साइबर ठगों के हथियार 5️⃣ आइरिस स्कैन कर साइबर ठगी


( आइरिस स्कैन कर साइबर ठगी  )

साइबर ठगी का एक नया तरीका इज़ाद कर साइबर ठगों ने साइबर ठगी को अंजाम दिया है. साइबर ठग अब ठगी करने के लिए नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं। पहले साइबर ठग फिंगरप्रिंट के जरिये ठगी करते थे और अब ताजा घटनाक्रम में आइरिस स्कैन (आंख की पुतली का स्कैन) कर एक महिला के बैंक खाते से किसान निधि के 10 हजार रुपये उड़ा लिए । रमकंडा में साइबर ठगों ने एक महिला के खाते से आइरिस स्कैन कर 10 हजार रुपये उड़ा लिए। पीएम किसान योजना के नाम पर महिला से आधार कार्ड लेकर उसकी आंख स्कैन की गई। 

  गढ़वा जिले के रमकंडा प्रखंड के बिराजपुर गांव में ठगी के सनसनीखेज मामले में गांव के स्वर्गीय जगनारायण सिंह की पत्नी कालो देवी को पीएम किसान योजना का लाभ दिलाने के बहाने एक अनजान युवक गांव पहुंचा और उससे आधार कार्ड मांगा और इसी घटनाक्रम में वह अज्ञात ठगों का शिकार हो गई। 

महिला के अनुसार, उसने अनजान युवक द्वारा पी एम किसान योजना का लाभ दिलाने के नाम पर जब उससे आधार कार्ड माँगा तो महिला ने उसे अपना आधार कार्ड दे दिया, फिर उस अनजान युवक ने महिला को खड़ा कर उसकी आंख की पुतली का फोटो लिया, जिसके बारे में उसे बाद में पता चला कि उसे आइरिस स्कैन कहते हैँ. इसी प्रक्रिया के जरिए ठग ने उनके बैंक खाते से नौ हजार नौ सौ रुपये की निकासी कर ली। जाते-जाते युवक ने महिला को आधार कार्ड लौटाते हुए पंचायत भवन पर अपने कागजात लेकर पहुंचने की बात कही।

युवक के कहे अनुसार महिला सीएसपी से पैसे निकालने गई, तब उसे अपने साथ हुई धोखाधड़ी का पता चला. 

➡️ आइरिस स्कैन--

आइरिस स्कैन एक बायोमेट्रिक पहचान तकनीक है जो किसी व्यक्ति की आँखों के आइरिस (पुतली के चारों ओर का रंगीन हिस्सा) के अद्वितीय पैटर्न का उपयोग करती है, यह एक हाई-रेसोल्यूशन इन्फ्रारेड कैमरा और जटिल गणितीय पैटर्न-पहचान एल्गोरिदम के ज़रिये किया जाता है. यह प्रक्रिया एक व्यक्ति के आइरिस के बारीक, स्थिर और अद्वितीय पैटर्न की एक छवि लेती है, फिर उसे एक 'आइरिस कोड' में बदल देती है, जो उच्च सटीकता के साथ व्यक्ति की पहचान और सत्यापन के लिए उपयोग किया जाता है. 

➡️ यह कैसे काम करता है--

1️⃣. आँखों की तस्वीर लेना:

एक विशेष आइरिस स्कैनर निकट-अवरक्त प्रकाश (near-infrared light) का उपयोग करके आपकी आँख की एक बहुत ही स्पष्ट और उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाली तस्वीर लेता है. 

2️⃣. आइरिस पैटर्न की पहचान:

यह इन्फ्रारेड प्रकाश आइरिस के मेलेनिन (त्वचा और बालों के रंगद्रव्य) को पारदर्शी बनाता है, जिससे आँख के रंग की परवाह किए बिना उसके जटिल पैटर्न स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं. 

3️⃣. गणितीय विश्लेषण:

एक 'पहचान एल्गोरिदम' इन पैटर्न का विश्लेषण करता है, आइरिस की रूपरेखा का पता लगाता है और इसके लगभग 256 विशिष्ट गुणों को निकालता है. 

4️⃣. 'आइरिस कोड' का निर्माण:

इस निकाले गए डेटा को एक विशिष्ट संख्यात्मक कोड में परिवर्तित किया जाता है, जिसे 'आइरिस कोड' कहते हैं. 

5️⃣. सत्यापन:

इस आइरिस कोड की तुलना पहले से संग्रहीत टेम्पलेट से की जाती है ताकि यह सत्यापित किया जा सके कि आप वही व्यक्ति हैं जो आप होने का दावा करते हैं. 

✒️ उपयोग और लाभ

✒️ उच्च सटीकता:

आइरिस पैटर्न हर व्यक्ति के लिए अद्वितीय होता है और यह पूरे जीवनकाल में लगभग अपरिवर्तित रहता है, जिससे यह अत्यधिक विश्वसनीय और सटीक पहचान विधि बन जाती है. 

✒️ अनुप्रयोग:

इसका उपयोग हवाई अड्डों पर सीमा नियंत्रण, प्रवेश नियंत्रण, स्मार्टफ़ोन अनलॉक करने और अन्य उच्च-सुरक्षा वाले अनुप्रयोगों में किया जाता है. 

✒️ धोखाधड़ी से सुरक्षा:

यह उच्च स्तर की सुरक्षा प्रदान करता है और धोखाधड़ी के जोखिम को बहुत कम करता है.

➡️ आइरिस स्कैन से साइबर ठगी से बचाव के उपाय-

✒️ किसी भी अनजान व्यक्ति को निजी दस्तावेज न सौंपें.

✒️  संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को दें.

सतर्क रहें-सुरक्षित रहें.👍

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धन्यवाद 🙏🙏

द्वारा

शालिनी कौशिक

एडवोकेट

कैराना (शामली)

 



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