डिजिटल अरेस्ट 4️⃣ सीबीआई और आईपीएस ऑफिसर बनकर सर्वोच्च न्यायालय के नाम पर डिजिटल अरेस्ट
स्रोत -अमर उजाला
30 नवम्बर 2025
अमर उजाला के 30 नवम्बर 2025 को प्रकाशित एक समाचार के अनुसार एक वृद्ध को CBI अधिकारी बनकर डिजिटल अरेस्ट किया गया। उन पर ह्यूमन ट्रैफिकिंग केस में संदिग्ध होने का आरोप लगाकर वीडियो कॉल पर नजर रखी गई और सुप्रीम कोर्ट में जमा करने के नाम पर उनसे अपनी सभी एफडी तुड़वाकर बैंक खाते में पैसा जमा करवाया गया। इसके बाद 76 लाख रुपये दूसरे खाते में ट्रांसफर कर लिये गए.
पीड़ित वृद्ध को सर्वोच्च न्यायालय का पत्र भेजकर ह्यूमन ट्रैफिकिंग केस में संदिग्ध होने का आरोप लगाकर कथित आईपीएस तथा सीबीआई अधिकारी ने वृद्ध को दो दिनों तक डिजिटल अरेस्ट किया। इसके बाद एक बैंक खाते में सारी रकम एकत्र करते हुए उससे 76 लाख रुपये पार कर दिये। वृद्ध को ठगे जाने का अहसास होने पर उसने क्राइम ब्रांच में शिकायत की। क्राइम ब्रांच ने कथित आईपीएस तथा सीबीआई अधिकारी के खिलाफ प्रकरण दर्ज करते हुए उसके संबंध में पतासाजी प्रारंभ कर दी है।
➡️ मामला संक्षेप में-
क्राइम ब्रांच के थाना प्रभारी शैलेश मिश्रा से प्राप्त जानकारी के अनुसार संजीवनी नगर निवासी अनिल कुमार नन्हौरया उम्र 72 साल के पास 22 नवंबर 25 की सुबह करीब 10.30 बजे कॉल आया था। कॉल करने वाले ने बताया कि
वह डिपार्टमेंट एंड टेलीकाम से बोल रहा हूं और आपके नाम से जारी सिम का उपयोग कर लोगों को डराया धमकाया जा रहा है, जिसकी रिपोर्ट दिल्ली थाना में दर्ज हुई है। आपको दिल्ली आकर थाना में स्टेटमेंट दर्ज करना होगा।
निवेदन करने पर उसने कहा कि
अगर आप दिल्ली नहीं आना चाहते हैं तो आप अपने स्टेटमेंट ऑनलाइन दर्ज करवा सकते है।
उन्हाेंने इसके लिए उन्हें दिल्ली थाने के फोन क्रमांक 9573352514 पर बात करनी होगी।
( जबकि उपरोक्त नंबर को ज़ब मुझ ब्लॉगर द्वारा truecaller पर सर्च किया गया तो यह नंबर टेल्को इंडिया के नाम से फ़्रॉड स्पैम में दर्ज नजर आ रहा है)
उक्त नम्बर पर फोन लगाने पर सामने वाले व्यक्ति ने खुद का नाम आईपीएस विजय कुमार बताया था। इसके बाद कथित आईपीएस अधिकारी विजय कुमार ने सुबह 11.21 बजे वीडियो कॉल से बात की और व्हाट्सएप्प पर दर्ज केस की जानकारी दी। इसके बाद दोपहर करीब डेढ़ बजे पुनः वीडियो कॉल करते हुए बताया कि आप सीबीआई में दर्ज सदाकत खान ह्यूमन ट्रैफिकिंग केस में संदिग्ध हैं। सदाकत खान के पास आपके नाम का एटीएम कार्ड मिला है जो केनरा बैंक, मुंबई का है। वृद्ध के संदिग्ध होने का सर्वोच्च न्यायालय के पत्र की प्रति भी व्हाट्सएप पर भेजी गई।
➡️ सीक्रेट मिशन का खुलासा करने पर पांच साल की सजा
