डिजिटल अरेस्ट -1️⃣ ठग बने ट्राई, पुलिस व ईडी अधिकारी


स्रोत-अमर उजाला 

6 नवंबर 2025

6 नवम्बर 2025 के अमर उजाला न्यूज़ के अनुसार -नोएडा में साइबर जालसाजों ने सेवानिवृत महिला अधिकारी को मनी लॉन्ड्रिंग में नाम आने का डर दिखाकर सात दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखा। डरा धमका कर 31 लाख रुपये ठग लिए। ठगों ने खुद को पुलिस व ईडी अधिकारी बताकर वारदात को अंजाम दिया। पीड़िता की शिकायत पर साइबर क्राइम थाने में मुकदमा हुआ है।

नोएडा के सेक्टर-100 में रहने वाली महिला शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त हैं। उनके पास 24 अक्टूबर की सुबह जालसाजों ने ट्राई कर्मचारी बनकर फोन किया और कहा कि दो घंटे में उनका सिम बंद हो जाएगा। महिला ने कारण पूछा तो बताया कि उनके आधार कार्ड से केनरा बैंक की दिल्ली के दरियागंज स्थित शाखा में खाता खोला गया है। इसमें अवैध रुपये लेनदेन होने पर दरियागंज थाने में मुकदमा दर्ज हुआ है।

कुछ देर बाद बुजुर्ग के पास ठगों ने दिल्ली पुलिस का अधिकारी बनकर वीडियो कॉल की। आरोपी उनसे नाम-पता पूछने लगा। उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज होने की जानकारी दी। उनको बताया कि उनके नाम पर खुले बैंक खाते में 80 लाख रुपये का अवैध लेनदेन हुआ है।

एडीसीपी साइबर शैव्या गोयल का कहना है कि इस मामले में साइबर थाने में मुकदमा पंजीकृत किया गया है। मामले की जांच की जा रही है।

➡️ व्हाट्सएप पर भेजा वारंट

जालसाजों ने महिला को डराने के लिए उनके व्हाट्सएप नंबर पर वारंट भी भेजा और जल्द गिरफ्तार करने की धमकी दी। जब पीड़िता ने बताया कि वह बुजुर्ग हैं तो ठगों ने ऑनलाइन ही सुनवाई करने का सुझाव दिया। दिन में दो बार ऑनलाइन सुनवाई कर बयान दर्ज करने के बहाने संपत्ति के बारे में पता किया।

➡️ एफडी तुड़वा कर मंगाई रकम

इसके बाद ठगों ने एफडी तुड़वा कर रकम एक बैंक खाते में जमा कराई। 28 अक्टूबर को 23 और 29 अक्टूबर को आठ लाख रुपये इंडसइंड बैंक की शाखा में जिमप्लेट एंटरप्राइजेज के खाते में ट्रांसफर कराए। 30 अक्टूबर की सुबह ठगों ने ईडी अधिकारी बनकर पूछताछ करनी चाही तो पीड़िता को शक हुआ। इसके बाद उन्होंने पुलिस से शिकायत की।

       सरकार के दिशा निर्देशों के अनुसार पुलिस प्रशासन लगातार जनता को जागरूक कर रहा है किन्तु इसके बावजूद साइबर ठगी थमने का नाम नहीं ले रही है, कारण बस एक ही है कि पुलिस प्रशासन जनता के जिम्मेदार लोगों तक नहीं जा रहे हैँ. वे केवल सडक चलते लोगों को पकड़ते हैँ या फिर स्कूलों में जाकर बच्चों को साइबर ठगी के खतरों से आगाह करते हैँ, यही सब देखते हुए साइबर ठग मुख्यतः निशाना बना रहे हैँ बुजुर्गो को, जो शहरों और कस्बों में जीवन की संध्या अकेले में गुजार रहे हैँ और ज्यादा किसी से मिलना जुलना पसंद नहीं करते हैँ और इसीलिए वे गिरफ्तारी के भय से और हर किसी भय से जो साइबर ठग उनके मन में बैठाते हैँ, डर जाते हैँ और उनके शिकार बन जाते हैँ. एक आम आदमी जो कि सार्वजनिक जीवन से आज जुड़ा हुआ है, जानता है कि सर्वोच्च न्यायालय ने व्हाट्सएप्प नोटिस या वारंट को वैध नहीं माना है किन्तु जो बुजुर्ग सार्वजनिक जीवन से दूर हैँ, वे यह नहीं जानते हैँ.

➡️ व्हाट्सएप के द्वारा नोटिस या वारंट सेवा के संबंध में:

सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया है कि पुलिस को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 41ए (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 35) के अनुसार आरोपी/संदिग्ध को व्हाट्सएप या अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से उपस्थिति के लिए नोटिस नहीं देना चाहिए, सर्वोच्च न्यायालय ने सतेंद्र कुमार अंतिल बनाम CBI एवं अन्य (2022) में अपने पूर्वनिर्णय का उदाहरण दिया। उसने पाया कि व्हाट्सएप या अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों द्वारा दिये गए नोटिस CrPC की धारा 41-A/BNSS की धारा 35 के अधीन वैध नहीं हैं।

  इसलिए पुलिस अब व्हाट्सएप या किसी अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से वारंट या नोटिस नहीं भेज सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि सीआरपीसी की धारा 41ए या भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNS) की धारा 35 के तहत नोटिस केवल पारंपरिक और कानूनी तरीकों से ही दिए जाने चाहिए, क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से जारी नोटिस कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन कर सकते हैं और न्याय की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकते हैं। 

✒️ कानूनी प्रतिबंध: सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस विभागों को सख्त निर्देश दिया है कि वे नोटिस और वारंट भेजने के लिए व्हाट्सएप जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों का इस्तेमाल न करें।

✒️ कानूनी प्रक्रिया का पालन: सभी पुलिस विभागों को इस निर्देश का पालन करना होगा और आरोपी को नोटिस देने के लिए निर्धारित पारंपरिक कानूनी तरीकों का ही उपयोग करना होगा।

✒️ सुरक्षा और पारदर्शिता: अदालत ने यह फैसला इसलिए सुनाया है ताकि न्याय प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके, और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से गलत सूचना या धोखाधड़ी का खतरा न हो। 

इस तरह डिजिटल अरेस्ट आज एक स्कैम मात्र न रहकर भारतीय पुलिस प्रशासन के लिए एक सिरदर्द बन चुका है. डिजिटल अरेस्ट कर न केवल सामान्य नागरिक बल्कि बड़े बड़े रिटायर्ड अधिकारी, रिटायर्ड बुजुर्ग प्रशासनिक अधिकारी, वकील, रिटायर्ड जज, पत्रकार आदि लगभग सभी इसके शिकार बनाये जा रहे हैं.सरकार ने इसके लिए अमिताभ बच्चन कॉलर ट्यून, जीरो एफ आई आर आदि बहुत सी तैयारियां की हैँ. जरुरत बस जन जागरूकता की है. जनता जितना सतर्क रहेगी, उतनी ही सुरक्षित रहेगी. डिजिटल अरेस्ट के बड़े केसेस के बारे में जानने के लिए जुड़े रहिये हमारे ब्लॉग और चैनल से.

सतर्क रहिये- सुरक्षित रहेंगे.

धन्यवाद 🙏🙏

द्वारा

शालिनी कौशिक

एडवोकेट

कैराना (शामली)

 

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