साइबर ठगी में नाम 5️⃣ गुलशन कुमार व करण कसेरा(इलेक्ट्रिशियन और दुकानदार वाला साइबर गैंग)



यूपी के कानपुर में साइबर ठगी करने वाले गैंग को पुलिस ने पकड़ा तो यह देखकर हैरानी हुई कि यह गैंग एक मोची के खाते में 80 करोड़ का टर्नओवर कर चुका था. इस एक ही खाते से 656 बार साइबर ठगी की रकम का इस्तेमाल किया गया. कानपुर पुलिस ने गैंग के जिन दो सदस्यों को पकड़ा है, उसमें एक इलेक्ट्रिशियन है, वहीं दूसरा ऑटो पार्ट की दुकान चलाता है.

कानपुर में साइबर अपराधियों के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, जिसने ठगी के नए और हैरान कर देने वाले तरीके का इस्तेमाल किया. पुलिस ने इस गैंग के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है- एक पेशे से इलेक्ट्रिशियन है और दूसरा ऑटो पार्ट्स का दुकानदार.

➡️ मोची के बैंक खाते से 80 करोड़ का टर्न ओवर - 

लेकिन इस पूरे मामले में चौंकाने वाली बात यह है कि इस गिरोह ने एक मोची के बैंक खाते को अपने ट्रांजेक्शन हब के रूप में इस्तेमाल किया, जिसमें करीब 80 करोड़ रुपये का टर्नओवर हुआ.

➡️ शेयर ट्रेडिंग इन्वेस्टमेंट का लिंक - 

मामले की शुरुआत तब हुई, जब कानपुर के दवा कारोबारी अमित राठौर ने जनवरी 2026 में शिकायत दर्ज कराई. उन्होंने बताया कि उन्हें एक लिंक के जरिए शेयर ट्रेडिंग में इनवेस्टमेंट का लालच दिया गया और इसी झांसे में आकर उन्होंने 13 लाख रुपये गंवा दिए. शिकायत के बाद पुलिस ने जब इस मामले की जांच शुरू की, तो एक ऐसा खुलासा हुआ जिसने सभी को हैरान कर दिया.

➡️ मोची का बैंक खाता - 656 साइबर ठगी - 

जांच के दौरान जिस बैंक खाते में ठगी की रकम ट्रांसफर हुई थी, वह अजय नाम के व्यक्ति का था. अजय पेशे से मोची था और दिल्ली के नेशनल अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक में उसका खाता था. पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इस एक ही खाते से 656 साइबर ठगी की शिकायतें जुड़ी हुई थीं.

➡️ उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से 26 करोड़ रुपये ट्रांसफ़र - 

आगे की जांच में पता चला कि इस खाते में सिर्फ एक-दो नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से ठगी के करीब 26 करोड़ रुपये ट्रांसफर हुए थे. यह रकम अलग-अलग लोगों से ऑनलाइन धोखाधड़ी कर हासिल की गई थी. खास बात यह रही कि यह पैसा सीधे इस खाते में नहीं आता था, बल्कि कई बैंक खातों के जरिए घुमाकर यहां पहुंचाया जाता था, जिससे जांच एजेंसियों को भ्रमित किया जा सके.

➡️ गुलशन इलेक्ट्रिशियन, करण दुकानदार -

इस पूरे नेटवर्क को पकड़ने के लिए पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के नेतृत्व में एक स्पेशल टीम बनाई गई. टीम ने तकनीकी सर्विलांस और बैंकिंग ट्रेल की मदद से इस गैंग की कड़ियों को जोड़ना शुरू किया. इसी दौरान गुलशन और करण नाम के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. पूछताछ में सामने आया कि गुलशन इलेक्ट्रिशियन है, जबकि करण ऑटो पार्ट्स की दुकान चलाता है. दोनों ही इस साइबर ठगी गैंग के सदस्य थे और खातों के जरिए पैसे के लेन-देन को संभालते थे.

