CYBER LAW 2️⃣ भारत में साइबर आतंकवाद

 

➡️ भारत में मुख्य साइबर कानून:

भारत में, साइबर कानून सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 द्वारा शासित होते हैं। यह अधिनियम ई-कॉमर्स, साइबर अपराध और डेटा सुरक्षा के लिए एक कानूनी ढांचा स्थापित करता है.

🌑 सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (Information Technology Act, 2000):

यह भारत में साइबर अपराधों से निपटने का मुख्य कानून है। यह अधिनियम विभिन्न साइबर अपराधों को परिभाषित करता है और उनकी सजा का प्रावधान करता है। इसी के अंतर्गत आप जानिए सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 66-च के बारे में - 

66-च. साइबर आतंकवाद के लिए दण्ड -

(1) जो कोई, -

(अ) भारत की एकता, अखण्डता, सुरक्षा या प्रभुता को खतरे में डालने या जनता या जनता के किसी वर्ग में, -

(i) कम्प्यूटर संसाधन तक पहुंच के लिए प्राधिकृत किसी व्यक्ति को पहुंच से इंकार करके या इंकार कराके; या

(ii) प्राधिकार के बिना या प्राधिकृत पहुंच से अधिक किसी कम्प्यूटर संसाधन में प्रवेश या उस तक पहुंच करने का प्रयास करके; या

(iii) किसी कम्प्यूटर संदूषक को सन्निविष्ट करके या सन्निविष्ट कराके,

आतंक फैलाने के आशय से और ऐसा करके ऐसा कार्य करता है जिससे व्यक्तियों की मृत्यु या उन्हें क्षति होती है या सम्पत्ति का नाश या विनाश होता है या होने की संभावना है या यह जानते हुए कि इससे समुदाय के जीवन के लिए आवश्यक आपूर्ति या सेवाओं को नुकसान या उसका विनाश होने की संभावना है या धारा 70 के अधीन विनिर्दिष्ट संवेदनशील सूचना अवसंरचना पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है; या

(आ) जानबूझकर या साशय किसी कम्प्यूटर संसाधन में प्राधिकार के बिना या प्राधिकृत पहुंच से अधिक प्रवेश या पहुंच करता है और ऐसे कार्य द्वारा ऐसी सूचना, डाटा या कम्प्यूटर डाटा आधारसामग्री तक, जो राष्ट्रीय सुरक्षा या विदेशी सम्बन्धों के कारण निर्बंधित है या कोई निर्बंधित सूचना डाटा या कम्प्यूटर डाटा आधारसामग्री तक यह विश्वास करते हुए पहुंच प्राप्त करता है कि इस प्रकार अभिप्राप्त ऐसी सूचना, डाटा या कम्प्यूटर डाटा आधारसामग्री का उपयोग भारत की प्रभुता और अखण्डता, राज्य की सुरक्षा, विदेशों के साथ मैत्रीपूर्ण सम्बन्धों, लोक व्यवस्था, शिष्टता या नैतिकता के हितों को या न्यायालय की अवमानना के सम्बन्ध में, मानहानि या किसी अपराध के उत्प्रेरण के सम्बन्ध में किसी विदेशी राष्ट्र, व्यष्टि, समूह के फायदे को क्षति पहुंचाने के लिए या अन्यथा किया जा सकता है या किए जाने की संभावना है,

तो वह साइबर आतंकवाद का अपराध करेगा।

(2) जो कोई साइबर आतंकवाद कारित या करने की कूटरचना करेगा, तो वह कारावास से जो आजीवन कारावास तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा।

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सतर्क रहें सुरक्षित रहेंगे 👍 

धन्यवाद 🙏 

स्रोत - सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (EKTA LAW AGENCY) धारा  66-च पेज 55-56

प्रस्तुति 

शालिनी कौशिक 

एडवोकेट

कैराना (शामली) 

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