सरकार की तैयारी 1️⃣7️⃣ I4C का नया SOP - बैंकों की PRP व्यवस्था


साइबर क्राइम के शिकार लोगों के लिए आई-4C (Indian Cyber Crime Coordination Centre) ने नया SOP जारी कर दिया है. इसके अनुसार, अब साइबर फ्रॉड से जुड़े छोटे मामलों का निपटारा सीधे बैंक स्तर पर कर दिया जाएगा। इसके लिए सभी बैंकों को ‘प्रिवेंट रिफंड पोर्टल’ कि व्यवस्था की गई है, जहां शिकायत दर्ज होते ही कार्रवाई शुरू हो जाएगी.

➡️ 50 हजार की ठगी के लिए नई व्यवस्था 

हालांकि ये व्यवस्था छोटी ठगी के शिकार लोगों के लिए की गई है.इसके लिए 50 हजार तक की राशि तय की गई है. यानि अब अगर किसी व्यक्ति के साथ 50 हजार रुपये से कम की साइबर ठगी होती है, तो उसे FIR दर्ज कराने या कोर्ट के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी।

नई व्यवस्था के तहत बैंक खुद पीड़ित का पैसा लौटाने की प्रक्रिया पूरी करेगा. इस नई व्यवस्था का उद्देश्य पुलिस और कोर्ट पर बढ़ते बोझ को कम करना और पीड़ितों को जल्द राहत देना है.

➡️ कैसे मिलेगा पैसा वापस?

अब जानिए कि साइबर ठगों के शिकार बने लोगों को क्या करना होगा. साइबर ठगी के शिकार व्यक्ति को 2 घंटे के भीतर हेल्पलाइन नंबर 1930 या वेबसाइट cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करनी होगी.

शिकायत दर्ज होते ही बैंक संबंधित खाते को होल्ड करेगा. फिर इस मामले की जांच पड़ताल की जाएगी. जांच के बाद 3 महीने के भीतर पीड़ित को रिफंड मिल सकता है.

➡️ क्यों पड़ी इस व्यवस्था की जरूरत?

दरअसल साइबर ठगी के मामलों में भरी इजाफा हुआ है. हालत ये है कि पुलिस ऐसे मुकदमों के बोझ तले दब गई है. पटना साइबर थाना में एक-एक IO (इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर) पर करीब 250 केस का बोझ है, जिनमें लगभग 80% मामले लंबित हैं।

➡️ छोटी रकम के कारण बड़ी परेशानी:

आंकड़ों के मुताबिक, करीब 60% साइबर ठगी के मामले 50 हजार रुपये से कम के होते हैं। छोटी रकम होने के कारण लोग कानूनी प्रक्रिया में नहीं पड़ते और पैसा छोड़ देते हैं।

.➡️ रिकवरी में हो रही देरी

साइबर ठगी का मामला सामने आने और FIR दर्ज होने के बाद भी ठगी के पैसे की रिकवरी नहीं हो रही. 2025 में पटना में 75 करोड़ रुपये की साइबर ठगी हुई, जिसमें से 19.90 करोड़ रुपये होल्ड किए गए, लेकिन सिर्फ 3.25 करोड़ रुपये ही वापस मिल सके.

➡️ जानिए कैसी है समस्या 

साइबर ठगी के मामलों का हाल जानने के लिए पटना के दो मामलों को जानिए. बोरिंग रोड के एक प्रेम रंजन नाम के व्यक्ति से 4.59 लाख रुपये की ठगी हुई। इसमें 1.50 लाख रुपये होल्ड किए गए, लेकिन पुलिस रिपोर्ट में देरी के कारण पीड़ित को पैसा वापस नहीं मिल सका.

वहीं, पटना के ही पटेल नगर के प्रेम कुमार से 65 हजार रुपये की ठगी हुई। 38 हजार रुपये होल्ड किए गए, लेकिन कोर्ट में पुलिस रिपोर्ट समय पर नहीं पहुंचने के कारण रिफंड अटका रहा।

➡️ अभी भी सावधानी की जरूरत

सरकार ने इस नई व्यवस्था के जरिए प्रक्रिया को आसान जरूर बनाया है, लेकिन सावधानी बरतना अब भी बेहद जरूरी है. इसके तहत ठगी के तुरंत बाद शिकायत करना अनिवार्य है ठगी के बाद के ‘गोल्डन ऑवर’ यानी शुरुआती 2 घंटे सबसे महत्वपूर्ण हैं. इसी दौरान शिकायत करें. देर होने पर ठग पैसे को कई खातों में ट्रांसफर कर देते हैं, जिससे रिकवरी मुश्किल हो जाती है

➡️ इन बातों का रखें ध्यान

साइबर ठगी की शिकायत करते समय सभी ट्रांजैक्शन डिटेल्स सही दें. बैंक से होल्ड रिपोर्ट लेना न भूलें. हर हालात में संदिग्ध कॉल, लिंक और ऐप से बचें.

