4️⃣ साइबर विनियमन अपील अधिकरण (प्रक्रिया) नियम, 2000


(2) प्रत्यर्थी, आवेदक को या उसके अधिवक्ता को यदि कोई है उपनियम (1) में यथाउल्लिखित दस्तावेजों की प्रतियों सहित उत्तर की प्रति भी तामील होगा और ऐसी तामीली का सबूत रजिस्ट्रार को फाइल करेगा। अधिकरण, प्रत्यर्थी द्वारा आवेदन करने पर, एक मास की अवधि की समाप्ति के पश्चात्, उत्तर फाइल करने की अनुज्ञा दे सकेगा।

12. सुनवाई की तारीख और स्थान अधिसूचित किया जाए-अधिकरण, आवेदन की सुनवाई की तारीख और स्थान पक्षकारों को अधिसूचित करेगा।

13. अधिकरण की बैठक- अधिकरण, साधारणतया अपनी बैठकें नई दिल्ली में करेगा :

परन्तु यदि किसी समय अधिकरण के पीठासीन अधिकारी का यह समाधान हो जाता है कि ऐसी परिस्थितियां विद्यमान हैं जिनके कारण नई दिल्ली से भिन्न अन्य किसी स्थान में बैठक करना आवश्यक है तो पीठासीन अधिकारी किसी ऐसे समुचित स्थान पर बैठक करने का निदेश दे सकेगा।

14. आवेदनों पर विनिश्चय (1) अधिकरण, अंतरित मामलों की सुनवाई का एक कलेंडर तैयार करेगा और जहां तक संभव हो कलेंडर के अनुसार मामलों की सुनवाई और विनिश्चय करेगा।

(2) जहां तक संभव हो प्रत्येक आवेदन उसकी प्रस्तुतीकरण की तारीख के छह मास के भीतर सुना और विनिश्चित किया जाएगा।

(3) उपनियम (1) और उपनियम (2) के प्रयोजनों के लिए अधिकरण को स्थगन से इंकार करने और मौखिक बहस के लिए समय सीमित करने की शक्ति होगी।

15. आवेदक की चूक के लिए आवेदन पर कार्रवाई- (1) जहां आवेदन की सुनवाई के लिए नियत किसी तारीख पर या किसी अन्य ऐसी तारीख पर जिसको ऐसी सुनवाई स्थगित की जा सकेगी, जब आवेदक पर सुनवाई के लिए पुकार की जाए और आवेदक उपस्थित नहीं है तो अधिकरण अपने वितेकानुसार या तो चूक के लिए आवेदन खारिज कर सकेगा या उसे सुन सकेगा और गुणावगुण के आधार पर निर्णय कर सकेगा।

(2) जहां आवेदन, चूक के लिए खारिज कर दिया गया हो और आवेदक बाद में उपसंजात होता है और अधिकरण का समाधान करता है कि उसके उपस्थित न होने का पर्याप्त कारण था जब आवेदन पर सुनवाई के लिए पुकारा गया था तब अधिकरण आवेदन खारिज करने का आदेश अपास्त करते हुए आदेश करेगा और उसे प्रत्यावर्तित करेगा।

16. आवेदन पर एकपक्षीय सुनवाई - (1) जहां आवेदन की सुनवाई के लिए नियत तारीख पर या किसी अन्य तारीख पर जिसको ऐसी सुनवाई स्थगित की जा सकेगी, आवेदक उपस्थित होता है और प्रत्यर्थी उपस्थित नहीं होता है, जब आवेदन पर सुनवाई के लिए पुकार की जाए वहां अधिकरण अपने विवेकानुसार या तो उसे स्थगित कर सकेगा या सुनवाई करके आवेदन पर एकपक्षीय निर्णय दे सकेगा।

(2) जहां किसी आवेदन पर, प्रत्यर्थी या प्रत्यर्थियों के विरुद्ध एकपक्षीय सुनवाई हुई है वहां ऐसा प्रत्यर्थी या ऐसे प्रत्यर्थी अधिकरण को उस पर अपास्त आदेश के लिए आवेदन कर सकेंगे और यदि ऐसा प्रत्यर्थी या ऐसे प्रत्यर्थी अधिकरण का समाधान कर देते हैं कि सूचना की सम्यक् रूप से तामील नहीं हुई थी या उसे या उन्हें उपस्थित होने से किसी पर्याप्त कारण से रोका गया था जब सुनवाई के लिए आवेदन पर पुकार हुई थी, तब अधिकरण उसके या उनके विरुद्ध ऐसे निबंधनों पर जो वह ठीक समझे, एकपक्षीय सुनवाई को अपास्त करने का आदेश कर सकेगा और आवेदन पर कार्यवाही के लिए कोई दिन नियत करेगा :

परन्तु जहां आवेदन की एकपक्षीय सुनवाई ऐसे स्वरूप की है कि उसे केवल एक प्रत्यर्थी के विरुद्ध अपास्त नहीं किया जा सकता वहां वह सभी या उनमें के किसी प्रत्यर्थी के लिए भी अपास्त कर सकेगा :

परन्तु यह और कि अधिकरण केवल इस आधार पर कि सूचना की तामील में अनियमितता हुई है, किसी आवेदन की एकपक्षीय सुनवाई को अपास्त नहीं करेगा, यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि प्रत्यर्थी के पास सुनवाई की तारीख की सूचना की और उपस्थित होने और आवेदक के दावे का उत्तर देने का पर्याप्त समय था।

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