Fake loan apps (नकली लोन ऐप्स) साइबर फ्रॉड
Fake Loan Apps (नकली लोन ऐप्स) ऐसे धोखेधड़ी वाले मोबाइल एप्लिकेशन हैं जो तुरंत और आसानी से लोन देने का झांसा देकर भोले-भाले लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं। ये ऐप्स आमतौर पर सोशल मीडिया, विज्ञापनों या एसएमएस के जरिए प्रचारित किए जाते हैं और आरबीआई (RBI) के नियमों का उल्लंघन करते हुए अवैध रूप से काम करते हैं।
फेक लोन ऐप्स कैसे काम करते हैं और इनके खतरे:
- डेटा की चोरी (Data Theft): ये ऐप्स डाउनलोड होते ही मोबाइल की गैलरी, कॉन्टैक्ट्स (संपर्कों), और लोकेशन जैसी सेंसिटिव (संवेदनशील) जानकारियों तक अवैध एक्सेस ले लेते हैं।
- ब्लैकमेल और उत्पीड़न (Harassment): लोन चुकाने के बाद भी या थोड़ा सा भी विलंब होने पर ये लोग आपके कॉन्टैक्ट्स में मौजूद दोस्तों और परिवार के सदस्यों को फर्जी और अपमानजनक संदेश भेजते हैं। कई बार मॉर्फ्ड (बदली हुई) अमोद तस्वीरें भी भेजकर ब्लैकमेल किया जाता है।
- अचानक भारी ब्याज दरें (Exorbitant Interest Rates): ये ऐप्स बहुत कम समय (जैसे 7 दिन) के लिए लोन देते हैं और उस पर छिपा हुआ शुल्क, प्रोसेसिंग फीस और भारी-भरकम ब्याज लगाकर रकम को कई गुना बढ़ा देते हैं।
फर्जी लोन ऐप्स की पहचान कैसे करें:
- आरबीआई की मंजूरी का अभाव: ये कंपनियां अक्सर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से रजिस्टर्ड नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) नहीं होती हैं।
- आसान और तुरंत अप्रूवल: बिना किसी सिबिल (CIBIL) स्कोर, बिना इनकम प्रूफ और बिना किसी दस्तावेज के तुरंत लोन देना इनका मुख्य तरीका होता है।
- अजीब परमीशन मांगना: ऐप इंस्टॉल करते समय कैमरा, गैलरी और कॉन्टैक्ट लिस्ट की परमीशन मांगना, जबकि वैध वित्तीय ऐप्स को इनकी जरूरत नहीं होती।
- अस्पष्ट डेवलपर जानकारी: प्ले स्टोर या ऐप स्टोर पर इन ऐप्स के डेवलपर का नाम संदिग्ध या अनजान होता है और इनके बारे में ऑनलाइन कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिलती।
बचाव और सुरक्षा के उपाय:
- अनजान ऐप्स से बचें: किसी भी ऐसे ऐप से लोन न लें जिसे आप जानते नहीं हैं या जो गूगल प्ले स्टोर/एप्पल ऐप स्टोर पर वेरिफाइड नहीं है।
- आरबीआई की सूची जांचें: केवल उन्हीं ऐप्स का उपयोग करें जो आरबीआई द्वारा अधिकृत वैध एनबीएफसी या बैंकों से जुड़े हों।
- परमीशन चेक करें: ऐप इंस्टॉल करते वक्त ध्यान रखें कि वह आपकी पर्सनल गैलरी या कॉन्टैक्ट्स तक पहुंच न मांग रहा हो।
- शिकायत दर्ज करें: यदि आप ऐसे किसी धोखाधड़ी का शिकार हो जाते हैं, तो तुरंत साइबर क्राइम पोर्टल (
cybercrime.gov.in) पर शिकायत दर्ज करें या राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें।
द्वारा
शालिनी कौशिक
एडवोकेट
कैराना (शामली)

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