नई व्यवस्था से साइबर ठगी के छोटे मामलों में पीड़ितों को बड़ी राहत मिलेगी. अब लंबी कानूनी प्रक्रिया से बचते हुए सीधे बैंक के माध्यम से पैसा वापस मिल सकेगा। हालांकि, समय पर शिकायत और सतर्कता ही इस व्यवस्था का सबसे अहम हिस्सा है.

स्रोत - बिहार झारखंड 22 अप्रैल 2026

इस प्रकार साइबर फ्रॉड के मामलों में, विशेषकर ₹50,000 तक की रकम के लिए, बैंक और सरकार की तरफ से एक बड़ी राहत देने वाली नई व्यवस्था (SOP) सामने आई है। मार्च-अप्रैल 2026 में जारी की गई रिपोर्टों के अनुसार, अब छोटे साइबर फ्रॉड में पीड़ितों को पुलिस स्टेशन या कोर्ट के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और बैंक द्वारा ही पैसा वापस मिलने की प्रक्रिया आसान कर दी गई है। 

इस नई व्यवस्था के मुख्य बिंदु और नियम इस प्रकार हैं:

1. 50,000 तक के फ्रॉड में क्या है नियम?

बिना FIR राहत: 50,000 रुपये से कम की साइबर ठगी के मामलों में, अब प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने या कोर्ट जाने की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है।

बैंक सीधे करेगा रिफंड: शिकायत सही पाए जाने पर, बैंक अपने स्तर पर ही जांच कर 90 दिनों (3 महीने) के भीतर पैसे की वापसी की प्रक्रिया पूरी करेगा।

नोडल अधिकारी की शक्ति: पुलिस के नोडल अधिकारी के पत्र के आधार पर ही बैंक फ्रीज की गई राशि को जारी कर देंगे। 

2. RBI के नए दिशानिर्देश (जुलाई 2026 से प्रभावी होने की उम्मीद)

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने छोटे डिजिटल फ्रॉड पीड़ितों के लिए एक नई मुआवजा नीति का मसौदा पेश किया है: 

मुआवजा (Compensation): यदि आप 50,000 रुपये तक के फ्रॉड का शिकार होते हैं, तो आपको 85% तक का मुआवजा या अधिकतम ₹25,000 (जो भी कम हो) मिल सकता है।

लाइफटाइम में एक बार: यह मुआवजा सुविधा एक ग्राहक को जीवन में केवल एक ही बार मिलेगी।

5 दिन की सीमा: मुआवजे के लिए फ्रॉड की रिपोर्ट 5 दिनों के भीतर बैंक और नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल (1930) को करनी होगी। 

3. रिफंड की प्रक्रिया क्या है?

तुरंत 1930 पर कॉल: ठगी होते ही तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें।

बैंक को सूचित करें: अपने बैंक के कस्टमर केयर या सीधे बैंक शाखा में लिखित शिकायत दें।

पोर्टल पर शिकायत: नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर अपनी शिकायत दर्ज करें।

दस्तावेज़: फ्रॉड से जुड़े ट्रांजैक्शन आईडी, बैंक स्टेटमेंट और स्क्रीनशॉट संभाल कर रखें। 

ध्यान देने वाली बातें

सुनहरा समय (Golden Hour): जितनी जल्दी आप रिपोर्ट (2-4 घंटे के भीतर) करेंगे, पैसा वापस मिलने की संभावना उतनी ही ज्यादा होगी।

बैंक की जवाबदेही: यदि फ्रॉड बैंक की लापरवाही या थर्ड पार्टी की गलती से हुआ है, तो ग्राहक की जिम्मेदारी शून्य (Zero Liability) होगी। 

ये नियम 2026 की नई रिपोर्टों और RBI के ड्राफ्ट नियमों पर आधारित हैं, जो डिजिटल सुरक्षा को बढ़ाने के लिए लाए गए हैं।

द्वारा 

शालिनी कौशिक 

एडवोकेट 

कैराना (शामली) 

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