7️⃣ साइबर विनियमन अपील अधिकरण (प्रक्रिया) नियम, 2000


साइबर विनियमन अपील अधिकरण के समक्ष

क ख

... आवेदक

और

ग घ

........प्रत्यर्थी

के बीच

आवेदन के ब्यौरे :

1. आवेदन की विशिष्टियां

(i) आवेदक का नाम

(ii) पिता/पति का नाम

(iii) पदनाम और वह कार्यालय जिसमें नियोजित है

(iv) कार्यालय का पता

(v) सभी सूचनाओं की तामील के लिए पता

2. प्रत्यर्थी की विशिष्टियां-

(1) प्रत्यर्थी का नाम और/या पदनाम

(ii) प्रत्यर्थी का कार्यालय का पता

(iii) सभी सूचनाओं की तामील के लिए पता

3. उस आदेश की विशिष्टियां जिसके विरुद्ध आवेदन किया गया है- आवेदन निम्नलिखित आदेश के विरुद्ध किया गया है-

(i) आदेश संख्या

(ii) तारीख

(iii) द्वारा पारित

(iv) विषय, संक्षेप में

4. अधिकरण की अधिकारित- आवेदक घोषणा करता है कि उस आदेश की जिसके विरुद्ध वह परित्राण चाहता है, विषयवस्तु अधिकरण की अधिकारिता के भीतर है।

5. सीमा-आवेदक यह और घोषणा करता है कि आवेदन सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की

धारा 57 में विहित सीमा के भीतर है।

6. मामले के तथ्य-मामले के तथ्य नीचे दिए गए हैं

(कालानुक्रम में तथ्यों का संक्षिप्त विवरण दें, प्रत्येक पैरा में यथा संभव एक पृथक विवाद्यक, तथ्य अथवा अन्यथा अंतर्विष्ट हो)

7. मांगा गया अनुतोष ऊपर पैरा 6 में उल्लिखित तथ्यों को देखते हुए, आवेदक निम्नलिखित अनुतोष/अनुतोषों के लिए प्रार्थना करता है

(नीचे मांगा गया/मांगे गए अनुतोष/अनुतोषों को, ऐसे अनुतोष/अनुतोषों के आधार और विधिक उपबंध (यदि कोई है) जिन पर विश्वास किया गया है, का विवरण देते हुए विनिर्दिष्ट करे)।

8. अंतरिम आदेश यदि प्रार्थना की गई हो- आवेदन पर अंतिम विनिश्चय लंबित रहते हुए, आवेदक

निम्नलिखित अंतरिम आदेश जारी करने के लिए अनुरोध करता है

(कारणों सहित प्रार्थना किए गए अंतरिम आदेश की प्रकृति का उल्लेख करें)

9. निःशेष किए गए उपचार/उपचारों के ब्यौरे- आवेदक घोषणा करता है कि उसने सुसंगत सेवा नियमों आदि के अधीन उसको उपलब्ध सभी उपचारों का उपयोग कर लिया है।

(यहां किए गए अभ्यावेदनों के और ऐसे अभ्यावेदन के परिणाम के ब्यौरे कालानुक्रम में दें)

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