और बैंक व सोशल मीडिया पासवर्ड बदलें। साथ ही www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करना जरूरी है। जरूरत हो तो नजदीकी साइबर सेल में जाकर भी मदद लें।

द्वारा 

शालिनी कौशिक 

एडवोकेट 

कैराना (शामली) 

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