➡️ 60-40 का फार्मूला - 

पुलिस के मुताबिक, इस गैंग का काम करने का तरीका बेहद शातिर था. ये लोग आम लोगों को लालच देकर उनके बैंक खाते इस्तेमाल करने के लिए तैयार करते थे. इसके बदले में 60-40 का फॉर्मूला अपनाया जाता था- यानी एक लाख रुपये में से 40 हजार रुपये गैंग अपने पास रखता था और 60 हजार रुपये खाते के मालिक को दे देता था. इस तरह कई खातों के जरिए ठगी की रकम को क्लीन किया जाता था.

➡️ गैंग का नेटवर्क पड़ोसी देश में भी - 

जांच में यह भी सामने आया कि इस गैंग का नेटवर्क सिर्फ उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था, बल्कि यह पड़ोसी देशों तक फैला हुआ था. हालांकि, पुलिस ने अभी तक इस गैंग के मास्टरमाइंड का नाम उजागर नहीं किया है. अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इस पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा.

➡️ मोची पहले गिरफ्तार - 

इस मामले में एक और अहम जानकारी यह सामने आई कि अजय नाम का मोची, जिसके खाते का इस्तेमाल किया गया, उसे दिल्ली पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है. उसके बाद कानपुर पुलिस ने इस गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंच बनाई. पुलिस ने आरोपियों के पास से कई चेकबुक, एटीएम कार्ड और महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं. 

➡️ कानपुर पुलिस की अपील - 

पुलिस का कहना है कि इस तरह के मामलों में लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है. किसी भी अनजान लिंक, इनवेस्टमेंट ऑफर या संदिग्ध कॉल पर भरोसा करने से बचना चाहिए. फिलहाल, पुलिस इस गिरोह के बाकी सदस्यों और मास्टरमाइंड की तलाश में जुटी है.

स्रोत - आज तक न्यूज 19 अप्रैल 2026 

इस प्रकार आज तक न्यूज और अन्य वेबसाइट से प्राप्त जानकारी के अनुसार पूरे मामले का सार यह है - 

➡️ इलेक्ट्रिशियन और दुकानदार वाले साइबर गैंग की कहानी-

 कानपुर (उत्तर प्रदेश) से सामने आया एक बड़ा साइबर फ्रॉड घोटाला है, जिसमें एक बिजली मिस्त्री (electrician) और ऑटो पार्ट्स दुकानदार ने मिलकर लगभग 80 करोड़ रुपये की साइबर ठगी को अंजाम दिया। यह गैंग लोगों को शेयर ट्रेडिंग और ऑनलाइन निवेश के नाम पर लूटता था। 

➡️ गिरोह की पूरी कहानी - 

1️⃣ गैंग का पर्दाफाश और अपराधी:

✒️ मुख्य आरोपी:

कानपुर पुलिस ने दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिसमें एक पेशे से बिजली मिस्त्री है और दूसरा ऑटो पार्ट्स की दुकान चलाता है। अप्रैल 2026 की नवीनतम रिपोर्टों के अनुसार, गुलशन कुमार और करण कसेरा कथित तौर पर ललित मोंगा द्वारा संचालित एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह के प्रमुख सदस्य हैं। इन आरोपियों से पूछताछ की जा रही है ताकि फरार सरगना ललित मोंगा और गिरोह के अन्य नेटवर्क का पता लगाया जा सके। 

1️⃣ करण कसेरा (Karan Kasera): इन्हें गिरोह में 'डिजिटल किंग' के रूप में जाना जाता है। पुलिस जांच के अनुसार, वह दिल्ली में एक बैंक खाते का संचालन कर रहा था जहाँ ठगी की गई भारी रकम जमा की जाती थी।

2️⃣ गुलशन कुमार (Gulshan Kumar): इसे गिरोह में 'कैरा' के नाम से भी जाना जाता है और यह करण कसेरा का प्रमुख सहयोगी है।

