साइबर अपराध 9️⃣ अब गैस निशाने पर


संवाद न्यूज एजेन्सी हाथरस 5 अप्रैल 2026 के अनुसार डिजिटल दौर में साइबर अपराधी ठगी के नए-नए तरीके अपना रहे हैं। अब गैस उपभोक्ताओं को निशाना बनाकर फर्जी मैसेज के जरिए फोन हैक करने की कोशिश की जा रही है। जिले में ऐसे दो मामले सामने आए हैं, जिसके बाद साइबर सेल ने लोगों को सतर्क रहने की अपील की है।

➡️ गैस कनेक्शन कटने का मैसेज - 

केस-1

हाथरस के चमन विहार कॉलोनी निवासी आनंद के मोबाइल पर 2 मार्च 2026 को गैस कनेक्शन काटने से संबंधित मैसेज आया, जिसमें ई-केवाईसी के लिए एक लिंक दिया गया था। लिंक पर क्लिक करते ही एक एप इंस्टॉल हो गई। कुछ देर बाद जब उन्होंने यूपीआई एप खोली तो वार्निंग दिखाई दी। संदेह होने पर उन्होंने डाउनलोड फाइल चेक की, जिसमें एपीके फाइल मिली। स्थिति समझते हुए उन्होंने तुरंत फोन फॉर्मेट कर दिया।

केस-2

मेंडू निवासी भूपेंद्र के मोबाइल पर भी इसी तरह का मैसेज आया। पहले से सतर्क होने के कारण उन्होंने लिंक पर क्लिक नहीं किया। गैस एजेंसी से संपर्क करने पर मैसेज फर्जी निकला। एहतियात के तौर पर उन्होंने भी फोन फॉर्मेट कर दिया।

संवाद न्यूज एजेन्सी 6 अप्रैल 2026 के अनुसार साइबर जालसाजों ने गैस एजेंसी का प्रतिनिधि बनकर एक व्यक्ति के क्रेडिट कार्ड से करीब 1.45 लाख रुपये निकाल लिए। सेक्टर-17 स्थित साइबर अपराध थाना पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर चार अप्रैल प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। 

केस-3

ग्रेटर फरीदाबाद के सेक्टर-78 निवासी संजय वर्मा ने पुलिस को बताया कि 13 मार्च 2026 को उनके पास एक मैसेज आया, जिसमें गैस कनेक्शन काटने की चेतावनी दी गई थी। इसके बाद ठगों ने उनसे वीडियो कॉल पर संपर्क किया और खुद को कंपनी का अधिकारी बताया। उस समय संजय अपनी एक अंतरराष्ट्रीय यात्रा की तैयारी में व्यस्त थे, जिसका फायदा उठाकर जालसाजों ने उन्हें अपनी बातों में उलझा लिया और उनके क्रेडिट कार्ड से दो बार में करीब 1.45 रुपये के ट्रांजेक्शन कर लिए।

➡️ गैस बिल अपडेट करने का मैसेज - 

इसके साथ ही सम्वाद न्यूज एजेन्सी नोएडा ब्यूरों 6 अप्रैल 2026 के अनुसार साइबर ठगों ने अब गैस बिल अपडेट करने के बहाने भी लोगों के फोन हैक कर बैंक खातों में सेंध लगानी शुरू कर दी है।

केस - 4

 सेक्टर-85 स्थित अमोलिक संकल्प सोसाइटी के एक निवासी के मोबाइल पर लिंक भेजकर जालसाजों ने उनका फोन हैक कर लिया और बैंक खाते से करीब 99,500 रुपये निकाल लिए। पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर ठगों के खिलाफ चार अप्रैल को प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पीड़ित राजीव ने पुलिस को बताया कि 21 फरवरी 2026 को उनके व्हाट्सएप पर एक अनजान नंबर से मैसेज आया। मैसेज में गैस का बिल अपडेट करने के लिए एक लिंक दिया गया था। जैसे ही राजीव ने लिंक पर क्लिक किया, उनका फोन अचानक बंद हो गया। कुछ देर बाद फोन चालू हुआ तो वह ठीक से काम नहीं कर रहा था। घबराहट में राजीव ने अपना फोन फॉर्मेट कर दिया, जिससे उनका व्हाट्सएप डेटा और ठगों द्वारा भेजा गया मैसेज भी डिलीट हो गया। अगले दिन बैंक जाने पर राजीव को पता चला कि उनके बैंक खाते से कुल 99,500 रुपये काटे जा चुके हैं। यह राशि 4 से 5 अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिये निकाली गई थी। पीड़ित ने तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई।

