1️⃣ साइबर विनियमन अपील अधिकरण (प्रक्रिया) नियम, 2000

 साइबर विनियमन अपील अधिकरण (प्रक्रिया) नियम, 2000


 सा० का० नि० 791 (अ), दिनांक 17-10-2000 अधिनियम, 20001️⃣  केन्द्रीय सरकार, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (2000 का 21) की धारा 87 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, निम्नलिखित नियम बनाती है, अर्थात्

1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ (1) इन नियमों का संक्षिप्त नाम साइबर विनियमन अपील अधिकरण (प्रक्रिया) नियम, 2000 है।

(2) ये राजपत्र में उनके प्रकाशन की तारीख को प्रवृत्त होंगे।

2. परिभाषाएं- इन नियमों में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो.-

(क) "अधिनियम "से सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (2000 का 21) अभिप्रेत है;

(ख) "अभिकर्ता" से किसी पक्षकार द्वारा अधिकरण के समक्ष इस निमित्त कोई आवेदन या उत्तर पेश करने के लिए सम्यक् रूप से प्राधिकृत कोई व्यक्ति अभिप्रेत है।

(ग) "आवेदन "से धारा 57 के अधीन अधिकरण को किया गया कोई आवेदन अभिप्रेत है।

(घ ) "विधि व्यवसायी" का वही अर्थ होगा जो अधिवक्ता अधिनियम, 1961 (1961 का 25) में उसका है:

(ङ) "पीठासीन अधिकारी " से अधिकरण का पीठासीन अधिकारी अभिप्रेत है;

(च) "रजिस्ट्रार" से अधिकरण का रजिस्ट्रार अभिप्रेत है और कोई ऐसा अधिकारी भी है जिसको रजिस्ट्रार को शक्तियां और कृत्य प्रत्यायोजित किये जा सकेंगे;

(छ) "रजिस्ट्री "से अधिकरण की रजिस्ट्री अभिप्रेत है;

(ज) "धारा "से अधिनियम की धारा अभिप्रेत है;

(झ) "अंतरित आवेदन "से कोई वाद या अन्य कार्यवाही, जिसे धारा 29 की उपधारा (1) के अधीन अधिकरण को अंतरित किया गया है, अभिप्रेत है;

(ञ) "अधिकरण" से धारा 48 के अधीन स्थापित साइबर विनियमन अपील अधिकरण अभिप्रेत है;

3. आवेदन फाइल करने की प्रक्रिया (1) अधिकरण को कोई आवेदन, आवेदक द्वारा व्यक्तिगत रूप से या अभिकर्ता द्वारा या सम्यक् रूप से प्राधिकृत विधि व्यवसायी द्वारा इन नियमों में उपाबद्ध प्ररूप 1 में रजिस्ट्रार को प्रस्तुत किया जाएगा या रजिस्ट्रार को संबोधित करते हुए रजिस्ट्रीकृत डाक द्वारा भेजा जाएगा।

(2) उपनियम (1) के अधीन कोई आवेदन, प्रत्यर्थी के पूरे पते सहित फाइल आकार के एक खाली लिफाफे के साथ पेपर पुस्तिका के रूप में छह पूर्ण सेटों में प्रस्तुत किया जाएगा। जहाँ प्रत्यर्थियों की संख्या एक से अधिक है, वहां अतिरिक्त पेपर पुस्तिकाओं की पर्याप्त संख्या प्रत्येक प्रत्यर्थी के पूरे पते सहित फाइल आकार के खाली लिफाफों की अपेक्षित संख्या के साथ, आवेदक द्वारा प्रस्तुत किये जाएंगे।

(3) आवेदक, अपने आवेदन के साथ प्ररूप-1 में दी गई प्राप्ति पर्ची संलग्न करके प्रस्तुत कर सकेगा जिस पर रजिस्ट्रार या रजिस्ट्रार की ओर से आवेदन प्राप्त करने वाला अधिकारी, आवेदन की प्राप्ति की पावती देगा।

(4) उपनियम (1), उपनियम (2) और उपनियम (3) में किसी बात के होते हुए भी, अधिकरण निम्नलिखित के बारे में अनुज्ञा दे सकेगा :

..................... 

1️⃣ . भारत का राजपत्र, असाधारण, भाग 2, खण्ड 3 (1), दिनांक 17 अक्टूबर, 2000 में प्रकाशित (दिनांक 17-10-2000 से प्रभावी 


........................... 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

सरकार की तैयारी 1️⃣ कैसे रोकें अमिताभ बच्चन कॉलर ट्यून

सावधानी 7️⃣ सेल में ठगी से बचने के लिए अपनाएं टिप्स

डिजिटल अरेस्ट 2️⃣-ठग बने क़ानून व्यवस्था के बड़े अफसर