साइबर अपराध 9️⃣ जूस जैकिंग


आज हम आपको बताने जा रहे हैँ एक ऐसे साइबर क्राइम के बारे में जिसके शिकार आप आये दिन अपनी मर्जी से, भले ही नासमझी से बनते रहते हैँ और जिसके बारे में जानते ही आप कहने वाले हैं OMG, हद्द हो गई, ये भी साइबर क्राइम-साइबर धोखाधड़ी निकला.

 मोबाइल चार्जर साइबर धोखाधड़ी का एक रूप है जिसे "जूस जैकिंग" कहा जाता है। सार्वजनिक जगहों पर, जैसे हवाई अड्डों या होटलों में, USB पोर्ट से डिवाइस को चार्ज करते समय यह घोटाला होता है। इसमें साइबर अपराधी सार्वजनिक USB चार्जिंग पोर्ट में मैलवेयर डालकर आपके डिवाइस को संक्रमित करते हैं, जिससे आपके व्यक्तिगत डेटा और पासवर्ड चुराए जा सकते हैं। इसके अलावा, नकली चार्जर का उपयोग करने से आग लगने या बिजली के झटके लगने का खतरा हो सकता है। 

➡️ जूस जैकिंग क्या है: 

जूस जैकिंग एक साइबर हमला है जिसमें सार्वजनिक USB चार्जिंग स्टेशन पर हमलावर आपके डिवाइस में मैलवेयर इंस्टॉल कर सकते हैं या डेटा चुरा सकते हैं। जब आप अपना फ़ोन या लैपटॉप ऐसे संक्रमित USB पोर्ट में लगाते हैं, तो हमलावर आपके डिवाइस से व्यक्तिगत जानकारी चुरा सकते हैं, डिवाइस को लॉक कर सकते हैं, या मैलवेयर डाल सकते हैं। 

➡️ जूस जैकिंग कैसे काम करता है-

🌑 सार्वजनिक चार्जिंग पॉइंट:

 हमलावर हवाई अड्डों, मॉल, होटलों, और पुस्तकालयों जैसे सार्वजनिक स्थानों पर चार्जिंग स्टेशनों से छेड़छाड़ करते हैं।

🌑 संक्रमित USB पोर्ट:

 वे जानबूझकर USB पोर्ट में मैलवेयर या विशेष हार्डवेयर डालते हैं।

🌑 डेटा ट्रांसफर

जब आप अपना डिवाइस चार्ज करने के लिए उस पोर्ट से कनेक्ट करते हैं, तो डेटा का ट्रांसफर मैलवेयर के माध्यम से हो जाता है।

🌑 लक्ष्य

इस मैलवेयर का लक्ष्य आपके व्यक्तिगत डेटा को चुराना, आपकी अनुमति के बिना आपके डिवाइस को लॉक करना या मैलवेयर इंस्टॉल करना होता है।

➡️ जूस जैकिंग कैसे होता है: 

अपराधी ऐसे चार्जिंग पोर्ट में मैलवेयर डाल सकते हैं जो डेटा ट्रांसफर भी कर सकते हैं।

➡️ जूस जैकिंग से क्या-क्या हो सकता है:

1️⃣ आपकी वित्तीय जानकारी चोरी हो सकती है।

2️⃣ आपकी पहचान चोरी हो सकती है।

3️⃣ आपके डिवाइस पर मैलवेयर इंस्टॉल हो सकता है। 

4️⃣ मैलवेयर आपके डिवाइस को लॉक कर सकता है या आपके निजी डेटा और पासवर्ड को सीधे हैकर को भेज सकता है। 

➡️ जूस जैकिंग से बचने के तरीके- 

✒️ सार्वजनिक USB पोर्ट के बजाय अपने पावर आउटलेट का उपयोग करके अपने चार्जर से डिवाइस को चार्ज करें।

✒️ सार्वजनिक USB पोर्ट का उपयोग करने की आवश्यकता होने पर, अपने स्वयं के पावर बैंक का उपयोग करें।

✒️ अपने डिवाइस को लॉक रखें और अपनी सुरक्षा अनुमति को ध्यान से पढ़ें।

✒️ यदि आप सार्वजनिक USB पोर्ट का उपयोग करने के लिए मजबूर हैं, तो "केवल पावर" केबल का उपयोग करने पर विचार करें, जो डेटा ट्रांसफर को रोकते हैं।

✒️ सार्वजनिक USB पोर्ट के बजाय हमेशा अपने AC एडॉप्टर या कार चार्जर का उपयोग करें।