कथित आईपीएस विजय कुमार ने वृध्द से कहा कि यह सीक्रेट मिशन है। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए इसे चलाया जा रहा है और इस संबंध में किसी को जानकारी देने पर तीन साल की सजा और 5 लाख का जुर्माना का प्रावधान है। सजा के डर से पीड़ित ने यह बात किसी से भी साझा नहीं की। जालसाजों ने प्रत्येक तीन घंटे में व्हाट्सएप पर अपनी लोकेशन, एक्टिविटी बताने के निर्देश दिये। इसके बाद वीडियो कॉल कर सूचित किया कि आपके नाम का अरेस्ट वारंट व जब्ती की तुरंत कार्यवाही के आदेश हैं, इनमे छूट के लिए पायोरिटी इन्वेस्टीगेशन करना होगा। जिसके लिए कथित सीबीआई अधिकारी कीर्ति सान्याल के माध्यम से अनुमति प्राप्त करनी होगी।
➡️ सुप्रीम कोर्ट में जमा करनी होगी खातों की राशि-
जालसाजों ने फिर से पीड़ित को काल कर बताया कि प्रायोरिटी इन्वेस्टीगेशन की अनुमति मिल गई है। आपको अपने सभी डिपजिट (फिक्स्ड डिपजिट भी) तुड़वाकर पूरी धनराशि सुप्रीम कोर्ट के खाते में आज ही जमा करना होगा। जो वेरिफिकेशन के बाद आपको वापस कर दी जायेगी। वृद्ध ने समय पूर्व अपनी एफडी को तुडवाते हुए अपने भारतीय स्टेट बैंक कमला नेहरू नगर शाखा जबलपुर खाता क्रमांक 32331112190 में जमा किए। इसके बाद इसी खाते से 76 लाख रुपये दूसरे खाते में ट्रांसफर हो गये, जो कि वापस नहीं आये। क्राईम बांच ने अज्ञात जालसाजों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर उनके संबंध में पतासाजी प्रारंभ कर दी है।
➡️ पतासाजी क्या है -
पतासाजी" (Patasaji) शब्द का अर्थ पता लगाना या जांच-पड़ताल करना होता है। यह आमतौर पर किसी अज्ञात बात, सूचना या स्थान के बारे में जानकारी जुटाने की क्रिया को संदर्भित करता है।
उदाहरण के लिए, समाचार रिपोर्टों में इस शब्द का प्रयोग अक्सर पुलिस या जांच एजेंसियों द्वारा किसी मामले की तह तक जाने या सबूत खोजने के संदर्भ में किया जाता है।
इस तरह डिजिटल अरेस्ट आज एक स्कैम मात्र न रहकर भारतीय पुलिस प्रशासन के लिए एक सिरदर्द बन चुका है. डिजिटल अरेस्ट कर न केवल सामान्य नागरिक बल्कि बड़े बड़े रिटायर्ड अधिकारी, रिटायर्ड बुजुर्ग प्रशासनिक अधिकारी, वकील, रिटायर्ड जज, शिक्षक,पत्रकार आदि लगभग सभी इसके शिकार बनाये जा रहे हैं. सबसे बड़े अपराध के रूप में आज डिजिटल अरेस्ट आज इसलिए चिंता पैदा कर रहा है कि इसमें बड़े बड़े सरकारी, प्रशासनिक अधिकारियों के साथ साथ साइबर अपराधी सुप्रीम कोर्ट के फर्जी आदेशों से भी जनता को शिकार बना रहे हैं सरकार ने इसके लिए संचार साथी,अमिताभ बच्चन कॉलर ट्यून, जीरो एफ आई आर आदि बहुत सी तैयारियां की हैँ. किन्तु अभी थोड़ी ही सफलता हाथ लग रही है. सबसे बड़ी जरुरत जन जागरूकता की है. जनता जितना सतर्क रहेगी, उतनी ही सुरक्षित रहेगी. डिजिटल अरेस्ट के बड़े केसेस के बारे में जानने के लिए जुड़े रहिये हमारे ब्लॉग और चैनल से.
सतर्क रहिये- सुरक्षित रहेंगे.
धन्यवाद 🙏🙏
द्वारा
शालिनी कौशिक
एडवोकेट
कैराना (शामली)

बहुत ही खतरनाक है ये अपराध, सार्थक जानकारी शेयर करने के लिए धन्यवाद 🙏🙏
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