डिजिटल अरेस्ट 3️⃣ -ठग बने सीबीआई आफिसर
स्रोत-जागरण न्यूज
9 अक्टूबर 2025
9 अक्टूबर 2025 की जागरण न्यूज के अनुसार प्रयागराज में साइबर अपराधियों ने एक शिक्षिका को डिजिटल अरेस्ट करके 6.30 लाख रुपये की आनलाइन ठगी की। इससे परेशान होकर पीड़ित शिक्षिका ने मोबाइल नंबर के आधार पर साइबर थाने में आइटी एक्ट का मुकदमा दर्ज कराया है।
➡️ प्रयागराज के सलोरी निवासी हैं शिक्षिका
सलोरी तेलियरगंज निवासी एक महिला निजी स्कूल में शिक्षिका है। उसका कहना है कि करीब एक माह पहले अनजान नंबर से वाट्सएप पर वीडियो काल आया। कालर ने खुद को टेली कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट का बताया। कहा कि उनके मोबाइल नंबर से अपराध किया जा रहा है। वह नरेश अग्रवाल के साथ मिलकर अपराध कर रही हैं।
➡️ कोलाबा पुलिस स्टेशन में केस होने की बात कही
कालर ने कहा कि कॉल को कोलाबा पुलिस स्टेशन कनेक्ट किया जा रहा है, वहां इंस्पेक्टर बात करेंगे। इसके बाद एक लड़की ने कहा कोलाबा पुलिस स्टेशन से इंस्पेक्टर प्रदीप सावंत बात करेंगे। फिर खुद को प्रदीप सावंत बताते हुए एक व्यक्ति ने कहा कि कोलाबा पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ एफआइआर दर्ज है। लिहाजा तुरंत पुलिस स्टेशन पर आना होगा।
➡️ वाट्सएप पर फोटो व कागजात भेजा गया
इस दौरान शिक्षिका को कुछ फोटो, कागजात और एटीएम वाट्सएप पर भेजा गया। प्रदीप सावंत और सीबीआइ आफिसर राजेश मिश्रा ने धमकाया कि आरबीआइ द्वारा जारी जो खाता नंबर भेजा जा रहा है, उसमें पैसा भेजिए। पैसा नहीं भेजने पर अपराधी उनके पूरे परिवार को मार डालेंगे।
➡️ चार लाख 30 हजार कर दिया ट्रांसफर
यह सुनकर शिक्षिका डर गईं और फिर मिथानपुरा स्थित बैंक आफ इंडिया की शाखा में खाताधारक विकास कुमार के अकाउंट में चार लाख 30 हजार ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद सईद जीशान हैदर के कोटक महिंद्रा बैंक के खाते में दो लाख रुपये आरटीजीएस किया। पैसा भेजने के बाद शिक्षिका को साइबर ठगी का पता चला, जिसके बाद उन्होंने मुकदमा पंजीकृत करवाया। इंस्पेक्टर साइबर थाना अनिल कुमार का कहना है कि केस दर्ज कर विवेचना की जा रही है।
➡️ डिजिटल अरेस्ट साइबर फ़्रॉड क्यूँ है-
डिजिटल अरेस्ट एक साइबर घोटाला है जिसमें धोखेबाज खुद को सरकारी अधिकारी (जैसे सीबीआई या कस्टम अधिकारी) बताकर पीड़ितों को धमकाते हैं कि वे किसी अवैध गतिविधि में शामिल हैं। वे पीड़ितों से वीडियो कॉल के माध्यम से संपर्क करते हैं, जिसमें वे पुलिस स्टेशन जैसा नकली सेटअप भी बना सकते हैं, ताकि उन्हें असली कार्यवाही का यकीन दिला सकें। अंततः, वे पीड़ित से किसी 'जांच' या 'सफाई' के नाम पर पैसों की मांग करते हैं, जिसे पीड़ित को एक निर्दिष्ट खाते में ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया जाता है।
➡️ यह कैसे काम करता है:
🌑 पहचान का झांसा:
अपराधी खुद को पुलिस, आयकर अधिकारी या सीमा शुल्क अधिकारी के रूप में पेश करते हैं।
🌑 गलत आरोप:
वे पीड़ितों पर किसी अवैध गतिविधि, जैसे कि मनी लॉन्ड्रिंग, या कर चोरी जैसे अपराधों का झूठा आरोप लगाते हैं।
🌑 धमकी और दबाव:
वे पीड़ितों को 'डिजिटल गिरफ्तारी वारंट' की धमकी देते हैं और उन्हें डराते हैं।
🌑 वीडियो कॉल का इस्तेमाल:
वे अक्सर व्हाट्सएप या स्काइप जैसे प्लेटफॉर्म पर वीडियो कॉल का उपयोग करते हैं, जहाँ वे नकली पृष्ठभूमि के साथ एक पुलिस स्टेशन जैसा माहौल दिखा सकते हैं।
🌑 पैसों की मांग:
वे पीड़ितों से "जांच में मदद करने" या "अपना नाम साफ़ करवाने" के लिए पैसे मांगते हैं, जिन्हें किसी बैंक खाते या UPI आईडी पर भेजने के लिए कहते हैं।
🌑 चंपत होना:
भुगतान के बाद, घोटालेबाज गायब हो जाते हैं, जिससे पीड़ित को भारी वित्तीय नुकसान होता है।
इस तरह डिजिटल अरेस्ट आज एक स्कैम मात्र न रहकर भारतीय पुलिस प्रशासन के लिए एक सिरदर्द बन चुका है. डिजिटल अरेस्ट कर न केवल सामान्य नागरिक बल्कि बड़े बड़े रिटायर्ड अधिकारी, रिटायर्ड बुजुर्ग प्रशासनिक अधिकारी, वकील, रिटायर्ड जज, शिक्षक,पत्रकार आदि लगभग सभी इसके शिकार बनाये जा रहे हैं.सरकार ने इसके लिए अमिताभ बच्चन कॉलर ट्यून, जीरो एफ आई आर आदि बहुत सी तैयारियां की हैँ. जरुरत बस जन जागरूकता की है. जनता जितना सतर्क रहेगी, उतनी ही सुरक्षित रहेगी. डिजिटल अरेस्ट के बड़े केसेस के बारे में जानने के लिए जुड़े रहिये हमारे ब्लॉग और चैनल से.
सतर्क रहिये- सुरक्षित रहेंगे.
धन्यवाद 🙏🙏
द्वारा
शालिनी कौशिक
एडवोकेट
कैराना (शामली)

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