✒️ यात्रा करते समय एक पावर बैंक साथ रखें।

🌑 आपके चार्जर का सार्वजनिक इस्तेमाल गलत है-

दफ्तरों, घरों या सार्वजनिक जगहों पर चार्जर शेयर करना लगभग एक सामाजिक चलन है। हालाँकि, दूसरों द्वारा बार-बार इस्तेमाल करने से आपके चार्जर पर दबाव पड़ सकता है जिससे उसे नुकसान पहुँच सकता है । शारीरिक क्षति के अलावा, चार्जर उपकरणों के बीच मैलवेयर भी फैला सकते हैं, जो एक ऐसा जोखिम है जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए।

🌑 फोन चार्जर शेयर करना सेफ नहीं है-

 यह वास्तव में आपके फोन को चार्ज करेगा, लेकिन यह या तो आपके फोन पर मैलवेयर इंस्टॉल कर देगा या आपके फोन या अन्य मोबाइल डिवाइस से डेटा चुरा लेगा ।

🌑  फोन चार्जर की सुरक्षा ऐसे सुनिश्चित करें-

हमेशा अपने फ़ोन, टैबलेट, ई-सिगरेट या मोबाइल डिवाइस के साथ आए चार्जर का ही इस्तेमाल करें। अगर आपको रिप्लेसमेंट बैटरी या चार्जर खरीदना है, तो हमेशा किसी ऐसे आपूर्तिकर्ता से ब्रांडेड, असली उत्पाद चुनें जिस पर आप भरोसा कर सकें। बाज़ार में ढेरों नकली उत्पाद उपलब्ध हैं, और उनमें अंतर पहचानना मुश्किल हो सकता है।

🌑 ओरिजिनल चार्जर की पहचान-

आपका चार्जर ओरिजिनल है या नहीं, इसकी पहचान आप इस ऐप से चेक कर सकते हैं.चार्जर की क्वालिटी पता करने के लिए आपको भारतीय मानक ब्यूरो (Bureau of Indian Standards) के ऑफिशियल ऐप BIS CARE की मदद लेनी होगी । आप इस ऐप को आसानी से गूगल प्ले स्टोर से इंस्टॉल कर सकते हैँ. यह ऐप चुटकियों में असली-नकली के बारे में बता देता है।

1️⃣ सबसे पहले BIS CARE ऐप को ओपन कर लें।

2️⃣ आपके सामने Verify R no. Under CRS ऑप्शन आएगा। उस पर टैप करें।

3️⃣ अब चार्जर पर लिखे R नंबर को दर्ज करें।

4️⃣ अगर एडॉप्टर पर यह नंबर नहीं लिखा है तो बॉक्स को चेक करें।

5️⃣ R नंबर दर्ज करने के बाद आपके सामने चार्जर से जुड़ी सारी डिटेल आ जाएगी।

🌑 नकली चार्जर का पता ऐसे लगाएं-

ज़्यादा सुनिश्चित करने के लिए, चार्जर को पकड़ें और अपनी उंगली चार्जर के किनारों पर फिराएँ या ध्यान से देखें। अगर आपको कोई टुकड़ा या अतिरिक्त प्लास्टिक (ठीक से कटा हुआ नहीं है या ऐसा लग रहा है कि उसकी फिनिशिंग खराब है) लगे, तो समझ लीजिए कि यह नकली है !

➡️ नकली चार्जर से खतरा-

✒️ नकली चार्जर में आग लगने या बिजली का झटका लगने का खतरा होता है।

✒️ हमेशा अपने मूल चार्जर का उपयोग करें या एक प्रतिष्ठित ब्रांड से ही नया चार्जर खरीदें।

🌑 फोन का चार्जर आपका डाटा चुरा सकता है-

आप ध्यान दीजिये, अगर आपके स्मार्टफ़ोन को किसी सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन में लगाने पर आपकी तस्वीरें देखी जा सकती हैं तो वे चुराई जा सकती हैं या डिलीट भी की जा सकती हैं, तो निसंदेह यह कहा जा सकता है कि फोन का चार्जर आपका डाटा चुरा सकता है.

हम लगातार आपके लिए नये नए साइबर अपराधों की जानकारी लेकर आ रहे हैँ और अगर आपको हमारे द्वारा दी गई जानकारियों से कोई भी फायदा नजर आता है तो हमारे उत्साहवर्धन हेतु हमारे ब्लॉग को फॉलो और चैनल को सब्सक्राइब कीजिये, पोस्ट को लाइक कीजिये और अपना अनुभव शेयर कीजिये ताकि अन्य लोग भी आपके अनुभव से लाभान्वित हों और साइबर अपराध के घेरे में न आएं.

सतर्क रहिये-सुरक्षित रहेंगे.

धन्यवाद 🙏

द्वारा

शालिनी कौशिक

एडवोकेट

कैराना (शामली)



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