➡️ एडवांस्ड बुकिंग की APK फाइल मैसेज

केस - 5

संवाद न्यूज एजेन्सी शामली 12 अप्रैल 2026 के अनुसार गैस की किल्लत के चलते साइबर ठगों ने मोहल्ला काकानगर निवासी व्यापारी के व्हाट्सएप पर गैस की एडवांस बुकिंग के नाम से डॉट एपीके पीडीएफ फाइल भेज दी। फाइल पर क्लिक करते ही व्हाट्सएप हैक हो गया। इसके बाद व्हाट्सएप ग्रुपों में जुड़े 1500 लोगों को एपीके फाइल भेजकर साइबर ठगी की कोशिश की गई। पीड़ित व्यापारी ने मामले की शिकायत साइबर सेल से की है।

शहर के मोहल्ला काकानगर निवासी सत्यप्रकाश अग्रवाल ने बताया कि शनिवार शाम करीब साढ़े तीन बजे उनके व्हाट्सएप पर गैस की एडवांस बुकिंग के नाम से डॉट एपीके पीडीएफ फाइल आई। उसके साथ ही लिखा था कि डाउनलोड करिए और गैस सिलिंडर बुक कर लीजिए। उन्होंने जैसे ही उसने फाइल पर क्लिक किया तो उनका व्हाट्सएप हैक हो गया। इसके बाद उनके मोबाइल फोन के व्हाट्सएप ग्रुपों में और परिचितों समेत एक हजार लोगों से ज्यादा को एपीके फाइल भेज दी गई। जब उनके पास परिचितों के फोन आने शुरू हुए तब उन्हें व्हाट्सएप हैक होने की जानकारी मिली, हालांकि अभी तक किसी के साथ ठगी होने के बारे में जानकारी नहीं मिली।पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है।

➡️ क्या होता है फोन फॉर्मेट करना - 

फोन फॉर्मेट करना (Factory Reset) एक ऐसी प्रक्रिया है जो आपके मोबाइल से फोटो, वीडियो, ऐप्स, कॉन्टैक्ट्स और सेटिंग्स सहित सारा डेटा मिटाकर उसे एकदम नए (डिफ़ॉल्ट) जैसा बना देती है। यह फोन हैंग होने, धीमा चलने, वायरस आने या बेचने से पहले किया जाता है, जिससे फोन का स्टोरेज साफ़ होकर प्रदर्शन बेहतर हो जाता है।

➡️ लिंक क्लिक करना फोन के लिए नुकसानदेह - 

साइबर अपराधी मैसेज के जरिए लिंक भेजकर मोबाइल में मालवेयर इंस्टॉल कर देते हैं। आजकल गैस उपभोक्ताओं के फोन पर गैस सब्सिडी रुक गई है या केवाईसी न होने पर कनेक्शन कट जाएगा जैसे मैसेज भेजे जा रहे हैं। लिंक पर क्लिक करते ही फोन का एक्सेस हैकर्स के पास चला जाता है, जिससे बैंक खाते और निजी डाटा खतरे में पड़ सकता है।

➡️ साइबर सेल द्वारा जारी एडवाइजरी-

साइबर सेल ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें और अनजान कॉल पर ओटीपी साझा न करें। गैस से जुड़े काम केवल आधिकारिक ऐप या अधिकृत वेबसाइट के जरिए ही करें। ई-केवाईसी भी केवल विश्वसनीय प्लेटफॉर्म से ही कराएं।

