साइबर ठगों के हथियार 9️⃣ SIR फॉर्म से साइबर ठगों की बल्ले बल्ले
स्रोत -केलो प्रवाह न्यूज़
20 नवंबर 2025
रायगढ़ छतीसगढ़ के केलो प्रवाह न्यूज 20 नवम्बर 2025 को प्रकाशित समाचार के अनुसार कार्यालय मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, छत्तीसगढ़ ने मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत गणना फॉर्म भरने वाले मतदाताओं और नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा सूचना जारी की है। इस सूचना का उद्देश्य लोगों को उनके मोबाइल नंबर के संभावित दुरुपयोग और ओटीपी आधारित धोखाधड़ी से बचाना है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि
" एसआईआर फॉर्म भरते समय मोबाइल नंबर देना पूरी तरह से सुरक्षित है, लेकिन नागरिकों को विशेष रूप से सतर्क रहने की आवश्यकता है, क्योंकि कुछ साइबर अपराधी इसी बहाने ठगी करने की कोशिश कर सकते हैं।"
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी छतीसगढ़ ने जोर देकर कहा है कि
"बूथ लेवल ऑफिसर के माध्यम से एसआईआर फॉर्म भरने के लिए किसी भी प्रकार के ओटीपी की आवश्यकता नहीं होती है। कोई भी अधिकारी, कर्मचारी या बीएलओ आपसे ओटीपी नहीं मांगता है। यदि आपको कोई व्यक्ति फोन करे और कहे कि
“आपके एसआईआर से जुड़े मोबाइल पर जो ओटीपी आया है, वह हमें दे दीजिए,”
तो उन्हें तुरंत मना कर दें। बूथ लेवल ऑफिसर से सीधे संपर्क करें। अगर कोई व्यक्ति ओटीपी मांगने के लिए दबाव डाले, धमकी दे या जोर डाले, तो तुरंत नजदीकी पुलिस थाने में सूचना दें। किसी भी सूरत में अपने मोबाइल फोन में प्राप्त ओटीपी किसी अज्ञात व्यक्ति के साथ साझा न करें। अधिक जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर 1950 पर संपर्क कर सकते हैं।"
➡️ हेल्पलाइन नंबर 1950 -चुनाव टोल फ्री नंबर 1950
भारत निर्वाचन आयोग ने एक टोल फ्री नंबर 1950 शुरू किया है। यह संख्या सभी चुनाव विभाग / कार्यालयों में उपलब्ध होगी। चुनाव संबंधी सभी जानकारी जैसे: नया मतदाता पंजीकरण, मतदाता सूची में खोज नाम, मतदाता सूची में नाम का विलोपन या विलोपन, वोट हस्तांतरण, बूथ की जानकारी इस नंबर पर प्रदान की जाएगी.
🌑 साइबर ठग ऑनलाइन फॉर्म, विशेष रूप से मतदाता सूची अपडेट से संबंधित 'SIR फॉर्म' (Special Summary Revision) का उपयोग करके कई तरीकों से लोगों को ठग सकते हैं।
➡️ ठगी के सामान्य तरीके निम्नलिखित हैं:
✒️ फर्जी कॉल और OTP मांगना:
ठग खुद को सरकारी अधिकारी या BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) बताते हैं और फोन करके कहते हैं कि आपका SIR फॉर्म गलत भर गया है या अपडेट करना है। वे आपसे विवरण सही करने के बहाने आपके मोबाइल पर आया हुआ वन-टाइम पासवर्ड (OTP) मांगते हैं। एक बार OTP मिल जाने पर, वे आपके बैंक खाते से पैसे निकाल लेते हैं या आपके व्यक्तिगत डेटा तक पहुंच प्राप्त कर लेते हैं।
✒️ फर्जी APK फ़ाइल डाउनलोड करवाना:
ठग आपको बताते हैं कि फॉर्म भरने या अपडेट करने के लिए आपको एक विशेष 'SIR APK' नामक मोबाइल एप्लिकेशन डाउनलोड करनी होगी। यह वास्तव में एक दुर्भावनापूर्ण सॉफ़्टवेयर (मैलवेयर) होता है। इसे डाउनलोड और इंस्टॉल करते ही, ठग आपके फोन का पूरा एक्सेस (पहुंच) हासिल कर लेते हैं, जिसमें आपकी तस्वीरें, वीडियो, फोन बुक, और बैंकिंग जानकारी शामिल होती है।
✒️ व्यक्तिगत और संवेदनशील जानकारी चुराना:
नकली ऑनलाइन फॉर्म या वेबसाइट बनाकर, ठग लोगों को यह विश्वास दिलाते हैं कि वे आधिकारिक सरकारी पोर्टल पर जानकारी भर रहे हैं। इस फॉर्म के माध्यम से वे बैंक खाता संख्या, पासवर्ड, आधार संख्या, पैन कार्ड संख्या जैसी संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी एकत्र करते हैं, जिसका उपयोग वे पहचान की चोरी (identity theft) या वित्तीय धोखाधड़ी के लिए करते हैं।
