साइबर ठगी में नाम -2️⃣ -बागपत से अनुज तोमर, दिल्ली से विवेक शर्मा और पवन जायसवाल

 



31 अक्टूबर 2025

31 अक्टूबर 2025 की मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कोरोना काल के दौरान दो साइबर ठग भारत लौटे.सिंगापुर से लौटकर दोनों साइबर अपराधियों ने एक अन्य साथी के साथ मिलकर देशभर में साइबर ठगी का जाल फैला रखा था। गोविंद नगर में अगस्त में क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने के नाम पर हुई ठगी के मामले में जांच कर रही थाना पुलिस और साइबर क्राइम टीम ने सर्विलांस की मदद से इनमें से एक साइबर ठग को मोहाली एरोसिटी के पास फ्लैट से पकड़ा तो दूसरे को दिल्ली के सेक्टर 11 डीडीए स्पोर्ट्स कांप्लेक्स से दबोचा। 

➡️ साइबर ठगों से बरामदगी

दोनों साइबर ठगों में से दिल्ली से पकड़ा गया आरोपित क्रिकेटर है। आरोपितों के पास से 14 मोबाइल फोन, तीन लैपटाप, एक थार कार, कीमती क्रिकेट किट बैग बरामद हुआ। मोबाइल फोन में सिर्फ तीन सिमकार्ड लगे थे, जो मिजोरम की तीन महिलाओं के नाम से थे। बाकी में सिमकार्ड नहीं मिले। ये तीनों साइबर ठग अब तक पुलिस को 35 लोगों के ठगे जाने की जानकारी मिली है जिनमें वह 60 लाख रुपये गंवा चुके हैं। अभी जांच में और लोगों की जानकारी मिलने की उम्मीद है।

➡️ कैसे दिया साइबर ठगी को अंजाम:

डीसीपी क्राइम अतुल श्रीवास्तव ने बताया कि साइबर ठगों ने नौ जून, 2025 को गुजैनी आइ ब्लाक निवासी सुनील खन्ना को काल कर क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने का झांसा दिया था। इसके बाद ई-मेल से भेजे गए फार्म को उन्होंने भरा था। अगले दिन ही उनके क्रेडिट कार्ड से 1,35,669 रुपये निकल गए थे। शिकायत पर जांच शुरू हुई और 20 अगस्त को गोविंद नगर थाने में पीड़ित ने ठगी का मुकदमा दर्ज कराया था। थाना पुलिस व साइबर सेल व साइबर क्राइम टीम जांच में लगी थी। इसके बाद जो ई-मेल आई और जिस नंबर से काल की गई थी, उसका मिलान किया गया। दोनों एक ही व्यक्ति की पता चली।

➡️ पुलिस ने कैसे की गिरफ्तारी:

टीम ने सर्विलांस की मदद से उस नंबर को ट्रेस किया। इसके बाद मोहाली की एरोसिटी से बागपत निवासी अनुज तोमर को जबकि दिल्ली के उत्तम नगर निवासी विवेक शर्मा को दिल्ली के सेक्टर 11 डीडीए स्पोर्ट्स कांप्लेक्स के पास से पकड़ा। 

➡️ बागपत के अनुज तोमर की कहानी:

अनुज ने एमबीए और विवेक शर्मा ने बीटेक कर रखा है। अनुज ने बताया कि वह पहले दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, चंडीगढ़ समेत जिलों की कंपनियों में नौकरी कर चुका है। जब दिल्ली में नौकरी कर रहे थे तभी विवेक से संपर्क हुआ था। इसके बाद दोनों सिंगापुर में एक कंपनी में नौकरी करने चले गए, लेकिन कोरोनाकाल में नौकरी चली गई। किसी तरह से वे वहां से लौट आए। इसके बाद दिल्ली के उत्तम नगर का पवन जायसवाल मिला। नौकरी के लिए बात की तो उसने साइबर ठगी के तरीके बताए और कुछ समय में करोड़पति बनने का सपना दिखाया। उसने ही दोनों को ठगी के तरीके बताए। इसके बाद से क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने, भुगतान पर छूट देने समेत बहानों से लोगों से ठगी करने लगे। ठगी की ही कमाई से इंस्पेक्टर ने बताया कि अनुज के पास से एक थार बरामद हुई है जो विवेक के पिता के नाम पंजीकृत है,अनुज ने खरीदी पर उसे ट्रांसफर नहीं कराई.थार उसके साथी आरोपित विवेक शर्मा के पिता रतनलाल शर्मा के नाम से पंजीकृत है, जो प्रापर्टी डीलर हैं। इसमें अनुज ने उन्हें 12 लाख रुपये दिए थे, जबकि बाकी कुछ रकम किस्तों में देनी थी. ठगी करने के लिए लोगों के मोबाइल नंबर का डेटा पवन जायसवाल उपलब्ध कराता था। उसी ने ठगी के लिए मिजोरम के सिमकार्ड उपलब्ध कराए थे। टीम उसकी तलाश में लगी है।

➡️ दिल्ली के क्रिकेटर विवेक शर्मा की कहानी:

गोविंद नगर थाने के इंस्पेक्टर अभय कुमार सिंह ने बताया कि विवेक शर्मा क्रिकेट में नाम कमाना चाहता था, लेकिन एक तरफ रुपयों की भी जरूरत थी। कोरोनाकाल में काम भी छूट गया था तभी अनुज व पवन के साथ ठगी करने लगे, लेकिन वह क्रिकेट नहीं छोड़ना चाहता था। इसलिए ठगी से जो रकम मिलती उससे क्रिकेट किट ले आता था। इंस्पेक्टर ने बताया कि विवेक के पास जो क्रिकेट किट मिली। उसमें एक बैट मिला, जिसकी कीमत 1.25 लाख रुपये बताई गई है। विवेक ने बताया कि उसने मोहाली एरोसिटी में 30 हजार प्रतिमाह के किराये पर भूतल का फ्लैट लिया था, लेकिन वह कभी-कभी जाता था, जबकि वहां अनुज हमेशा रहता था।

➡️ पवन जायसवाल की तलाश: 

ठगों के आरोपित क्रिकेटर और रेसलर को जेल भेजने के बाद साइबर टीम अब तीसरे की तलाश के लिए दोनों से बरामद मोबाइल नंबरों की सीडीआर निकलवा रही है। तीसरे आरोपित के हाथ लगते ही टीम को बड़ा गिरोह मिल सकता है। वहीं, पकड़े गए दोनों आरोपित एमबीए व बीटेक करने के बाद पहले सिंगापुर में नौकरी कर रहे थे, लेकिन कोरोना काल में नौकरी छूटी तो सभी घर लौट आए। रुपयों की किल्लत हुई तो दिल्ली के उत्तम नगर के युवक ने कर्ज दिया और साइबर ठगी के गुर सिखा करोड़ों कमाने का सपना दिखाया था, जिसके बाद वे लोग देशभर में साइबर ठगी करने लगे थे। क्रिकेटर ने ठगी की रकम से 1.25 लाख की कीमत का बैट तक खरीदा था।

              साइबर अपराधियों के विषय में यह जानकारी आप लोगों के लिए महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि हम आपसे लगातार कह रहे हैं कि साइबर ठग हमारे बीच के ही पढ़ें लिखें सभ्य समाज के लोग हैं जो करोड़पति बनने के सपने को पूरा करने के लिए आज के भौतिकवादी चकाचौंध भरी दुनिया में जैसे भी हो पैसा कमाने के लिए साइबर अपराध की दुनिया में पदार्पण कर रहे हैं. इसलिए ही पुलिस प्रशासन आप लोगों को आपके बीच में आकर जागरूक करने का प्रयास कर रहा है कि आप अपनी व्यक्तिगत जानकारी किसी से साझा मत कीजिये, अनजाने लिंक को क्लिक मत कीजिये आदि आदि, आपको हमारे द्वारा बताई गई जानकारियों को समझना होगा, ब्लॉग से जुड़ना होगा, व्लॉग देखना होगा ताकि कोई भी साइबर अपराधी आपको नुकसान न पहुंचा सके. 

सतर्क रहिये-सुरक्षित रहेंगे 👍

द्वारा

शालिनी कौशिक

एडवोकेट

कैराना (शामली)


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