डिजिटल अरेस्ट 6️⃣ ट्राई अधिकारी बनकर बुजुर्ग का डिजिटल अरेस्ट



चेन्‍नई के रहने वाले 81 वर्षीय साल के बुजुर्ग के साथ 2.27 करोड़ रुपये की ऑनलाइन धोखाधड़ी हुई है। उन्‍हें डिजिटल अरेस्‍ट बनाकर पैसे हड़प लिए गए। ऐसा करने के लिए आरोपियों ने बुजुर्ग को वर्चुअल कोर्ट में पेश किया है। उस नकली कोर्ट में सबकुछ फ्राॅड था। बुजुर्ग के साथ उनकी पत्‍नी भी शिकार हुईं। दोनों करीब डेढ़ महीने तक साइबर अपराधियों के चंगुल में फंसे रहे।

ट्राई अधिकारी बनकर कॉल

डीटीनेक्‍स्‍ट की रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला मार्च के मध्‍य से अप्रैल के आखिरी सप्‍ताह तक अंजाम दिया गया। बुजुर्ग ने अपने जीवनभर की कमाई गंवा दी। पीड़‍ित को 15 मार्च को एक कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को ट्राई का अधिकारी बताया। दावा किया कि उनके आधार कार्ड से केनरा बैंक में अकाउंट खोला गया है। शुरुआत में बुजुर्ग आरोपियों की भाषा नहीं समझ पा रहे थे, क्‍योंकि आरोपी हिंदी में बात कर रहे थे।

⚫ तमिल बोलने वाले ने लिया भरोसे में

उसके बाद तमिल बोलने वाला एक शख्‍स कॉल पर जुड़ा और बुजुर्ग को इस भरोसे में लिया कि उनके आधार कार्ड से केनरा बैंक में अकाउंट खोला गया है। बुजुर्ग से कहा कि उनका केस राष्‍ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए किसी को भी इस बारे में ना बताएं। आरोपियों ने बुजुर्ग को यह यकीन दिला दिया कि गलती बुजुर्ग की तरफ से हुई है।

मांगी पैसों की जानकारी

आरोपियों ने बुजुर्ग से जानकारी मांगी कि उनके पास सभी बैंक अकाउंट्स में कितना पैसा है। बुजुर्ग को यह कहकर डराया गया कि वह और उनकी पत्‍नी निगरानी में हैं। उन्‍हें घर से बाहर जाने की इजाजत नहीं है और किसी से भी इस बारे में बात नहीं करनी चाहिए। इसके बाद आरोपियों ने उनसे 59 लाख रुपये एक अकाउंट में ट्रांसफर करवाए। फ‍िर ऑनलाइन एक अदालत में शामिल होने का आदेश दिया गया। बुजुर्ग और उनकी पत्‍नी डिजिटल कोर्ट में पेश हुए। उस कोर्ट में नकली जज की एंट्री कराई गई। बुजुर्ग से कहा कि उन्‍हें उनकी पत्‍नी के साथ 7 दिनों की सीबीआई हिरासत में डिजिटल अरेस्‍ट रखा जाएगा। इस पूरे मामले पर चुप रहने के लिए कहा गया।

एफडी तक तुड़वा दीं

इसके बाद सिलसिलेवार तरीके से बुजुर्ग से पैसे हड़पे गए। उनकी एफडी तक तुड़वा दी गईं और सारी रकम कुछ-कुछ हिस्‍सों में ट्रांसफर करवाई गई। कुल मिलाकर बुजुर्ग ने 2.27 करोड़ ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद भी उन्‍हें परेशान करने की कोशिश हुई। बुजुर्ग से कहा गया कि वह अपनी बेटी और बेटों से पैसों का इंतजाम करवाएं। यहां तक कि बुजुर्ग से उनकी प्रॉपर्टी तक बेचने के लिए कह दिया गया। एक दिन बुजुर्ग ने अपने दामाद को कॉल करके बुलाया और उसके बाद मामले का खुलासा हुआ। अब इस मामले की जांच की जा रही है।

स्रोत - 16 जून 2025 नवभारत टाइम्स

➡️ साइबर विशेषज्ञों की सलाह - सावधानी बरतें

⚫ इस तरह के मामलों से बचने के लिए भारत सरकार के National Cyber Crime Reporting Portal पर सलाह दी जाती है कि:

✒️ पुलिस कभी वीडियो कॉल पर अरेस्ट नहीं करती: कोई भी आधिकारिक जांच एजेंसी (CBI, ED, या पुलिस) वीडियो कॉल के जरिए किसी को 'डिजिटल अरेस्ट' नहीं करती है।

✒️ पैसे ट्रांसफर न करें: यदि कोई अधिकारी बनकर रुपयों की मांग करे, तो तुरंत सावधान हो जाएं।

✒️ हेल्पलाइन: किसी भी साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत 1930 पर कॉल करें।

इस तरह डिजिटल अरेस्ट आज एक स्कैम मात्र न रहकर भारतीय पुलिस प्रशासन के लिए एक सिरदर्द बन चुका है. डिजिटल अरेस्ट कर न केवल सामान्य नागरिक बल्कि बड़े बड़े रिटायर्ड अधिकारी, रिटायर्ड बुजुर्ग प्रशासनिक अधिकारी, वकील, रिटायर्ड जज, शिक्षक,पत्रकार आदि लगभग सभी इसके शिकार बनाये जा रहे हैं. सबसे बड़े अपराध के रूप में आज डिजिटल अरेस्ट आज इसलिए चिंता पैदा कर रहा है कि इसमें बड़े बड़े सरकारी, प्रशासनिक अधिकारियों के साथ साथ साइबर अपराधी सुप्रीम कोर्ट के फर्जी आदेशों से भी जनता को शिकार बना रहे हैं सरकार ने इसके लिए संचार साथी,अमिताभ बच्चन कॉलर ट्यून, जीरो एफ आई आर आदि बहुत सी तैयारियां की हैँ और अभी हाल ही में सीबीआई ने "अभय" चैटबाट लॉन्च किया है ताकि फ़र्ज़ी मैसेज और समन की जांच की जा सके किन्तु सबसे बड़ी जरुरत जन जागरूकता की है. जनता जितना सतर्क रहेगी, उतनी ही सुरक्षित रहेगी. डिजिटल अरेस्ट के बड़े केसेस के बारे में जानने के लिए जुड़े रहिये हमारे ब्लॉग और चैनल से.

सतर्क रहिये- सुरक्षित रहेंगे.

धन्यवाद 🙏🙏

द्वारा

शालिनी कौशिक

एडवोकेट

कैराना (शामली)

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