✒️ फिशिंग लिंक भेजना:
ठग टेक्स्ट मैसेज (SMS), व्हाट्सएप या ईमेल के माध्यम से फर्जी फॉर्म का लिंक भेजते हैं। लिंक पर क्लिक करने पर, उपयोगकर्ता एक नकली वेबसाइट पर पहुंच जाते हैं जो असली जैसी दिखती है। यहां मांगी गई जानकारी भरकर सबमिट करने पर वह सीधे ठगों तक पहुंच जाती है।
बचाव के तरीके
OTP कभी साझा न करें: किसी भी व्यक्ति को फोन पर, मैसेज पर या किसी फॉर्म में अपना OTP कभी न दें, चाहे वह खुद को कोई भी अधिकारी बताए।
अनजान ऐप डाउनलोड न करें: किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजी गई APK फ़ाइल या लिंक से कोई भी एप्लिकेशन डाउनलोड न करें। आधिकारिक ऐप्स केवल गूगल प्ले स्टोर या ऐप स्टोर से ही डाउनलोड करें।
जानकारी की पुष्टि करें: यदि आपको SIR फॉर्म या किसी अन्य सरकारी प्रक्रिया से संबंधित कोई कॉल या मैसेज आता है, तो संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या स्थानीय कार्यालय से संपर्क करके उसकी सत्यता की पुष्टि करें।
व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से बचें: ऑनलाइन फॉर्म पर या फोन पर अपनी बैंक डिटेल्स, पासवर्ड या अन्य संवेदनशील जानकारी साझा करने से बचें।
सतर्क रहें: किसी भी प्रकार के लालच या दबाव में न आएं। सरकारी कर्मचारी आमतौर पर फोन पर ऐसी गोपनीय जानकारी नहीं मांगते हैं।
यदि आप साइबर ठगी का शिकार हो जाते हैं, तो तुरंत राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या https://cybercrime.gov.in/ वेबसाइट पर शिकायत दर्ज करें।
SIR फॉर्म भरने का कार्य इस समय उत्तर प्रदेश में भी जोरों पर है. B L O घर घर जाकर फॉर्म मतदाताओं को उपलब्ध करा रहे हैं, SIR के फॉर्म में बहुत सी ऐसी जानकारियां हैं जिनके लिए मतदाता परेशान हैं और ऐसी ही परिस्थिति का लाभ उठाते हैं साइबर ठग, साइबर अपराध इस समय यू पी में डिजिटल अरेस्ट, क्रेडिट कार्ड स्कैम, आदि बहुत से अपराधों को अंजाम दे रहे हैं. भले ही, यह समाचार छतीसगढ़ का है किन्तु साइबर ठग ऐसी स्थिति कहीं भी पैदा कर सकते हैं, इसलिए ध्यान दीजिये इस सूचना पर, और सुरक्षा के लिए अपनाएं ये टिप्स-
🌑 OTP कभी साझा न करें: किसी भी व्यक्ति को फोन पर, मैसेज पर या किसी फॉर्म में अपना OTP कभी न दें, चाहे वह खुद को कोई भी अधिकारी बताए।
🌑 अनजान ऐप डाउनलोड न करें: किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजी गई APK फ़ाइल या लिंक से कोई भी एप्लिकेशन डाउनलोड न करें। आधिकारिक ऐप्स केवल गूगल प्ले स्टोर या ऐप स्टोर से ही डाउनलोड करें।
🌑 जानकारी की पुष्टि करें: यदि आपको SIR फॉर्म या किसी अन्य सरकारी प्रक्रिया से संबंधित कोई कॉल या मैसेज आता है, तो संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या स्थानीय कार्यालय से संपर्क करके उसकी सत्यता की पुष्टि करें।
🌑 व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से बचें: ऑनलाइन फॉर्म पर या फोन पर अपनी बैंक डिटेल्स, पासवर्ड या अन्य संवेदनशील जानकारी साझा करने से बचें।
🌑 सतर्क रहें: किसी भी प्रकार के लालच या दबाव में न आएं। सरकारी कर्मचारी आमतौर पर फोन पर ऐसी गोपनीय जानकारी नहीं मांगते हैं।
यदि आप साइबर ठगी का शिकार हो जाते हैं, तो तुरंत राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या https://cybercrime.gov.in/ वेबसाइट पर शिकायत दर्ज करें। साइबर ठगी के शिकार होने पर रिपोर्ट करने के 24 घंटे महत्वपूर्ण हैं, इसलिए कोशिश करें कि 24 घंटे के अंदर ही अंदर 1930 को कॉल कर लें और स्थानीय थाने पर रिपोर्ट कर दी जाये.
सतर्क रहें-सुरक्षित रहेंगे 👍
धन्यवाद
द्वारा
शालिनी कौशिक
एडवोकेट
कैराना (शामली)

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें