साइबर फ़्रॉड़ से सदमे में जिंदगी -1️⃣


बिहार के पूसा स्थित एग्रीकल्चर कॉलेज के सेवानिवृत्त प्रोफेसर शहर की विख्यात महिला चिकित्सक डॉ. मंजू जायसवाल के भाई डॉ. मुकेश प्रसाद सिंह (71) को साइबर ठगी का ऐसा सदमा लगा कि थाने में शिकायत लिखते-लिखते उन्हें हार्ट अटैक आ गया और उनकी मौत हो गई। वह शहर की मशहूर महिला चिकित्सक डॉ. मंजू जायसवाल के भाई थे। 

23 अक्तूबर 2025 को उनके खाते से 25 लाख रुपये की साइबर ठगी हुई थी। उसी दिन मुकेश प्रसाद नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत करने के बाद अगले दिन शुक्रवार को साइबर थाने में एफआईआर दर्ज करवाने गए। आवेदन लिखने के दौरान ही उन्हें हार्ट अटैक आया और आधा लिखा आवेदन थाने में ही पड़ा रह गया। गंभीर स्थिति में मुकेश प्रसाद को पहले सदर अस्पताल फिर जूरन छपरा के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। काजी मोहम्मदपुर थाना के नयाटोला स्थित शांति सदन से अंतिम संस्कार के लिए उनके दरवाजे से शव उठा तो परिवार में कोहराम मच गया। तीन भाइयों में डॉ. मुकेश सबसे छोटे थे, मूल रूप से खगड़िया जिले के महेशखूंट के रहने वाले थे.

प्रोफेसर मुकेश प्रसाद थाने में अपना आधा आवेदन ही लिख पाए, माना जा रहा है कि प्रोफेसर के दिल दिमाग़ पर साइबर ठगी का इतना गहरा असर पड़ा कि साइबर ठगी के शिकार सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. मुकेश प्रसाद सिंह थाने पर आधा ही आवेदन लिख पाए थे कि उन्हें हार्ट अटैक आ गया। 

प्रोफेसर की बहन प्रसिद्ध महिला चिकित्सक डॉ. मंजू जायसवाल के शब्दों में-

" भाई मुकेश का पंजाब नेशनल बैंक में खाता था। उसी में रिटायरमेंट के पैसे थे। पांच बार में पांच-पांच लाख रुपये कर साइबर शातिरों ने उनके खाते से निकासी की है। अधूरे आवेदन से ऐसा लगता है कि भाई मोबाइल बैंकिंग एप इंस्टॉल करना चाहते थे। इसके लिए ऑनलाइन की कोशिश की होगी। बैंक से मिलता जुलता फिशिंग साइट के जरिये साइबर शातिरों ने उन्हें फांसा होगा। एप इंस्टॉल करने को एपीके फाइल भेजा होगा, जिससे मोबाइल हैक हो गया होगा। इसके बाद गोरिंस, मो. आसिफ समेत अन्य खातों में रुपये भेजे गए हैं। पूरा ब्योरा साइबर थाने को दिया गया है। भाई ने आवेदन में लिखा था- 'सूचित करना है कि मेरे खाते से 25 लाख रुपये की धोखाधड़ी हो गई है। सर्व प्रथम 22 अक्टूबर को व्हाट्सएप पर एक अंजान नंबर से एपीके फाइल भेजी गई थी। जिस पर मेरे द्वारा पीएनबी मोबाइल एप के लिए पूरा डिटेल भरा गया।' ... बस, वह इतना ही लिख पाए थे कि अटैक आ गया।"

 तीन भाइयों में सबसे छोटे मुकेश के बड़े भाई मधुसूदन प्रसाद रिटायर्ड डीआईजी हैं। मंझले भाई मनोरंजन जायसवाल व्यवसायी हैं। डॉ. मुकेश कुमार छह साल पहले 2019 में सेवानिवृत हुए थे. उनका एक मात्र पुत्र अतिंद्र कुमार नोएडा में एक कंपनी में इंजीनियर हैं। वे मूल रूप से खगड़िया जिले के महेशखूंट के रहने वाले थे। इनके पिता डॉ. सहदेव प्रसाद और माता डॉ. शांति सिंह शहर के मशहूर चिकित्सक थे।

       साइबर फ़्रॉड़ ने आज आम जिंदगी को हिलाकर रख दिया है. एक तरफ आज सब कुछ डिजिटल होता जा रहा है जिसका फायदा भी बहुत है पहले घर से बाहर निकलते समय बहुत सारे रूपये साथ रखने पड़ते थे, जिनके कारण न केवल लुटने का डर बना रहता था बल्कि बहुत सी बार जान से भी हाथ धोना पड़ता था, फिर ये डिजिटल क्रांति आई पर साइबर फ़्रॉड के कारण ये डिजिटल क्रांति और भी खतरनाक साबित हो रही है, ये डिजिटल क्रांति ही आम जनता की जीवन भर की मेहनत की कमाई को सेकंड में शातिर साइबर अपराधियों के हाथ में पहुँचाने में तो मददगार हो ही रही है, साथ ही, अपनी जीवन भर की कमाई अपनी ही एक छोटी सी नासमझी से गँवाने के दुख के कारण खुद ही उन्हें मौत के मुंह में धकेल रही है.

समाचार का स्रोत-👇आभार 🙏

हिंदुस्तान 

26 अक्टूबर 2025 

द्वारा

शालिनी कौशिक

एडवोकेट

कैराना (शामली)


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