परजीवी अपराधियों से सख्ती से निपटना होगा - सुप्रीम कोर्ट
साइबर धोखाधड़ी के एक मामले (निवेश धोखाधड़ी/investment fraud) की जमानत याचिका और एफआईआर (FIR) को क्लब करने (एक साथ जोड़ने) की याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा मौखिक रूप से दी गई एक सख्त कानूनी चेतावनी में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि
"साइबर अपराधी 'परजीवी' होते हैं जो मासूम निवेशकों को ठगने के लिए पैसे ऐंठते हैं। हमें उनसे बहुत ही सख्ती से निपटना होगा।"
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ये टिप्पणियां मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने साइबर धोखाधड़ी के आरोपी की याचिका पर सुनवाई के दौरान कीं। उक्त साइबर धोखाधड़ी के आरोपी व्यक्ति ने अलग-अलग राज्यों में अपने खिलाफ दर्ज कुछ प्राथमिकी को एक साथ जोड़ने का अनुरोध किया था। जिस की सुनवाई करते हो हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि
आप लोग (साइबर अपराधी) 'परजीवी' हैं। आप जैसे लोग भोलेभाले निवेशकों से पैसे लेते हैं और उनके साथ ठगी करते हैं। साइबर अपराधियों के खिलाफ हमें बहुत सख्ती से निपटना होगा। ऐसे अपराधों के पीड़ित पूरे देश में फैले हैं।
सीजेआई ने याचिकाकर्ता से कहा कि
आप जैसे लोग तमिलनाडु में किसी के साथ ठगी करते हैं, फिर जम्मू-कश्मीर और उसके बाद पूर्वोत्तर चले जाते हैं। साइबर अपराधियों को जेल में रखना समाज के हित में होगा।
शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता के खिलाफ अलग-अलग राज्यों में दर्ज कुछ प्राथमिकी को एक साथ जोड़ने की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। खण्ड पीठ ने कहा कि
याचिकाकर्ता राहत पाने के लिए संबंधित अधिकार क्षेत्र वाले हाईकोर्ट का रुख कर सकता है।
इस मौखिक टिप्पणी के दौरान जो मुख्य बातें सामने आईं, वे इस प्रकार हैं:
➡️ टिप्पणी का अर्थ:
मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट रूप से कहा कि,
"तुम लोग परजीवी हो, जो भोले-भाले निवेशकों से करोड़ों रुपये ठगते हैं। साइबर अपराधियों के साथ हमें बहुत सख्त होना होगा।"
➡️ याचिकाकर्ता (Accused):
यह टिप्पणी एक ऐसे व्यक्ति की जमानत और उसके खिलाफ अलग-अलग राज्यों (जैसे तमिलनाडु, जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर आदि) में दर्ज एफआईआर को एक साथ जोड़ने की याचिका पर सुनवाई करते हुए की गई थी।
➡️ कोर्ट का रुख:
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता की इस मांग को खारिज कर दिया। अदालत ने माना कि ऐसे अपराधियों का जेल के अंदर रहना ही समाज और अर्थव्यवस्था के व्यापक हित में है।
इस प्रकार सुप्रीम कोर्ट का यह रुख साइबर क्राइम को लेकर न्यायलय का यही रुख जाहिर करता है कि न्यायालय साइबर अपराधियों के खिलाफ बहुत कड़ा रुख अख्तियार करने वाला है और आम जनता के ऊपर पड़ने वाले भय और दहशत के माहौल को देखते हुए साइबर अपराधियों के साथ आम अपराधियों के समान नर्मी बरतने का कोई मतलब ही दिखाई नहीं दे रहा है.
द्वारा
शालिनी कौशिक
एडवोकेट
कैराना (शामली)

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