कोर्ट 2️⃣ मुंबई कोर्ट द्वारा साइबर अपराधी मिडिलमैन स्टूडेंट की जमानत याचिका खारिज

 


साइबर फ्रॉड मामले में मुंबई की एक कोर्ट ने 19 साल के स्टूडेंट की जमानत याचिका खारिज कर दी है। स्टूडेंट 12वीं क्लास में पढ़ता है और उसे 3.81 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड मामले में गिरफ्तार किया गया था। कोर्ट ने कहा कि साइबर क्राइम और डिजिटल फाइनेन्सियल फ्रॉड देशभर में बहुत तेजी से बढ़ रहा है और यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए खतरा है।

➡️ देश की अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर खतरा

सीबीआई ने एस पी कार्गो एंड कूरियर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड और उसके डायरेक्टर सुधीर पालंडे और अन्य लोगों के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज की थी। आरोप है कि इन लोगों ने प्राइवेट व्यक्तियों और फर्मों को 3.81 करोड़ रुपये का चूना लगाया। पैसा 2 जुलाई को 12 ट्रांजेक्शन के जरिए एक म्यूल अकाउंट में एक ही दिन में ट्रांसफर किया गया था। अदालत ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि साइबर क्राइम और डिजिटल फाइनेन्सियल फ्रॉड देश में तेजी से बढ़ रहा है और यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक गंभीर खतरा है। स्पेशल जज जे पी दरेकर ने शुक्रवार को अपने आदेश में कहा कि यह जरूरी है कि अपराध की जटिलता को समझा जाए और इसमें इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, सूचना और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल शामिल है जो कि डिजिटल सबूत हैं।

➡️ स्टूडेंट ने मिडिलमैन का किया काम

सीबीआई ने 9 जुलाई को स्टूडेंट यश ठाकुर को गिरफ्तार किया था। उस पर आरोप है कि उसने साइबर फ्रॉड करने वालों और मुख्य आरोपी पालंडे के बीच मिडिलमैन का काम किया था। सीबीआई का कहना है कि स्टूडेंट ने मुख्य आरोपी पालंडे के नागपुर में रहने और यात्रा करने के लिए टिकट बुक कराए थे। उसने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उसे सिम कार्ड दिलाने में भी मदद की थी। ठाकुर ने जमानत याचिका में कहा था कि वह पालंडे को नहीं जानता। उसने कहा कि उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं है कि उसे फ्रॉड से कोई फायदा हुआ है। उसने यह भी कहा कि वह एक युवा लड़का है और अपनी पढ़ाई कर रहा है।

➡️ सबूतों से हो सकती है छेड़छाड़

कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने जो सबूत इकट्ठा किए हैं, वे डिजिटल/इलेक्ट्रॉनिक प्रकृति के हैं। अपराध में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल किया गया है। कोर्ट ने कहा कि अभी तक मुख्य आरोपी का पता नहीं चल पाया है। अपराध करने में मोबाइल, टेक्नोलॉजी और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के इस्तेमाल को देखते हुए, आरोपी के भागने, सबूतों से छेड़छाड़ करने और गवाहों को प्रभावित करने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने पिछले हफ्ते एक और स्टूडेंट शौर्य सिंह (23) की याचिका भी खारिज कर दी थी।

स्रोत - नवभारत टाइम्स 28 जुलाई 2025

     साइबर क्राइम को लेकर कोर्ट बहुत सख्त है और वह किसी भी हालत में अपराधियों को बख्शने के मूड में नहीं है और हालिया निर्णय कोर्ट के इसी रवैये को जाहिर कर रहे हैं. 

द्वारा 

शालिनी कौशिक 

एडवोकेट 

कैराना (शामली) 

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