साइबर सुरक्षा चैम्पियन 2️⃣ नफ़ीस खान कैराना (शामली)
साइबर क्राइम नित नए अपराध के रूप में सामने आ रहा है और ऐसा नहीं है कि यह अभी अभी पैदा हुआ है. साइबर क्राइम की पैदाइश पुरानी है किन्तु इसे युवावस्था अभी हाल ही में प्राप्त हुई है और जब से यह युवा हुआ है तब से इसने ऐसे ऐसे क्राइम कर दिखाए है कि साधारण जनता तो साधारण जनता पुलिस प्रशासन के बड़े बड़े संगठन भी इसके कारनामे देख दाँतों तले उंगली दबा लेते है. साइबर अपराधियों ने अपराध करने का जो सबसे सरल तरीका निकाला है वह है इनका पुलिस बनकर आम नागरिकों को फोन करना और डराना, धमकाना क्योंकि पुलिस महकमा ही एक ऐसा महकमा है जिसे देखते ही बड़े बड़े अपराधी तक की रूह अन्दर तक कांप जाती है. फिर आम आदमी की तो बिसात ही क्या है.
कैराना निवासी नफ़ीस खान पर अब से कुछ माह पूर्व एक फोन आता है, वे उठाते हैं तो दूसरी तरफ से आवाज आती है कि - "मैं एस पी गाजियाबाद बोल रहा हूं." तब नफ़ीस खान कहते हैं कि" जी बताइए" कथित एस पी गाजियाबाद कहते हैं कि आपका बेटा है -" ओवैश खान" नफ़ीस खान बोले - "जी है"
"उसे यहां थाने पर बैठा रखा है" - कथित एस पी गाजियाबाद ने कहा.
नफ़ीस खान उस वक्त गाड़ी चला रहे थे और बेटा ओवैश खान बराबर मे ही बैठा था इस लिए नफ़ीस खान एकदम तपाक से बोले - "कि! पर साहब वह तो मेरे बराबर मे बैठा है" यह सुनते ही दूसरी तरफ से फोन काट दिया गया.
अब ये नफ़ीस खान की खुशनसीबी थी कि जिनके मामले में साइबर अपराधियों को मुँह की खानी पड़ गई और उन्हें ज्यादा दिमाग लगाने की जरूरत नहीं पड़ी साइबर अपराधियों की आपराधिक चाल से बचने मे किन्तु हर कोई इतना खुशनसीब नहीं होता किन्तु ऐसा नहीं कह सकते कि हर कोई दिमाग का इस्तेमाल नहीं कर सकता, हम कहेंगे कि दिमाग का इस्तेमाल हर कोई कर सकता है.
हर किसी के पास उसका बेटा, बेटी, बहन, भाई, माँ, बाप हर समय नहीं होते किन्तु यदि कोई भी भले ही पुलिस अफसर या कोई भी प्रशासनिक अधिकारी या अपहरणकर्ता आपको फोन करे और कहे कि वह थाने में है या हमारे कब्जे मे है और उसे छुड़ाने के लिए आप इतने रुपये जमानत राशि के रूप में या फिर फिरौती के रूप में दो तो आप कम से कम एक बार तो अपने स्तर पर पता करने की कोशिश करें कि जिसके बारे में वह ऐसे कह रहा हैं वह कहां है और अगर तब भी पता न चले तो जाकर स्थानीय पुलिस स्टेशन में जाकर शिकायत दर्ज कराएं और जिस नम्बर से आपके पास इस तरह से फोन आया है उसके बारे में पुलिस को सूचित करें या फिर साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें. ध्यान रखें कि
✍️ पुलिस इस तरह फोन पर गिरफ्तारी की सूचना नहीं देती.
✍️ जिले का वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एस पी किसी आम आदमी को फोन नहीं करता।
✍️ साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 आपकी सहायता के लिए है, जब भी लगे कि आपके साथ साइबर क्राइम हुआ है तो फौरन 1930 पर कॉल करे.
✍️ कभी कोई भी रकम अनजान खाते में ट्रांसफर न करें और अगर आपको विश्वास मे लेकर किसी ने रकम ऐंठ ली है तो 24 घण्टे के अंदर पुलिस को सूचित करें जिससे पुलिस फौरन रकम का ट्रांसफर म्यूल खातों में जाने से रोक सके और जल्द से जल्द आपकी रकम आपको वापस दिला सके.
इस तरह से साइबर अपराधियों की पहचान कर उनके आपराधिक इरादों को पस्त करने वाले नफ़ीस खान जी वास्तव में साइबर सुरक्षा चैम्पियन हैं और पुलिस प्रशासन के द्वारा किए जा रहे प्रयासों को सफ़लता तक पहुंचाने वाले जन जन के प्रेरणा स्रोत हैं.
साइबर अपराध की विभीषिका में ऐसे उदाहरण कम मिल रहे हैं किन्तु जितने भी मिल रहे हैं वे संग्रहणीय हैं, सराहनीय हैं. आपमें से जो कोई भी साइबर अपराधियों के इरादों को पस्त करने मे कहाँ तक सफल रहे हैं, हमें जरूर बताएं, पोस्ट के नीचे कमेन्ट कर,हम उन्हें साइबर सुरक्षा चैम्पियन के रूप मे प्रचारित करेंगे ताकि और लोगों को प्रेरणा मिले और उनके दिल से साइबर अपराधियों का डर कम हो.
सतर्क रहिए-सुरक्षित रहेंगे👍
द्वारा
शालिनी कौशिक
एडवोकेट
कैराना (शामली)

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