➡️ साइबर एक्सपर्ट की सलाह - 

अनजान कॉल व लिंक पर न करें भरोसा, बरतें सावधानी

साइबर एक्सपर्ट संजीव भटनागर ने बताया कि डॉट एपीके फाइल पर न तो क्लिक करें और न ही डाउनलोड करें। ऐसा करने से साइबर ठगी हो सकती है। उन्होंने बताया कि अनजान कॉल/लिंक पर भरोसा न करें। ओटीपी, पिन या यूपीआई पासवर्ड समेत कोई भी निजी जानकारी साझा न करें। हमेशा आधिकारिक ऐप्स का उपयोग करें और अपने सिस्टम को अपडेट रखें। अगर किसी के साथ धोखाधड़ी हो जाती है तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

➡️ अधिकारी कह रहे हैं - 

साइबर सेल प्रभारी आशीष कुमार ने बताया कि अपराधी पैनिक पैदा कर लोगों को जाल में फंसाते हैं। यदि गैस कनेक्शन या सब्सिडी से जुड़ा कोई संदिग्ध मैसेज मिले तो उसकी पुष्टि संबंधित एजेंसी से करें। फिलहाल इस तरह के मामलों में ठगी की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सतर्क रहना जरूरी है।

➡️ साइबर विशेषज्ञ एडवोकेट की अनुभवी सलाह- 

साइबर कानून के क्षेत्र में कार्य कर रही शालिनी कौशिक एडवोकेट साइबर क्राइम से बचने के लिए प्राथमिक उपचार के रूप मे प्राथमिक हथियार इस्तेमाल करने की सलाह दे रही हैं जो कि व्यक्ति का हाथ होता है जो उसी के दिमाग से इस्तेमाल होता है. आप गौर कीजिए आपके पास कोई संदिग्ध लिंक आता है, संदिग्ध नंबर से कॉल आती है जल्दबाज़ी मे आप फोन फॉर्मेट के चक्कर में इन सभी को डिलीट कर देते हैं और उसके बाद आपको खाते से पैसे कम होने की बात पता चलती है तब आप बगैर किसी सबूत के मात्र पैसे कटने के आधार पर साइबर क्राइम होने पर 1930 पर कॉल करते हैं, जबकि आपको पहले अपने फोन पर उस नंबर का या उस लिंक का screenshot लेना चाहिए ताकि आप पुलिस की सहायता कर सकें और पुलिस आसानी से आपकी सहायक सिद्ध हो सके.

साइबर ठगी का यह दौर रोज ऐसे कारनामें गढ़ रहा है जिसके आगे साइबर क़ानून और पुलिस ही बेबस नजर आते हैँ फिर आम आदमी की बिसात ही क्या है? ऐसे में अगर जरुरत है तो बस इतनी कि अपनी आँखे खुली रखी जाएँ और दिमाग़ में सतर्कता, जब बार बार ये कहा जा रहा है कि ऑनलाइन गतिविधि में सतर्कता बरतने के लिए कहा जा रहा है .बार बार अपनी निजी जानकारी किसी को भी न देने के लिए कहा जा रहा है, फिर क्यूँ नहीं समझ रहे हैँ आप? साइबर ठग कोई एलियन नहीं हैँ कि आकाश से उतरते नजर आएं, ये हमारे बीच के ही पढ़ें लिखें सभ्य समाज के लोग हैँ, हम स्वयं अपने लालच में, अपने स्वार्थ में इन्हे आमंत्रित कर रहे हैँ खुद को ठगने के लिए, खुद ही साइबर ठगों के चंगुल में फंसकर साइबर ठगी की वारदात को सफल करा रहे हैं इसलिए आपको समझना होगा और जागरूक बनकर साइबर अपराध का मुकाबला करना होगा.

सतर्क रहिये-सुरक्षित रहेँगे.

धन्यवाद 🙏🙏

द्वारा 

शालिनी कौशिक 

एडवोकेट 

कैराना (शामली )

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