✒️ मोडस ऑपरेंडी (तरीका): ये लोग 'श्रद्धा शक्ति' (Shraddha Shakti) और 'लिटिल मोंगा' (Little Monga) जैसे फर्जी वॉट्सऐप और टेलीग्राम ग्रुप्स का इस्तेमाल करते थे। लोगों को 2 से 5 गुना रिटर्न का लालच देकर शेयर ट्रेडिंग के नाम पर फंसाया जाता था। 

2️⃣ मोची का खाता और 80 करोड़ का टर्नओवर:

✒️ इस कहानी का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि गैंग ने पैसों के ट्रांजैक्शन के लिए एक मोची (shoemaker) के बैंक खाते का इस्तेमाल किया।

✒️ पुलिस के मुताबिक, इस एक ही मोची के खाते में पिछले तीन महीनों में 80 करोड़ रुपये का टर्नओवर हुआ।

✒️ पंजाब कनेक्शन: कानपुर पुलिस ने 18-19 अप्रैल 2026 को शेयर ट्रेडिंग के नाम पर 80 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने वाले गिरोह के दो सदस्यों, करण कसेरा और गुलशन कुमार को पंजाब के अबोहर से गिरफ्तार किया। ये लोग कानपुर के एक मोची (अजय कुमार) के नाम पर फर्जी करंट अकाउंट (एके ट्रेडर्स) बनाकर ठगी का पैसा ट्रांसफर करते थे। इस मामले में दिल्ली के अजय नाम के आरोपी के खाते में 3 महीने में 80 करोड़ के लेनदेन की बात सामने आई।

✒️ इस खाते से 656 बार साइबर ठगी की रकम का इस्तेमाल किया गया, जिसे बाद में अलग-अलग लेयर्स (layers) में ट्रांसफर कर दिया जाता था ताकि पुलिस पकड़ न सके। 

✒️ गैंग ने दिल्ली और अन्य जगहों से भी फर्जी खाते अरेंज किए थे।

✒️ ठगी की रकम को तेजी से कैश विड्रॉल (cash withdrawal) किया जाता था, या उसे कई खातों के माध्यम से घुमाया जाता था, जिससे 13 करोड़ रुपये से अधिक की रकम को पुलिस ने फ्रीज कर दिया है। 

✒️ मामले का खुलासा तब हुआ जब कानपुर के एक दवा व्यापारी अमित राठौर ने जनवरी 2026 में 12.82 लाख रुपये की ठगी की शिकायत दर्ज कराई। 

✒️ इस गिरोह के तार अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े होने की आशंका है। 

✒️ पुलिस ने इस गैंग के सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है और उनके पास से बड़ी संख्या में मोबाइल, सिम कार्ड, और एटीएम कार्ड बरामद किए हैं। 

     डिजिटल क्रांति की बारीकियों से परिचित ये युवा आज अपने ज्ञान का दुरुपयोग कर हमको और आपको साइबर क्राइम का शिकार बना रहे हैं. हमें कुछ खास नहीं करना है केवल सतर्क रहना है और सरकार और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करना है, तब ही हम खुद को इस अपराध का शिकार बनने से बचा पाएंगे. अपनी समस्या हमे बताएं साथ ही कोई भी साइबर क्राइम की जानकारी आपको प्राप्त हो और आपके बीच के ही किसी ने साइबर अपराध का समझदारी से सामना किया हो तो वह भी हमें ब्लॉग पोस्ट या vlog @cybershalini के कमेंट सेक्शन में टिप्पणी कर सूचित करें, आपके सुझावों की प्रतीक्षा रहेगी.

सतर्क रहें सुरक्षित रहेंगे 👍

धन्यवाद 🙏

द्वारा 

शालिनी कौशिक 

एडवोकेट 

कैराना (शामली) 


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